US-Iran डील: 300 अरब डॉलर निवेश से लेकर लेबनान में हमले रोकने तक, प्रस्तावित समझौते में क्या-क्या शामिल?
अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है। डील के तहत 60 दिन के संघर्षविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत, अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत और लेबनान संकट के समाधान जैसे कई मुद्दे शामिल हैं। आइए विस्तार से जानते हैं।
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विस्तार
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को खत्म करने के लिए तैयार हो रही संभावित डील अब अंतिम चरण में पहुंचती दिख रही है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि दोनों पक्ष समझौते के काफी करीब हैं, हालांकि कुछ मुद्दों पर अभी सहमति बनना बाकी है। अगर यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो इसमें केवल युद्धविराम ही नहीं, बल्कि परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत, होर्मुज जलडमरूमध्य, लेबनान संकट और बड़े निवेश पैकेज जैसे कई अहम मुद्दे शामिल होंगे।
डील में क्या-क्या है?
1. 60 दिन का सीजफायर और बातचीत
प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका और ईरान 60 दिनों तक संघर्षविराम बढ़ाएंगे। इसी अवधि में दोनों देश स्थायी शांति समझौते और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर विस्तृत बातचीत करेंगे।
2. होर्मुज जलडमरूमध्य खुलेगा
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य करने का प्रस्ताव है। रिपोर्टों के मुताबिक ईरान समुद्री बारूदी सुरंगें हटाएगा, जबकि अमेरिका नौसैनिक प्रतिबंधों में राहत देने पर विचार करेगा।
3. परमाणु कार्यक्रम पर सबसे बड़ी बातचीत
डील का सबसे संवेदनशील हिस्सा ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा है। अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न करने की प्रतिबद्धता दे। साथ ही समृद्ध यूरेनियम के भंडार और भविष्य में यूरेनियम संवर्धन के नियमों पर भी बातचीत होगी।
4. प्रतिबंधों में राहत और फ्रीज संपत्तियां
समझौते में अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत और विदेशों में फंसी ईरान की अरबों डॉलर की संपत्तियों को लेकर भी चर्चा शामिल है। ईरान लंबे समय से अपने जमे हुए फंड तक पहुंच की मांग करता रहा है।
5. लेबनान युद्ध पर भी फोकस
डील में लेबनान में जारी संघर्ष को कम करने और हिजबुल्ला व इस्राइल के बीच तनाव घटाने से जुड़ा प्रावधान भी शामिल बताया जा रहा है। हालांकि लेबनान को लेकर दोनों पक्षों की व्याख्या अलग-अलग बताई जा रही है।
6. ईरान के लिए 300 अरब डॉलर का निवेश पैकेज
डील का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा करीब 300 अरब डॉलर के अंतरराष्ट्रीय निवेश और पुनर्निर्माण कार्यक्रम का प्रस्ताव है। रिपोर्टों के अनुसार अंतिम समझौता होने पर अमेरिका ईरान में बड़े निवेश को सुगम बनाने में मदद कर सकता है। तेल, ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में अमेरिकी कंपनियों की एंट्री की संभावना भी जताई गई है।
अभी किन मुद्दों पर अटका है मामला?
हालांकि अमेरिका और ईरान समझौते के काफी करीब बताए जा रहे हैं, लेकिन कई अहम मुद्दों पर अब भी मतभेद बने हुए हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक बातचीत का अधिकांश हिस्सा पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में हुआ है। ऐसे में यह भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि दोनों देश समझौते के एक ही मसौदे पर काम कर रहे हैं या नहीं, और ईरान की ओर से अंतिम मंजूरी देने का अधिकार किसके पास है।
सबसे बड़ा विवाद संघर्षविराम की शर्तों को लेकर है। अमेरिकी पक्ष के अनुसार प्रस्तावित समझौता 60 दिनों के लिए लड़ाई रोकने और आगे की बातचीत का रास्ता खोलने पर केंद्रित है। वहीं ईरान का दावा है कि इसमें लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्ति की घोषणा शामिल है और यह व्यापक स्थायी समझौते की दिशा में एक अंतरिम व्यवस्था होगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी दोनों देशों की व्याख्या अलग-अलग है। अमेरिकी पक्ष चाहता है कि ईरान पहले समुद्री बारूदी सुरंगें हटाए और जहाजों की आवाजाही सामान्य करे, जिसके बाद चरणबद्ध तरीके से अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील दी जाए। दूसरी ओर ईरान का कहना है कि समझौते के तहत अमेरिकी नाकाबंदी 30 दिनों के भीतर हटा ली जाएगी और बातचीत के दौरान जलडमरूमध्य पूरी तरह खुला रहेगा।