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France: फ्रांस में क्यों गिरी सरकार? पीएम के इस्तीफे के बाद, राष्ट्रपति मैक्रों की कुर्सी पर भी बढ़ा संकट
Thu, 05 Dec 2024 09:29 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 05 Dec 2024 09:29 AM IST
सार
माइकल बर्निये की सरकार के खिलाफ कट्टर वामपंथी दल ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था, जिसे मरीन ली पेन के नेतृत्व वाले धुर दक्षिणपंथी दल का भी समर्थन मिला।
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फ्रांस के राष्ट्रपति
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
फ्रांस में हुए चौंकाने वाले राजनीतिक घटनाक्रम में वहां सरकार गिर गई। प्रधानमंत्री माइकल बर्निये की सरकार बुधवार को संसद में पेश हुए अविश्वास प्रस्ताव में हार गई, जिससे देश में राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो गई है। फ्रांस के 60 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब संसद के निचले सदन ने मौजूदा सरकार के खिलाफ मत दिया है।
तीन महीने ही चली बर्निये सरकार
माइकल बर्निये की सरकार के खिलाफ कट्टर वामपंथी दल ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था, जिसे मरीन ली पेन के नेतृत्व वाले धुर दक्षिणपंथी दल का भी समर्थन मिला। फ्रांस में तीन महीने पहले ही आम चुनाव हुए थे, जिनमें किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था। मरीन ली पेन की पार्टी के समर्थन से गठबंधन सरकार का नेतृत्व माइकल बार्निये ने संभाला। हालांकि अब अगले साल के बजट को लेकर बात बिगड़ गई और बर्निये सरकार के खिलाफ सोमवार को अविश्वास प्रस्ताव पेश किया, जिसे मरीन ली पेन की पार्टी ने भी समर्थन दिया और बर्निये की गठबंधन सरकार गिर गई।
फ्रांस की संसद के 577 सांसदों में से 331 सांसदों ने सरकार के खिलाफ मत दिया। स्पीकर येल बरून पिवेट ने बताया कि प्रधानमंत्री बर्निये अपना इस्तीफा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को सौपेंगे। राष्ट्रपति मैक्रों सऊदी अरब के दौरे पर थे और अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग से कुछ समय पहले ही स्वदेश लौटे थे। अब बर्निये की सरकार गिरने के बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भी मुश्किलें बढ़ गई हैं और उनसे भी इस्तीफा देने की मांग की गई है। हालांकि राष्ट्रपति मैक्रों ने इससे इनकार कर दिया है।
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सरकार गिरने के बाद भी राष्ट्रपति कैसे बने रहेंगे मैक्रों
फ्रांस में अर्ध-राष्ट्रपति शासन प्रणाली है, जिसमें राष्ट्रपति और संसद दोनों के पास शक्तियां हैं। फ्रांस में राष्ट्रपति के पास सर्वोच्च कार्यकारी अधिकार और अहम नीति निर्धारण शक्तियां होती हैं। राष्ट्रपति ही राज्य के प्रमुख के तौर पर काम करते हैं और राष्ट्रपति को संसद द्वारा पद से नहीं हटाया जा सकता। राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की नियुक्ति की जाती है और प्रधानमंत्री ही राष्ट्रपति के नीतिगत एजेंडे को लागू करते हैं और कैबिनेट मंत्रियों की मदद से नौकरशाही का प्रबंधन करते हैं। राष्ट्रपति को संसद भंग करने और कानून बनाने के लिए संसद को दरकिनार करने का भी अधिकार है।
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तीन महीने ही चली बर्निये सरकार
माइकल बर्निये की सरकार के खिलाफ कट्टर वामपंथी दल ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था, जिसे मरीन ली पेन के नेतृत्व वाले धुर दक्षिणपंथी दल का भी समर्थन मिला। फ्रांस में तीन महीने पहले ही आम चुनाव हुए थे, जिनमें किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था। मरीन ली पेन की पार्टी के समर्थन से गठबंधन सरकार का नेतृत्व माइकल बार्निये ने संभाला। हालांकि अब अगले साल के बजट को लेकर बात बिगड़ गई और बर्निये सरकार के खिलाफ सोमवार को अविश्वास प्रस्ताव पेश किया, जिसे मरीन ली पेन की पार्टी ने भी समर्थन दिया और बर्निये की गठबंधन सरकार गिर गई।
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फ्रांस की संसद के 577 सांसदों में से 331 सांसदों ने सरकार के खिलाफ मत दिया। स्पीकर येल बरून पिवेट ने बताया कि प्रधानमंत्री बर्निये अपना इस्तीफा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को सौपेंगे। राष्ट्रपति मैक्रों सऊदी अरब के दौरे पर थे और अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग से कुछ समय पहले ही स्वदेश लौटे थे। अब बर्निये की सरकार गिरने के बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भी मुश्किलें बढ़ गई हैं और उनसे भी इस्तीफा देने की मांग की गई है। हालांकि राष्ट्रपति मैक्रों ने इससे इनकार कर दिया है।
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सरकार गिरने के बाद भी राष्ट्रपति कैसे बने रहेंगे मैक्रों
फ्रांस में अर्ध-राष्ट्रपति शासन प्रणाली है, जिसमें राष्ट्रपति और संसद दोनों के पास शक्तियां हैं। फ्रांस में राष्ट्रपति के पास सर्वोच्च कार्यकारी अधिकार और अहम नीति निर्धारण शक्तियां होती हैं। राष्ट्रपति ही राज्य के प्रमुख के तौर पर काम करते हैं और राष्ट्रपति को संसद द्वारा पद से नहीं हटाया जा सकता। राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की नियुक्ति की जाती है और प्रधानमंत्री ही राष्ट्रपति के नीतिगत एजेंडे को लागू करते हैं और कैबिनेट मंत्रियों की मदद से नौकरशाही का प्रबंधन करते हैं। राष्ट्रपति को संसद भंग करने और कानून बनाने के लिए संसद को दरकिनार करने का भी अधिकार है।