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नेपाल: राष्ट्रीय अधिवेशन के मौके पर सबकी निगाह यूएमएल और ओली पर

Thu, 25 Nov 2021 05:14 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 25 Nov 2021 05:14 PM IST
सार

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पार्टी के सामने असल चुनौती उसकी बनी यह छवि है कि उसकी कोई विचारधारा नहीं है। इस सम्मेलन में भी कोई गंभीर बहस या मुद्दों पर विचार-विमर्श होने की संभावना नहीं है। ऐसे में मुमकिन है कि यह महज पदाधिकारियों के चुनाव का मौका बन कर रह जाए...

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former Prime Minister KP Sharma Oli party CPN-UML National Convention starts from Friday
केपी शर्मा ओली - फोटो : ANI (File Photo)

विस्तार

नेपाल की प्रमुख विपक्षी पार्टी- सीपीएन-यूएमएल के दसवें राष्ट्रीय अधिवेशन के मौके पर यहां राजनीतिक पर्यवेक्षकों का ध्यान यह देखने पर टिका है कि इस पार्टी पर पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की अब कितनी पकड़ कायम है। तीन दिन का राष्ट्रीय अधिवेशन शुक्रवार को चितवन में शुरू हो रहा है। जानकारों का कहना है कि इस सम्मेलन में सीपीएन-यूएमल की आगे की दिशा तय होगी, जिसका देश की राजनीति पर भी असर पड़ेगा।

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तीन साल पहले हुए पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान ही पार्टी ने सीपीएन-माओइस्ट सेंटर के साथ विलय के ओली के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। उस प्रस्ताव को पार्टी के दो-तिहाई प्रतिनिधियों का समर्थन मिला था। लेकिन पुष्प कमल दहल के नेतृत्व वाले माओइस्ट सेंटर के साथ हुई ये एकता टिकाऊ नहीं हुई। इस साल दोनों गुट अलग हो गए। नतीजतन, बीते जुलाई में प्रधानमंत्री की कुर्सी ओली के हाथ से निकल गई। इस साल अगस्त में यूएमएल पार्टी के प्रमुख नेता माधव नेपाल भी इससे अलग हो गए। उन्होंने सीपीएन (यूनाइटेड सोशलिस्ट) नाम से नई पार्टी बना ली है।

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उपाध्यक्ष भीम रावल ने दी ओली को चुनौती

पर्यवेक्षकों का कहना है कि माधव नेपाल के अलग होने के बाद यूएमएल में ओली के नेतृत्व को अब ज्यादा चुनौती नहीं रह गई है। इसीलिए अब वे अपने समर्थक नेताओं को पार्टी के महत्वपूर्ण पदों पर बैठाने की तैयारी में हैं। राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान वे वरिष्ठ उपाध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव, और सचिव पदों पर अपने समर्थकों की बैठाने की कोशिश करेंगे। लेकिन कई जानकारों का कहना है कि ऐसा करना अभी भी ओली के लिए बहुत आसान नहीं होगा।

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बल्कि पार्टी के मौजूदा उपाध्यक्ष भीम रावल ने अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है। उनके उम्मीदवारी का एलान करने के बाद ओली ने कहा- ‘वे मेरे लिए कोई चुनौती नहीं हैं।’ उन्होंने कहा- ‘यूएमएल एक लोकतांत्रिक पार्टी है। इसलिए मैं किसी पर चुनाव लड़ने या ना लड़ने के लिए दबाव नहीं डालूंगा। मैंने अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने का फैसला किया है। मेरे खिलाफ जो भी खड़ा होगा, उसका मैं स्वागत करूंगा।’

रावल उन प्रमुख नेताओं में हैं, जो इस साल पार्टी में हुए विभाजन के बाद भी यूएमएल में बने हुए हैँ। लेकिन जानकारों के मुताबिक उनकी इतनी ताकत नहीं हैं कि अध्यक्ष पद के चुनाव में वे ओली को हरा दें। बल्कि कयास यह लगाया गया है कि रावल वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद बनना चाहते हैं। इसकी सौदेबाजी के लिए ही उन्होंने अध्यक्ष पद पर दावा किया है।


सम्मेलन में 2,279 प्रतिनिधि भाग लेंगे। इसमें भाग लेने के लिए विदेशों से भी अतिथि आमंत्रित किए गए हैँ। ओली ने कहा है कि इस सम्मेलन से यह संदेश जाएगा कि विभाजन और सत्ता गंवाने के बावजूद पार्टी और मजबूत हुई है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पार्टी के सामने असल चुनौती उसकी बनी यह छवि है कि उसकी कोई विचारधारा नहीं है। इस सम्मेलन में भी कोई गंभीर बहस या मुद्दों पर विचार-विमर्श होने की संभावना नहीं है। ऐसे में मुमकिन है कि यह महज पदाधिकारियों के चुनाव का मौका बन कर रह जाए।

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