G20 Summit Bali: जी-20 शिखर सम्मेलन में क्या होगा उसका ईस्ट एशिया समिट में मिल गया संकेत!
G20 Summit Bali: बाली में जो बाइडन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पहली बार आमने-सामने होंगे। बाइडन ने ईस्ट एशिया समिट में ‘आजाद और खुले’ एशिया-प्रशांत की चर्चा की। यह सीधे तौर पर चीन की आलोचना है...
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दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के संघ- आसियान के यहां हुए शिखर सम्मेलन पर यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-चीन तनाव का साया पड़ा रहा। कंबोडिया के राजधानी इस शहर में तीन दिन का ये शिखर सम्मेलन रविवार को पूरा हो गया। गुटों में बंटती दुनिया का असर यहां साफ महसूस हुआ। सम्मेलन के बाद कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन सेन ने कहा- ‘हालात चाहे जैसे हों, हमें इस क्षेत्र के हित में आसियान की एकता बनाए रखनी होगी।’
आसियान शिखर सम्मेलन पूरा होने से कुछ देर पहले हुए ईस्ट एशिया समिट (पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन) में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन, चीन के प्रधानमंत्री ली किचियांग और जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने भी भाग लिया। ईस्ट एशिया समिट में आसियान के सदस्य देशों के अलावा इस समूह के डायलॉग पार्टनर भी भाग लेते हैं। भारत, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और रूस भी आसियान के डायलॉग पार्टनर हैं।
ईस्ट एशिया समिट के बाद बयान तुरंत जारी नहीं हो सका। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि अमेरिका और रूस इसमें इस्तेमाल होने वाली भाषा पर सहमत नहीं हुए। वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम ने कहा है कि उसने साझा विज्ञप्ति का पहला ड्राफ्ट देखा था। उसमें शिखर सम्मेलन के दौरान नेताओं ने जो बातें कहीं, उसका जिक्र है। इस ड्राफ्ट से इस बात का अंदाजा मिला कि इंडोनेशिया के पर्यटन स्थल बाली में हो रहे जी-20 शिखर सम्मेलन में क्या नजारा रहेगा।
बाली में जो बाइडन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पहली बार आमने-सामने होंगे। बाइडेन ने ईस्ट एशिया समिट में ‘आजाद और खुले’ एशिया-प्रशांत की चर्चा की। यह सीधे तौर पर चीन की आलोचना है। व्हाइट हाउस ने रविवार को वाशिंगटन में एक बयान जारी किया। उसके मुताबिक बाइडन ने कहा कि पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर के ऊपर उड़ान भरने और समुद्र में नौवहन की पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हालांकि वे चीन के साथ संवाद बनाए रखना चाहते हैं, लेकिन चीन में मानव अधिकारों के कथित हनन का सवाल वे पुरजोर ढंग से उठाते रहेंगे।
चीन इस क्षेत्र में समुद्री विवाद को विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय ढंग से हल करने की वकालत करता रहा है। वह इस मामले में अमेरिकी हस्तक्षेप की निंदा कर चुका है। ईस्ट एशिया समिट में ली किचियांग ने कहा- ‘दक्षिण चीन सागर के मुद्दे को अपने हाथ में रखने को लेकर हममें पूरा आत्म-विश्वास, विवेक और क्षमता है।’ इस सम्मेलन में उत्तर कोरिया का मुद्दा भी उठा। बाइडन ने कहा कि उत्तर कोरिया के खतरे का मुकाबला करने के लिए अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया आज पहले के किसी मौके की तुलना में अधिक एकजुट है।
सम्मेलन के साझा विज्ञप्ति के पहले ड्राफ्ट में ‘संप्रभुता, राजनीतिक स्वतंत्रता और प्रादेशिक अखंडता का सम्मान करने’ और टकराव को तुरंत खत्म करने पर जोर दिया गया था। लेकिन रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में नाटो (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन) के विस्तार का मुद्दा उठा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और उसके साथी देश ‘यहां मौजूद अन्य देशों के हितों’ का ख्याल नहीं कर रहे हैं। ऐसे विरोधी रुख के कारण शिखर सम्मेलन किसी सहमति पर नहीं पहुंच सका। साथ ही ये आशंका पैदा हुई कि ऐसा ही बाली में हो सकता है।