जर्मनी में आम चुनाव: मतदान से ठीक पहले धुंधली हो गई चुनावी सूरत, अनिश्चिता से निवेशक हुए आशंकित
ताजा सर्वेक्षणों के मुताबिक ग्रीन पार्टी के लिए समर्थन 16 फीसदी, फ्री डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए 10.5 से 12 फीसदी, धुर दक्षिणपंथी पार्टी ऑल्टरनेटिव फॉर ड्यूशलैंड के लिए 10 फीसदी और वामपंथी पार्टी डाय लिंके के लिए 5 से 6 फीसदी पर बना हुआ है। चुनाव के बाद गठबंधन बनाने के क्रम में इन सभी पार्टियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जर्मनी में आम चुनाव से ठीक पहले चुनावी सूरत फिर धुंधली हो गई है। इस हफ्ते सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (एसपीडी) वो बढ़त कायम नहीं रख सकी, जो चुनाव अभियान के ज्यादातर समय उसे मिलती दिख रही थी। इसकी वजह चांसलर अंगेला मैर्केल की पार्टी क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) और उसकी सहयोगी पार्टी क्रिश्चियन सोशल यूनियन (सीएसयू) के समर्थन में आया उछाल है। ताजा ट्रेंड को देखते हुए अब जानकार ये अनुमान लगाने से बच रहे हैं कि रविवार को पलड़ा किस तरफ झुकेगा।
शुक्रवार को दो प्रमुख एजेंसियों ने अपने चुनाव पूर्व जनमत सर्वेक्षण जारी किए। सिविय नाम की एजेंसी के सर्वे के मुताबिक एसपीडी को पहले के अनुमान के मुताबिक 25 फीसदी वोट मिल सकते हैं। लेकिन सीडीयू-सीएसयू गठबंधन के लिए समर्थन अब 23 फीसदी होता दिख रहा है। एलेन्सबैक नाम की एजेंसी की सर्वे में मुकबला उससे भी अधिक कांटे का बताया गया है। उसके मुताबिक एसपीडी को 26 और सीडीयू-सीएसयू को 25 फीसदी वोट मिलने का अनुमान है।
ताजा सर्वेक्षणों के मुताबिक ग्रीन पार्टी के लिए समर्थन 16 फीसदी, फ्री डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए 10.5 से 12 फीसदी, धुर दक्षिणपंथी पार्टी ऑल्टरनेटिव फॉर ड्यूशलैंड के लिए 10 फीसदी और वामपंथी पार्टी डाय लिंके के लिए 5 से 6 फीसदी पर बना हुआ है। चुनाव के बाद गठबंधन बनाने के क्रम में इन सभी पार्टियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। वैसे एसपीडी के लिए राहत की बात अभी भी यह है कि उसके नेता ओलफ शोल्ज चांसलर पद के लिए 47 फीसदी मतदाताओं की पसंद बने हुए हैं। जबकि सीडीयू के नेता अरमिन लैशेट सिर्फ 20 प्रतिशत मतदाताओं की पसंद हैं।
ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक संभावित चुनाव नतीजों को लेकर अनिश्चय कायम रहने से निवेशक आशंकित हैं। जर्मनी यूरोपियन यूनियन के भीतर सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। वहां कैसी सरकार बनेगी और वह किन नीतियों पर चलेगी, इसे लेकर पूरे यूरोप में गहरी दिलचस्पी रहती है। निवेशकों का कहना है कि अगर एसपीडी के नेतृत्व में सरकार बनी, तो वामपंथ की तरफ झुकाव वाली नीतियां अपनाएगी। उसके शासनकाल में सरकारी खर्च बढ़ेगा, जिसका असर जर्मनी की राजकोषीय स्थिति पर पड़ेगा। जबकि अंगेला मैर्केल के 16 साल के चांसलर काल में जोर सरकारी कर्ज घटाने पर रहा।
इनसाइट इन्वेस्टमेंट नाम की संस्था के अधिकारी गैरेथ कोलस्मिथ ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा- ‘मेरी राय है कि चुनाव के बाद जर्मनी में राजनीतिक बदलाव आएगा। बाजार के नजरिए से इससे बदलाव से जुड़े सवाल बहुत अहम हैं।’
विश्लेषकों के मुताबिक अगर एसपीडी सबसे बड़ी पार्टी रही और उसके नेतृत्व में सरकार बनी, तो असल बात यह देखने की होगी कि उस सरकार में गठबंधन सहयोगी के तौर पर कौन सी पार्टियां शामिल होती हैं। अगर एसपीडी ने फ्री डेमोक्रेट्स के साथ सरकार बनाई, तो बाजार की आशंकाएं घटेंगी। लेकिन अगर उसने डाय लिंके को साथ लिया, तो बाजार में घबराहट फैल सकती है। डाय लिंके का एजेंडा धनी लोगों पर टैक्स बढ़ाना और बड़े पैमाने पर सार्वजनिक निवेश है।
ग्रीन पार्टी की प्राथमिकताओं को लेकर भी आशंकाएं हैं, जो पेट्रोलियम का उपयोग खत्म करने और ग्रीन अर्थव्यवस्था बनाने पर जोर दे रही है। यह मान कर चला जा रहा है कि ग्रीन पार्टी संभावित गठबंधन का एक घटक जरूर होगी।