फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव होने: लेफ्ट के बहुत बुरे दिन, दक्षिणपंथ की चांदी
फ्रांस के प्रमुख अखबार ला मोंद में छपी रिपोर्ट के मुताबिक जब उसके संवाददाता ने पार्टी के नए दफ्तर तक पहुंचने की कोशिश की, तो उबर टैक्सी का जीपीएस उस स्थान को नहीं ढूंढ पाया। आखिरकार संवाददाता जब किसी तरह दफ्तर पहुंचा, तो उसने पाया कि पार्टी ने एक कंपनी की पार्किंग की जगह में अपना दफ्तर बनाया है...
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फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव होने में अभी छह महीने बाकी हैं, लेकिन एक बात अभी से साफ दिख रही है कि अगले चुनाव में वामपंथ हाशिये पर रहेगा। तीन लेफ्ट उम्मीदवारों ने खुद को चुनाव मैदान में उतारा है, लेकिन उन्हें मतदाता गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
कार पार्किंग में बनाया दफ्तर
फ्रांस की सोशलिस्ट पार्टी एक समय देश की प्रमुख राजनीतिक धुरी थी। 2017 तक वह सत्ता में थी। लेकिन आज पार्टी का हाल यह हो गया है कि वह अपना दफ्तर तक नहीं चला पा रही है। वित्तीय दिक्कतों के कारण कुछ समय पहले उसने पेरिस के एक प्रमुख हिस्से से अपना दफ्तर हटा लिया। फ्रांस के प्रमुख अखबार ला मोंद में छपी रिपोर्ट के मुताबिक जब उसके संवाददाता ने पार्टी के नए दफ्तर तक पहुंचने की कोशिश की, तो उबर टैक्सी का जीपीएस उस स्थान को नहीं ढूंढ पाया। आखिरकार संवाददाता जब किसी तरह दफ्तर पहुंचा, तो उसने पाया कि पार्टी ने एक कंपनी की पार्किंग की जगह में अपना दफ्तर बनाया है।
सोशलिस्ट पार्टी ने अगले चुनाव में पेरिस की मेयर एनी हिदालगो को अपना उम्मीदवार बनाया है। लेकिन जनमत सर्वेक्षणों में उन्हें सिर्फ पांच फीसदी लोगों का समर्थन मिलता दिखाया गया है। दरअसल, सोशलिस्ट पार्टी 2017 में ही मतदाताओं के मन से उतर गई थी। तब पार्टी के उम्मीदवार बेनो हैमों को सिर्फ छह फीसदी वोट मिले थे। अब समर्थन उससे भी कम हो गया है।
लेफ्ट के एक और प्रमुख उम्मीदवार ला फ्रांस इमोउमिस पार्टी के बहुचर्चित नेता ज्यां-लुक मेलेन्शों हैं। 2017 में पहले चरण के मतदान के दौरान उन्होंने तकरीबन 20 फीसदी वोट हासिल कर सबको चौंका दिया था। लेकिन इस बार उनके लिए समर्थन 10 फीसदी के आसपास ही दिख रहा है। मैदान में तीसरी वामपंथी ताकत ग्रीन पार्टी है। लेकिन उसके उम्मीदवार यानिक जेडो के लिए समर्थन सात फीसदी के आसपास ही है।
हिदालगो अपनी पर्यावरण समर्थक नीतियों की वजह से चर्चा में आई थीं। इन नीतियों को पेरिस के मेयर के चुनाव में खूब समर्थन मिला, जिसकी वजह से वे जीत गईं। वे लगातार कार के खिलाफ अभियान चलाती रही हैं। देश के बाकी हिस्सों में यह अभियान लोकप्रिय नहीं हो सका है।
वॉरविक यूनिवर्सिटी में फ्रेंच राजनीति के प्रोफेसर जिम शील्ड्स ने टीवी चैनल फ्रांस-24 से कहा- ‘हिदालगो की तीन कमजोरियां हैं, जिनसे वे उबर नहीं पा रही हैं। उनकी इमेज पेरिसवासी की है, जो दूसरे प्रांतों के लोगों को आकर्षित नहीं कर पा रही है। पर्यावरण रक्षा पर उन्होंने जो नीति अपनाई है, उसे उग्र समझा गया है। साथ ही वे आकर्षक नीतिगत वादे करने में विफल हैं।’
मुख्य मुकाबला दक्षिणपंथी और धुर दक्षिणपंथ के बीच
इसलिए अब पर्यवेक्षकों में आम राय है कि अगले राष्ट्रपति चुनाव में मुख्य मुकाबला दक्षिणपंथी और धुर दक्षिणपंथ के बीच होगा। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सामाजिक मामलों में प्रगतिशील लेकिन आर्थिक मामलों में दक्षिणपंथी नीतियों के पैरोकार हैं। उन्हें टक्कर धुर दक्षिणपंथी मेरी ली पेन और उनसे भी अधिक दक्षिण-चरमपंथी एरिक जिमो से मिलने वाली है। जानकारों का कहना है कि मैक्रों के लिए यह अनुकूल स्थिति है। आम अनुमान है कि धुर दक्षिणपंथ से भयभीत वामपंथी रूझान वाले मतदाता एक बार फिर उन्हें ही अपना वोट देंगे।