फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   gas crisis: As compared with britain, France marginal increase the cost of energy

Gas Crisis: फ्रांस में क्यों नहीं मची है गैस के लिए ब्रिटेन जैसी अफरातफरी? दाम भी बढ़े बेहद मामूली

Sat, 20 Aug 2022 02:33 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 20 Aug 2022 02:33 PM IST
सार

Gas Crisis: इसका कारण दोनों देशों में मार्केट रेगुलेशन की नीतियों में फर्क है। ब्रिटेन की नीति ऊर्जा कंपनियों को संरक्षण देने वाली है। जबकि फ्रांस में सरकार ने कीमत तय करने में अपनी भूमिका बनाए रखी है...

विज्ञापन
gas crisis: As compared with britain, France marginal increase the cost of energy
Gas Crisis: gas stations - फोटो : Agency

विस्तार

ब्रिटेन के लोगों को ऊर्जा की अत्यधिक महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। अगली सर्दियों में वहां प्राकृतिक गैस और बिजली का औसत बिल 4000 पाउंड से ऊपर जा सकता है। 12 महीने पहले ब्रिटेन के लोग गैस और बिजली के लिए जो कीमत चुका रहे थे, ये रकम उसके तीन गुना से भी ज्यादा होगी। लेकिन फ्रांस में ऐसी हालत नहीं है। वहां ऊर्जा की कीमत में मामूली बढ़ोतरी ही हुई है। जबकि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद इन दोनों देशों ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाए। उसकी वजह से दोनों देशों में रूसी गैस की सप्लाई घटी है।

विज्ञापन

फ्रांस में परिवारों के औसत ऊर्जा बिल में पांच फीसदी से भी कम बढ़ोतरी हुई है। जबकि ब्रिटेन में सबसे गरीब घरों के बिल में भी सर्दियों में 15 फीसदी से अधिक बढ़ोतरी होगी। ब्रिटेन और फ्रांस दोनों समान बिजली ग्रिड से जुड़े हुए हैं। इसके बावजूद ऊर्जा बिल में अंतर यूरोप में चर्चा का विषय बना रहा है। अब इस बारे में एक अध्ययन रिपोर्ट जारी हुई है।

विज्ञापन

इस रिपोर्ट के मुताबिक इस अंतर का कारण दोनों देशों में मार्केट रेगुलेशन की नीतियों में फर्क है। ब्रिटेन की नीति ऊर्जा कंपनियों को संरक्षण देने वाली है। इसके तहत अगर कंपनियों के ऊर्जा प्राप्त करने की दर बढ़ती है, तो उन्हें उन्हें छूट रहती है कि वे अपने मुनाफे का संरक्षण करते हुए दाम बढ़ाएं। असामान्य स्थितियों में सरकार गरीब परिवारों को नकदी सहायता देकर महंगाई झेलने में मदद देती है। जबकि फ्रांस में सरकार ने कीमत तय करने में अपनी भूमिका बनाए रखी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

विशेषज्ञों के मुताबिक जहां तक बिजली उत्पादन और वितरण का संबंध है, ब्रिटेन का बाजार निश्चित रूप से अधिक कुशल है। इसकी वजह इस पहलू को माना जाता है कि ब्रिटिश सरकार बाजार में सीधे दखल नहीं देती है। ब्रिटेन में बिजली विनियामक संस्था ऑफजेम ऊर्जा की अधिकतम कीमत तय कर देती है। इसके बाद कंपनियां परिवारों से बिजली और गैस के उनके उपभोग की मात्रा के अनुसार उनसे कीमत वसूल करती हैँ।

रिसर्च रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है कि फ्रांस में बाजार अर्थव्यवस्था को अपनाया गया है, लेकिन यहां ज्यादातर बिजली उत्पादक कंपनियां सार्वजनिक क्षेत्र में हैं। फ्रांस में ऊर्जा उत्पादक कंपनियां बिजली की बिक्री वितरण कंपनियों को करती हैँ। ये कंपनियां उपभोक्ताओं को सीधे बिक्री करती हैं। लेकिन अंतर यह है कि फ्रांस सरकार सरकार पब्लिक सेक्टर की ऊर्जा उत्पादक कंपनियों को रियायती दर पर ऊर्जा बेचने का निर्देश दे सकती है। फिलहाल, सरकारी निर्देश के तहत ये कंपनियां लागत मूल्य से एक चौथाई कम पर ऊर्जा की सप्लाई वितरण कंपनियों को कर रही हैं। इस वजह से फ्रांस के लोगों राहत मिली हुई है।

अभी संकट के दौर में फ्रांस सरकार ने ऊर्जा के उपभोग पर कुछ सीमाएं भी लगाई हैं। फ्रांस को रूसी ऊर्जा सप्लाई में आई कमी के अलावा परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में आई दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है। लेकिन उम्मीद है कि ये संयंत्र सर्दियों तक पूरी क्षमता से काम करने लगेंगे। इसीलिए फ्रांस के उपभोक्ता आश्वस्त हैं कि सर्दियों में उन्हें होम हीटिंग की पूरी सुविधा मिलेगी। जबकि ब्रिटेन में इसको लेकर आशंकाएं रोज गहराती जा रही हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed