नेपाली सियासत में उबाल: प्रचंड का दावा- राजा बनने की ताक में है 2001 नरसंहार का मास्टरमाइंड, सच जानती है जनता
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और सीपीएन-माओवादी सेंटर के अध्यक्ष पुष्पकमल दहल 'प्रचंड' ने अपनी पार्टी के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राजशाही हत्याकांड को राजपरिवार के लोगों ने ही अंजाम दिया था। नरसंहार के पीछे का व्यक्ति अब बड़ी-बड़ी बातें कर रहा है और राजा बनने की कोशिश में है।
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नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और सीपीएन-माओवादी सेंटर के अध्यक्ष पुष्पकमल दहल 'प्रचंड' ने कहा कि नेपाली जनता जानती है कि 2001 में हुए शाही महल नरसंहार के पीछे कौन मास्टरमाइंड है, जिसमें तत्कालीन राजा बीरेंद्र शाह के पूरे परिवार की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि राजशाही हत्याकांड के पीछे का व्यक्ति अब बड़ी-बड़ी बातें कर रहा है। प्रचंड के इस बयान से नेपाली सियासत में उबाल आ गया है।
प्रचंड ने शुक्रवार को सिंधुपालचौक जिले में अपनी पार्टी के एक कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हत्याकांड को राजपरिवार के ही लोगों ने अंजाम दिया था। इस दौरान उन्होंने पूर्व राजा ज्ञानेंद्र पर गंभीर आरोप लगाया और कहा, 'किसने अपने ही भाई को मारा?'
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1 जून 2001 की रात हुआ था हत्याकांड
1 जून, 2001 की रात, रानी ऐश्वर्या और युवराज दीपेंद्र सहित बीरेंद्र के पूरे परिवार को रहस्यमय तरीके से मार दिया गया था। हालांकि, घटना के बाद गठित आधिकारिक जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि युवराज दीपेंद्र ने खुद को मारने से पहले अपने परिवार के सभी लोगों की हत्या की थी, लेकिन कई लोगों ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया।
पूर्व राजा पर सोने की तस्करी का भी आरोप लगाया
प्रचंड ने पूर्व राजा ज्ञानेंद्र पर सोने की तस्करी और मूर्तियों की चोरी में शामिल होने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा, 'जो पहले बड़ी मूर्तियां चुराता था, वह अब राजा बनने की कोशिश कर रहा है।'
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पहले कार्यकाल में महल हत्याकांड की जांच कराने की थी घोषणा
प्रचंड ने याद दिलाया कि जब वह पहले प्रधानमंत्री बने थे, तो उन्होंने महल हत्याकांड की फिर से जांच कराने की घोषणा की थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने कहा, 'अगर मैं पांच साल का कार्यकाल पूरा करता, तो देशद्रोही को दंडित करना संभव होता।'
प्रचंड ने पूर्व सम्राट को दी चेतावनी
प्रचंड ने पूर्व सम्राट को चेतावनी दी कि संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य को लोगों के बलिदानों से स्थापित किया गया है और इसे केवल 10,000 से 15,000 लोगों को सड़क पर लाकर नहीं छीना जा सकता। उन्होंने राजशाही समर्थकों के खिलाफ 28 मार्च को काठमांडू में आयोजित होने वाली भव्य रैली में भाग लेने के लिए लोगों से अपील भी की।
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