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क्या जर्मनी में धूमिल हो जाएगी एंजेला मर्केल की विरासत? दो राज्यों के चुनावी नतीजों के बाद लग रहे कयास

Mon, 15 Mar 2021 06:14 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 15 Mar 2021 06:14 PM IST
सार

रविवार को हुए चुनावों में सबसे बड़ी जीत ग्रीन पार्टी को मिली है। बाडेन-वुटमबर्ग राज्य में ये पार्टी पिछली बार की तरह ही पहले नंबर पर रही। राइनलैंड-पलाटीनेट राज्य में उसे मिले वोटों की संख्या दो गुना हो गई...

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Germany Chancellor Angela Merkel Party christian democratic union defeat in two states
जर्मनी का चांसलर एंजेला मर्केल - फोटो : Twitter

विस्तार

जर्मनी के दो राज्यों में क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक पार्टी (सीडीयू) की बुरी हार ने ये चर्चा छेड़ दी है कि क्या 16 वर्षों तक लगातार देश की चांसलर रहीं एंजेला मर्केल की विरासत आखिर में जाकर धूमिल हो जाएगी? इसी साल सितंबर में जर्मनी में आम चुनाव होने वाले हैं, जिसमें मैर्केल के उत्तराधिकारी का चुनाव होगा। उसके पहले इन दोनों राज्यों में हुए चुनाव को बेहद अहम माना जा रहा था। विश्लेषकों का कहना है कि इन चुनाव नतीजों से देश के मूड की झलक मिली है।

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ये चुनाव कोरोना महामारी के साये और कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए टीकाकरण की धीमी रफ्तार के कारण चल रहे विवाद के बीच हुए। इनके अलावा हाल में सामने आए मास्क घोटाले का असर भी इस पर पड़ा। इस घोटाले के कारण सीडीयू के नेतृत्व वाले गठबंधन के तीन सांसदों को इस्तीफा देना पड़ा है। उन पर आरोप था कि उन्होंने मास्क की खरीदारी का सरकारी ठेका दिलवाने में फायदा उठाया।
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सीडीयू के लिए सबसे बुरी खबर बाडेन-वुटमबर्ग राज्य से आई, जहां इसे मुंह की खानी पड़ी। ये राज्य देश की मशहूर ऑटो इंटस्ट्री का केंद्र है। दूसरे राज्य यानी राइनलैंड-पलातीनेट के चुनाव नतीजे का भी खासा प्रतीकात्मक महत्त्व है, क्योंकि ये पूर्व चांसलर हेल्मुट कोल का गृह राज्य है। कोल देश में बहु-प्रतिष्ठित रहे हैं। वे सीडीयू के नेता थे और उनके कार्यकाल में ही पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी का एकीकरण हुआ था।
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बाडेन-वुटमबर्ग राज्य में सीडीयू के वोटों में 2016 में हुए पिछले चुनाव की तुलना में 15 फीसदी की गिरावट आई। इस पार्टी के समर्थन में इतनी कमी इसके पहले कभी नहीं आई थी। इस राज्य में पार्टी की प्रमुख नेता सुजेन आइसेनमान ने चुनाव नतीजे आने के बाद कहा- हमें ये बात ईमानदारी से माननी होगी कि सीडीयू के लिए नतीजे विनाशकारी रहे।

रविवार को हुए चुनावों में सबसे बड़ी जीत ग्रीन पार्टी को मिली है। बाडेन-वुटमबर्ग राज्य में ये पार्टी पिछली बार की तरह ही पहले नंबर पर रही। राइनलैंड-पलाटीनेट राज्य में उसे मिले वोटों की संख्या दो गुना हो गई। विश्लेषकों ने कहा है कि इस नतीजे का सीधा मतलब यह है कि जर्मनी के लोग अब पर्यावरण की खास चिंता करते हुए वामपंथ की तरफ झुक रहे हैं।

इन नतीजों को इस बात भी संकेत माना जा रहा है कि 16 वर्षों तक लगातार चांसलर एंजेला मर्केल के नेतृत्व में आस्था बनाए रखने के बाद लोगों का अब उनसे मोहभंग हो रहा है। मर्केल एलान कर चुकी हैं कि इस साल सितंबर में होने वाले चुनाव के बाद वे पद छोड़ देंगी। लेकिन अगले चुनाव में अपने उत्तराधिकारी के तौर पर अपने समर्थक आर्मिन लाशेट को जितवाने के लिए उन्होंने एड़ी-चोटी का जोर भी लगा रखा है। जानकारों का कहना है कि दो राज्यों के नतीजे इस बात का संकेत हैं कि अब लाशेट का जीत सकना मुश्किल होगा।    


इन चुनाव नतीजों ने साफ कर दिया है कि दक्षिणपंथी सीडीयू के देश में डेढ़ दशक से जारी वर्चस्व के लिए गंभीर चुनौती पैदा हो गई है। इससे मुमकिन है कि एंजेला मर्केल जीत के अटूट रिकॉर्ड के साथ अपने पद से विदा ना हो सकें। सीडीयू की जर्मनी में ऐसी छवि है कि सरकार चलाना जानने वाली वह अकेली पार्टी है। लेकिन देश में बढ़ी आर्थिक समस्याओं और टीकाकरण की गति को लेकर सामने आई शिकायतों के कारण ऐसा लगता है कि जर्मनी के लोगों का ये भरोसा डिग गया है। कई दूसरे देशों की तरह अब वे भी वामपंथ में समाधान देख रहे हैं। जानकारों का कहना है कि अगर सितंबर के चुनाव में सीडीयू हार गई तो मर्केल एक धूमिल विरासत छोड़ कर जांएगी, जिसके बारे में अभी साल भर पहले तक सोचना भी मुश्किल था।

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