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कोरोना की मार: यूरोपीय संघ और जर्मनी सरकार के राहत सौदे को लुफ्थांसा एयरलाइन ने किया स्वीकार
Mon, 01 Jun 2020 09:54 PM IST
Rohit Ojha
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Rohit Ojha
Updated Mon, 01 Jun 2020 09:54 PM IST
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Lufthansa Boeing 777F Cargo
- फोटो : Lufthansa
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कोरोना वायरस महामारी के कारण आर्थिक संकट से घिरी जर्मनी की राष्ट्रीय वाहक लुफ्थांसा सरकारी मदद लेने की शर्तों को स्वीकार कर लिया है। लुफ्थांसा पर्यवेक्षी बोर्ड ने सोमवार को कहा कि उसने जर्मनी और यूरोपीय संघ के साथ संघर्षरत जर्मन एयरलाइन को बचाने के लिए हुए समझौते को स्वीकार कर लिया है। वार्ता पिछले सप्ताह से चल रही थी और शुक्रवार देर रात एक समझौते पर सहमति बनी थी। हालांकि इस निर्णय की पुष्टि आधिकारिक रूप से 25 जून को होने वाली समूह की एक आम बैठक में की जाएगी।
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लुफ्थांसा बोर्ड के अध्यक्ष कार्ल-लुडविग केली ने कहा कि लुफ्थांसा के लिए आगे की राह बेहद कठिन है। लुफ्थांसा समूह, जिसमें ब्रुसेल्स, ऑस्ट्रियन और स्विस एयरलाइंस शामिल हैं, को कोरोवायरस वायरस की चपेट में आने के बाद से हर घंटे एक मिलियन यूरो ( 1.1 मिलियन डॉलर ) का नुकसान हो रहा है। कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए दुनिया भर में लगाए गए यात्रा प्रतिबंधों के चलते उसे गंभीर वित्तीय गिरावट का सामना करना पड़ा। लुफ्थांसा के बेड़े के लगभग 95 प्रतिशत विमान वर्तमान में जमीन पर हैं।
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लुफ्थांसा के सीईओ कार्स्टन स्पोह्र ने कहा, 'जर्मन संघीय सरकार के साथ मिलकर वैश्विक हवाई परिवहन में अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रखना हमारा लक्ष्य होना चाहिए।' उन्होंने लुफ्थांसा के ग्राहकों, कर्मचारियों और शेयरधारकों का भी आभार व्यक्त किया।
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जर्मन सरकार और लुफ्थांसा के प्रबंधन के बीच कोरोना वायरस महामारी के दौरान हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए पिछले दिनों एक बहुप्रतीक्षित समझौता हुआ। जर्मन एयरलाइन समूह लुफ्थांसा ने बर्लिन के साथ नौ अरब यूरो (9.8 अरब डॉलर) के राहत सौदे की सहमति बनी थी, जिसे अब मंजूरी मिल गई है।
यह डील सरकार को कंपनी में 20 प्रतिशत की हिस्सेदारी देगी। यह सौदा जर्मन सरकार को कंपनी का सबसे बड़ा शेयरधारक बना देगा। यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन कोरोना वायरस प्रकोप के चलते लगे लॉकडाउन के कारण नुकसान में चली गई।