फ्रांसः मुस्लिम विरोधी मुहिम के साथ लोकप्रियता के नए मुकाम पर ली पेन
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फ्रांस में धुर दक्षिणपंथी नेता मेरी ली पेन ने मुसलमानों के टोपी पहनने पर हर जगह रोक लगाने की मांग की है। ये मांग उठाने के बाद उनकी लोकप्रियता में तेजी से इजाफा हुआ है। जनमत सर्वेक्षणों में अब उन्हें राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बराबर समर्थन मिलता दिखाया गया है। फ्रांस में सिर्फ 15 महीनों के बाद राष्ट्रपति चुनाव होने वाला है। इसके मद्देनजर वहां दिख रहे ट्रेंड को अहम माना जा रहा है।
ली पेन ने बीते शुक्रवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि मेरी राय में टोपी एक इस्लामिक परिधान है। उन्होंने इस्लामिक विचारों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि ये विचारधारा “सर्वसत्तावादी और हत्यारी है।” ली पेन फ्रांस की मुख्य धुर दक्षिणपंथी पार्टी की कमान अपने पिता से ली थी।
तब से वे दो बार राष्ट्रपति चुनाव लड़ चुकी हैं। 2017 में चुनाव के दूसरे दौर में मैक्रों से उनका सीधा मुकाबला हुआ था। उनसे वे काफी अंतर से हार गई थीं, लेकिन दूसरे दौर तक पहुंचना उनकी बड़ी कामयाबी थी। अब उन्हें जो समर्थन दिख रहा है, उस कारण यहां ये कयास लगाए जाने लगे हैं कि क्या अब एक यूरोपियन यूनियन विरोधी और आव्रजक विरोधी नेता फ्रांस की राष्ट्रपति बनने वाली हैं।
ली पेन अमेरिका की पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी सोच की समर्थक रही हैं। ट्रंप की हार से उन्हें मायूसी हुई थी। लेकिन अब फ्रांस में खुद उन्हें राष्ट्रपति बनने के कगार पर बताया जा रहा है।
हैरिस इंटरेक्टिव नाम की एजेंसी के सर्वे में ली पेन को 48 फीसदी मतदाताओं का समर्थन मिलता बताया गया। मैक्रों को 52 फीसदी समर्थन मिलता दिखाया गया है। ली पेन ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा- ये सर्वे इस वक्त का आईना है। यह ये बताता है कि मेरे जीतने की संभावना विश्वसनीय है।
मैक्रों की लोकप्रियता गिरी
फ्रांस इस समय कोरोना वायरस संक्रमण की मार से परेशान है। इस महामारी के कारण मैक्रों की लोकप्रियता गिरी है। इसका फायदा ली पेन को मिलता लग रहा है। धुर दक्षिणपंथी राजनीति के विशेषज्ञ फ्रेंच राजनीति शास्त्री ज्यां यवेस ने टीवी चैनल अल जजीरा से कहा ली पेन को जो समर्थन मिलता दिख रहा है, वह उनके लिए उच्चतम स्तर पर है।
लेकिन इसके आधार पर चुनाव नतीजे के बारे में अभी से कोई अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। यवेस ने कहा कि ली पेन को महामारी और तीसरे लॉकडाउन से पैदा हुए असंतोष का फायदा मिल रहा है।
साथ ही उन्हें पिछले अक्तूबर में एक स्कूल शिक्षक की हुई हत्या का भी लाभ मिल रहा है। ली पेन की पार्टी की इस्लामिक विचारधारा विरोधी पहचान पहले से रही है। इसलिए उस हत्या के बाद बने माहौल का फायदा वह उठा रही है।
सैमुएल पैटी नाम के शिक्षक की हत्या पेरिस में की गई थी। पैटी ने अपने छात्रों को पैगंबर मोहम्मद के बारे में एक कार्टून दिखाया था। इससे नाराज एक 18 वर्षीय छात्र ने उन पर एक स्ट्रीट में हमला कर दिया था। इससे फ्रांस में मुस्लिम विरोधी भावनाएं फिर से फैल गई थीं। इस घटना के बाद मैक्रों सरकार ने कई इस्लामिक संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिए और इस्लामिक संगठनों के विदेशी चंदा लेने पर रोक लगा दी थी।
राजनीति शास्त्री एलन दुहामेल ने एक फ्रेंच न्यूज चैनल से कहा कि साढ़े तीन साल पहले ली पेन का चुनाव जीतना असंभव समझा जाता था। आज भी मैं यह नहीं कह रहा हूं कि ऐसा होने जा रहा है, लेकिन यह संभव जरूर हो गया दिखता है।