Israel-Hamas War: आतंकियों के प्रशिक्षण से ईरानी अधिकारियों की मुलाकातों तक, क्या इस्राइल हमले के पीछे ईरान?
Israel-Hamas War: इस्राइली शोध एजेंसी आईटीआईसी ने कहा कि शीर्ष ईरानी अधिकारियों और हमास के आतंकियों ने 2023 में कम से कम चार बार मुलाकात की, जिससे 7 अक्तूबर को दक्षिणी इस्राइल में हमला हुआ।
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इस्राइल और हमास के बीच पिछले तीन हफ्ते से भी ज्यादा समय से लड़ाई छिड़ी हुई है। इस संघर्ष में हजारों की संख्या में लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इस लड़ाई की शुरुआत 7 अक्तूबर को इस्राइल पर हमास लड़ाकों के हमले से हुई। उधर, ईरान अब खुलकर इस्राइल के विरोध में उतर आया है। बुधवार को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने गाजा पट्टी पर बमबारी बंद करने की मांग करते हुए मुस्लिम देशों से इस्राइल को तेल और खाद्य निर्यात बंद करने का आह्वान किया।
इस बीच इस्राइली शोध एजेंसी मीर आमित इंटेलिजेंस एंड टेररिज्म इंफॉर्मेशन सेंटर (आईटीआईसी) ने हमले की तैयारियों को लेकर बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हमास आतंकी और ईरान के शीर्ष अधिकारी 2023 में चार बार मिले थे। इसके बाद 7 अक्तूबर को इस्राइल पर हमला हुआ।
इससे पहले भी रिपोर्ट आई थी हमले से पहले हमास के लड़ाकों ने ईरान में परीक्षण लिया था। अब नई रिपोर्ट ने ईरान को सवालों के घेरे में ला दिया है। ऐसे में हमें जानना चाहिए कि इस्राइल-हमास युद्ध को लेकर नया खुलासा क्या हुआ है? रिपोर्ट में ईरान को लेकर क्या-क्या कहा गया है?
आईटीआईसी ने एक रिपोर्ट जारी कर कहा कि शीर्ष ईरानी अधिकारियों और हमास के आतंकियों ने 2023 में कम से कम चार बार मुलाकात की। इसके बाद 7 अक्तूबर को दक्षिणी इस्राइल में हमला हुआ। इसके अलावा दोनों पक्षों ने इस साल कम से कम चार बार टेलीफोन पर भी बात की।
इस्राइली अधिकारियों ने कहा है कि भले ही ईरान ने 7 अक्तूबर को हुए हमले का स्पष्ट आदेश नहीं दिया था, लेकिन ईरान की फंडिंग, रसद सहायता, प्रशिक्षण और हथियार मुहैया कराए बिना हमास इतने सटीक और पूरी तरह से सिंक्रनाइज ऑपरेशन में सफल नहीं हो सकता था।
प्रॉक्सी युद्ध लड़ रहा है इस्राइल
मीर आमित की रिपोर्ट में कहा गया है कि 7 अक्तूबर से इस्राइल ईरान और उसके दो प्रॉक्सी, हमास और हिजबुल्ला के खिलाफ युद्ध लड़ रहा है। इन दोनों संगठनों के लिए ईरान का समर्थन है जो पूर्व में तरह से नहीं हुआ करता था।
आईटीआईसी ने लिखा कि ईरान प्रॉक्सी के अपने नेटवर्क को अपनी सैन्य ताकत का हिस्सा मानता है। यह सशस्त्र आतंकवादी संगठनों के नेटवर्क को नियंत्रित करता है, जिसमें हमास और फलस्तीन में इस्लामिक जिहाद (पीआईजे) और हिजबुल्ला शामिल हैं। वहीं इन संगठनों के जरिए ईरान अपने विरोधियों के खिलाफ मुख्य रूप से इस्राइल और अमेरिका के खिलाफ कार्रवाई कार्रवाई करता है।
इसके आगे रिपोर्ट में कहा गया कि हिजबुल्ला को ईरान की पसंदीदा रणनीतिक शाखा माना जाता है, जो उसे इस्राइल को रोकने और उसके क्षेत्रीय हितों को आगे बढ़ाने की क्षमता मुहैया करता है। 2006 में दूसरे लेबनान युद्ध के बाद से ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) की कुद्स फोर्स ने हिजबुल्ला के हथियारों की दोबारा मुहैया कराने में अहम भूमिका निभाई है।
रिपोर्ट के अनुसार, वैचारिक रूप से हिजबुल्ला को ईरान के लिए सबसे अधिक प्रतिबद्ध संगठन माना जाता है। इसका मुख्य कारण संगठन के नेता हसन नसरल्लाह की ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के प्रति धार्मिक प्रतिबद्धता है। आरोप लगाया गया है कि कुद्स फोर्स के जरिए ईरान संगठनों को हथियार और प्रति वर्ष करोड़ों डॉलर की फंडिंग करता है। इसके साथ हथियारों के विकास और निर्माण के लिए तकनीकी ज्ञान हस्तांतरित करता है और आतंकवादी गुर्गों को प्रशिक्षण देता है।
ईरान पर पहले भी हुआ है खुलासा?
इससे पहले द वॉल स्ट्रीट जर्नल में बुधवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में बड़ा खुलासा किया था। अखबार ने इस्राइल पर किए क्रूर नरसंहार के बारे में खुफिया जानकारी से परिचित लोगों का हवाला देते हुए बताया कि हमास और फलस्तीनी इस्लामिक जिहाद के 500 सदस्यों ने सितंबर महीने में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के नेतृत्व में प्रशिक्षण में भाग लिया था। रिपोर्ट के अनुसार, कुद्स फोर्स का प्रमुख ईरानी ब्रिगेडियर जनरल इस्माइल कानी भी आईआरजीसी के नेतृत्व में प्रशिक्षण में शामिल रहा है।
इस्राइल हमास की क्रूरता के पीछे लगातार ईरान का हाथ होने का आरोप लगा रहा है। इस्राइल का मानना है कि ईरान की वजह से हमास उच्च तकनीक वाली गाजा सीमा बाड़ को निष्क्रिय करने और अपने विनाशकारी हमले को अंजाम देने में सफल रहा है। इसकी वजह से ही आतंकवादी कम से कम 224 लोगों को बंधक बनाने में सफल हो पाए। हालांकि, ईरान इस बात से इनकार किया है कि हमले की योजना में उसकी कोई भूमिका थी।
आईडीएफ के प्रवक्ता रियर एडमिरल डैनियल हगारी ने हमले की योजना बनाने में मदद करने के लिए सीधे ईरान पर अंगुली उठाई। हगारी ने कहा कि ईरान ने युद्ध से पहले हमास को प्रशिक्षण, हथियारों, धन और तकनीकी जानकारियों की आपूर्ति के साथ सीधे सहायता प्रदान की थी। उन्होंने कहा, ‘अब भी हमास को ईरान से सहायता मिल रही है। ईरान लगातार आतंकवादियों को इस्राइल की खुफिया जानकारी दे रहा है।’