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म्यांमार में सैनिक शासन के छह महीने: आंदोलन में आया ठहराव, लेकिन विरोध पहले जैसा ही

Mon, 02 Aug 2021 03:50 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 02 Aug 2021 03:50 PM IST
सार

26 जुलाई को देश के चुनाव आयोग ने एक अधिसूचना जारी कर पिछले आम चुनाव के नतीजों को अंतिम रूप से रद्द कर दिया। पर्यवेक्षकों का कहना है कि आयोग जल्द ही एनएलडी पार्टी को भंग करने का आदेश भी देने वाला है...

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General min aung hlaing has said that he will hold general elections in myanmar within two years
म्यांमार में विरोध - फोटो : ANI (File)

विस्तार

रविवार (एक अगस्त) को म्यांमार में सैनिक तख्ता पलट हुए छह महीने पूरे हो गए। लेकिन ताजा मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि इस अवधि में सैनिक शासक जनता का आक्रोश शांत करने में नाकाम रहे हैं। यह जरूर है कि अब पहले की तरह रोजमर्रा के स्तर पर विरोध प्रदर्शन नहीं हो रहे हैं।

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सैनिक शासन के प्रमुख जनरल मिन आंग हलैंग ने कहा है कि दो साल के अंदर वे देश में आम चुनाव करेंगे। लेकिन उनकी बातों पर आमतौर पर म्यांमार के लोगों को यकीन नहीं है। हालांकि पिछले एक फरवरी को हुए तख्तापलट के बाद जिस तरह का जन विरोध फैला था, अब उसमें कमी आ गई है। लेकिन अभी भी छिटपुट रूप से प्रतिरोध जारी है।
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बीते 23 मई को एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें जेल में कैद लोग ‘तानाशाही मुर्दाबाद और सु की को रिहा करो’ के नारे लगाते सुने गए। सेना का आरोप है कि पूर्व सत्ताधारी आंग सान सू की के नेतृत्व वाली पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) व्यापक भ्रष्टाचार में शामिल थी और नवंबर 2020 में हुए आम चुनाव को उसने धांधली के जरिए जीता। एनएलडी लगभग एक दशक सत्ता में रही। उसके पहले लंबे समय तक देश में सैनिक शासन रहा था।
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अब सू की और एनएलडी के दूसरे नेताओं पर पर मुकदमा चलाया जा रहा है। सू की पर दस आरोप लगाए गए हैं। इनमें भ्रष्टाचार निरोधक कानून का उल्लंघन करने का इल्जाम भी है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक मुकदमे में फैसला सितंबर या अक्टूबर तक आएगा। सैनिक शासन के तहत निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद नहीं है। इसलिए मुकदमे पर फैसले का देश में ज्यादा लोग इंतजार नहीं कर रहे हैं।

इस बीच पिछले 26 जुलाई को देश के चुनाव आयोग ने एक अधिसूचना जारी कर पिछले आम चुनाव के नतीजों को अंतिम रूप से रद्द कर दिया। इसका कारण बताते हुए आयोग ने कहा कि एनएलडी ने प्रशासनिक अधिकारों का दुरुपयोग किया। उसने कोरोना महामारी के लिए लागू किए गए नियमों को चुनाव पर लागू करके उसे गलत ढंग से प्रभावित किया। पर्यवेक्षकों का कहना है कि आयोग जल्द ही एनएलडी पार्टी को भंग करने का आदेश भी देने वाला है।

म्यांमार में राजनीतिक कैदियों की सहायता के लिए बनाए गए संघ का कहना है कि सैनिक शासन विरोधी प्रदर्शनों के दौरान बीते छह महीनों में 936 लोगों की मौत हुई। इस दौरान दसियों हजार लोग सड़कों पर उतरे। शुरुआती महीनों में रोजमर्रा के स्तर पर देशभर में विशाल विरोध प्रदर्शन आयोजित हो रहे थे। लेकिन अब अब इनमें ठहराव आ गया है।


कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि अगर सैनिक शासक अपने वादे पर कायम रहे, तब भी अगस्त 2023 के पहले देश में आम चुनाव नहीं होंगे। वे चुनाव भी सेना के साये में होंगे। अगर एनएलडी को भंग कर दिया गया, तो फिर चुनाव में कोई ऐसी मजबूत ताकत नहीं होगी, जो सैनिक शासन को चुनौती दे सके। इसलिए ज्यादातर पर्यवेक्षक और कारोबार जगत के लोग यह मान कर चल रहे हैं कि सैनिक शासन लंबे समय के लिए है। इसमें फर्क तभी पड़ सकता है, अगर किसी मौके पर जनता के अंदर पल रहा आक्रोश व्यापक रूप से सड़कों पर फिर से उफन पड़े।

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