फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Global fight against coronavirus has been in deep dilemma due to Vaccine related reports

महामारी से जंग: गहरे भ्रम का शिकार हो गई है कोरोना वायरस से दुनिया की लड़ाई

Wed, 14 Apr 2021 11:11 PM IST
गौरव पाण्डेय डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, मॉस्को
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, मॉस्को Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 14 Apr 2021 11:11 PM IST
सार

वैक्सीन को उठे सवालों से कोरोना वायरस की रोकथाम को लेकर दुनिया की लड़ाई भ्रम का शिकार हो गई है। इसमें सबसे ताजा पहलू जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी के टीके के इस्तेमाल पर अमेरिका में लगाई गई रोक से जुड़ा है। इस टीके के बारे में ये शिकायत आई है कि इसे लगवाने के बाद कई लोगों के शरीर में खून के थक्के जमे। ऑक्सफोर्ड- ऐस्ट्राजेनेका के टीके को लेकर भी ऐसी शिकायतें आई थीं। उसके बाद पिछले महीने यूरोपीय संघ के कई देशों में इसका इस्तेमाल रोक दिया था। 

विज्ञापन
Global fight against coronavirus has been in deep dilemma due to Vaccine related reports
दुनिया में कोरोना - फोटो : पिक्साबे

विस्तार

स्पेन की यूनिवर्सिटी ऑफ ला लागुना में जीवाणु विज्ञान, प्रतिरक्षण विज्ञान और फार्माकोलॉजी के विशेषज्ञ ऑगस्तिन वेनेजुएला ने कहा, 'इसमें कोई हैरत नहीं है कि लोग भ्रम का शिकार हैं।' वेबसाइट रशिया टुडे से बातचीत में उन्होंने कहा, 'जब कोई स्पष्ट सूचना मौजूद नहीं है, तो संदेह पैदा होंगे। लोगों को बताया जाता है कि एक वैक्सीन ऐसी है, जो सिर्फ नौजवानों के लिए है। फिर बताया जाता है कि वह सिर्फ बुजुर्गों के लिए है। कुछ देश रोक लगा देते हैं, जबकि कुछ इस्तेमाल जारी रखते हैं, तो ऐसी स्थिति में भ्रम पैदा होंगे।'

विज्ञापन


पिछले हफ्ते यूरोप की ड्रग एजेंसी ईएमए ने एस्ट्राजेनेका के वैक्सीन और खून के थक्के जमने के बीच संबंध होने की पुष्टि कर दी थी। हालांकि तब इस एजेंसी ने कहा था कि टीका लगवाने पर होने वाला लाभ जोखिम की तुलना में बहुत ज्यादा है। इसके पहले सामने आए आंकड़ों से जाहिर हुआ था कि ये टीका लगवाने के बाद नौजवानों में ब्लड क्लॉट बनने का खतरा ज्यादा रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जो लोग भी ये टीका लगवा रहे हैं, वे यही सोच कर ले रहे हैं संभावित फायदा जोखिम से ज्यादा है। इसके अलावा टीका लेने से बेहतर कोई और विकल्प नहीं है।
विज्ञापन


70 फीसदी लोगों को एस्ट्राजेनेका के टीके पर भरोसा नहीं
मगर विभिन्न देशों में इस टीके को लेने के लिए जो सुरक्षित उम्र तय की गई है, वह अलग-अलग है। फ्रांस में इस वैक्सीन को 55 वर्ष से ऊपर के लोगों के लिए मंजूरी दी गई है। जर्मनी में 60 वर्ष से ज्यादा के लोग इसे लगवा सकते है। स्पेन में इसे 60 से 69 वर्ष के लोगों के लिए मंजूरी देने पर विचार चल रहा है। शायद इन्हीं कारणों से फ्रांस में हुए एक हालिया सर्वे में 70 फीसदी से ज्यादा लोगों ने कहा कि वे ऐस्ट्राजेनेका की वैक्सीन पर भरोसा नहीं करते।
विज्ञापन
विज्ञापन


फ्रांस की सोरबॉन यूनिवर्सिटी में जीवाणु विज्ञान के प्रोफेसर विन्सेंट मारशल ने रशिया टुडे से कहा, 'फ्रांस में टीकों को लेकर शक का भाव रखने वाले लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है। लोगों में आम तौर पर टीकों को लेकर भरोसा नहीं है। एस्ट्राजेनेका के बारे प्रचारित कहानियों से भरोसा और घटा है। यह लाभ और जोखिम के बीच विवेकपूर्ण ढंग से फैसला लेने का मामला बन गया है।' उधर स्पेन में भी ऐसे लोग बड़ी संख्या में हैं, जिन्होंने टीका लेने के लिए तय उम्र की सीमा के दायरे में आने के बावजूद अभी तक टीका नहीं लगवाया है।

वैक्सीन पर बयानबाजी, फायदे-नुकसान पर हो रही बहस
अब आशंका जताई जा रही है कि जैसा अविश्वास एस्ट्राजेनेका के टीके को लेकर फैला है, वैसा ही जॉनसन एंड जॉनसन के टीके को लेकर भी पैदा हो सकता है। उधर फाइजर कंपनी का यह बयान भी बहुचर्चित है कि कोविड-19 के कुछ नए रूपों पर मुमकिन है कि उसका टीका असरदार न हो। कंपनी ने कुछ समय पहले कहा था कि उसका टीका कम से कम छह महीनों तक प्रभावी सुरक्षा देगा। इन बयानों से भी टीका लेने के फायदों पर बहस खड़ी हुई है।

इंग्लैंड की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा में कार्यरत डॉ. मैलकम केंड्रिक का कहना है, 'ये सारे निष्कर्ष जल्दबाजी में निकाले गए हैं। ये एक ऐसी समस्या है, जिसका हमारे पास कोई जवाब नहीं है।' प्रोफेसर वेनेजुएला ने इस बात पर अनुसंधान की जरूरत बताई है कि क्या एस्ट्राजेनेका के वैक्सीन को किसी दूसरे टीके के साथ मिला कर लेने पर बेहतर प्रतिरक्षण क्षमता विकसित होगी। उन्होंने कहा, 'अब जरूरत इस बात की है कि राजनेता और वैज्ञानिक मिल कर लोगों को यह समझाने की कोशिश करें कि अभी चौथे चरण के क्लीनिकल परीक्षण चल रहे हैं। तीन चरणों के परीक्षणों से कुछ आंकड़े सामने आए, जिनका संबंध सुरक्षा और शरीर की प्रतिरक्षण क्षमता पर होने वाले असर से है। लेकिन ये सारे परीक्षण बहुत जल्दबाजी में हुए।'


उन्होंने कहा कि टीका ही महामारी के खिलाफ मुख्य हथियार है, इसलिए इस पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए। इसलिए ये जरूरी है कि लोगों को टीका लगाया जाए। वायरस से मरने वालों की संख्या टीकों के कारण हुई मौतों से बहुत ज्यादा है। इसलिए इस वक्त की पहली जरूरत कोरोना वायरस के संक्रमण और उसके नए रूप पैदा होने को रोकना है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed