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Palestine: फ्रांस जून माह में फलस्तीन को दे सकता है मान्यता, फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों का बड़ा बयान
Thu, 10 Apr 2025 10:44 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 10 Apr 2025 10:44 AM IST
सार
फ्रांस लंबे समय से इस्राइल-फलस्तीन विवाद में टू-स्टेट सॉल्यूशन (द्वि-राज्य समाधान) का समर्थक रहा है। हालांकि फ्रांस द्वारा अगर फलस्तीन को मान्यता दे दी जाती है तो यह बड़ा नीतिगत बदलाव होगा और इससे इस्राइल के नाराज होने का भी खतरा है।
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इमैनुएल मैक्रों
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने एक मीडिया चैनल के साथ बातचीत में कहा कि फ्रांस फलस्तीन को मान्यता देने की योजना बना रहा है और इसे लेकर जून में न्यूयॉर्क में होने वाले संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में एलान कर सकता है। मैक्रों ने कहा कि 'हमें फलस्तीन को मान्यता देने की दिशा में आगे बढ़ना होगा और आने वाले कुछ महीनों में हम ऐसा करेंगे।' इमैनुएल मैक्रों ने हाल ही में मिस्त्र का भी दौरा किया था।
टू-स्टेट सॉल्यूशन का समर्थक रहा है फ्रांस
फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि 'हमारा लक्ष्य है कि हम सऊदी अरब के साथ संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन की अध्यक्षता करें, जहां हम कई पक्ष इसे मान्यता दें।' उन्होंने कहा कि 'मैं ये इसलिए करूंगा क्योंकि हमें लगता है कि ये करना सही होगा। फ्रांस द्वारा फलस्तीन को मान्यता देने से इस्राइल के अस्तित्व को भी नकारा नहीं जा सकेगा।' फ्रांस लंबे समय से इस्राइल-फलस्तीन विवाद में टू-स्टेट सॉल्यूशन (द्वि-राज्य समाधान) का समर्थक रहा है। हालांकि फ्रांस द्वारा अगर फलस्तीन को मान्यता दे दी जाती है तो यह बड़ा नीतिगत बदलाव होगा और इससे इस्राइल के नाराज होने का भी खतरा है।
ये भी पढ़ें- Microsoft Workers Fired: पार्टी में बवाल करने वाले फलस्तीन समर्थक कर्मचारियों पर गिरी गाज, नौकरी से निकाले गए
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फ्रांस के फलस्तीन को मान्यता देने से हो सकते हैं बड़े बदलाव
उल्लेखनीय है कि करीब 150 देश फलस्तीन को मान्यता दे चुके हैं, जिनमें आयरलैंड, नॉर्वे, स्पेन आदि भी शामिल हैं। इस्राइल द्वारा 7 अक्तूबर 2023 के हमले के बाद जिस तरह से गाजा में बम बरसाए जा रहे हैं और हजारों लोग मारे गए हैं, उसके बाद बीते साल जून में स्लोवेनिया ने भी फलस्तीन को मान्यता दे दी। हालांकि फ्रांस अगर फलस्तीन को मान्यता देता है तो इसका प्रभाव बहुत बड़ा होगा क्योंकि यूरोपीय संघ में फ्रांस एक अहम देश है। मिस्त्र दौरे पर मैक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस प्रस्ताव की भी आलोचना की, जिसमें ट्रंप ने गाजा को मध्य पूर्व का रिवेरा बनाने का वादा किया था। मैक्रों ने तंज कसते हुए कहा कि गाजा पट्टी कोई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट नहीं है।
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टू-स्टेट सॉल्यूशन का समर्थक रहा है फ्रांस
फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि 'हमारा लक्ष्य है कि हम सऊदी अरब के साथ संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन की अध्यक्षता करें, जहां हम कई पक्ष इसे मान्यता दें।' उन्होंने कहा कि 'मैं ये इसलिए करूंगा क्योंकि हमें लगता है कि ये करना सही होगा। फ्रांस द्वारा फलस्तीन को मान्यता देने से इस्राइल के अस्तित्व को भी नकारा नहीं जा सकेगा।' फ्रांस लंबे समय से इस्राइल-फलस्तीन विवाद में टू-स्टेट सॉल्यूशन (द्वि-राज्य समाधान) का समर्थक रहा है। हालांकि फ्रांस द्वारा अगर फलस्तीन को मान्यता दे दी जाती है तो यह बड़ा नीतिगत बदलाव होगा और इससे इस्राइल के नाराज होने का भी खतरा है।
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उल्लेखनीय है कि करीब 150 देश फलस्तीन को मान्यता दे चुके हैं, जिनमें आयरलैंड, नॉर्वे, स्पेन आदि भी शामिल हैं। इस्राइल द्वारा 7 अक्तूबर 2023 के हमले के बाद जिस तरह से गाजा में बम बरसाए जा रहे हैं और हजारों लोग मारे गए हैं, उसके बाद बीते साल जून में स्लोवेनिया ने भी फलस्तीन को मान्यता दे दी। हालांकि फ्रांस अगर फलस्तीन को मान्यता देता है तो इसका प्रभाव बहुत बड़ा होगा क्योंकि यूरोपीय संघ में फ्रांस एक अहम देश है। मिस्त्र दौरे पर मैक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस प्रस्ताव की भी आलोचना की, जिसमें ट्रंप ने गाजा को मध्य पूर्व का रिवेरा बनाने का वादा किया था। मैक्रों ने तंज कसते हुए कहा कि गाजा पट्टी कोई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट नहीं है।
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