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श्रीलंका में ईस्टर हमलों के बाद पहली बार राष्ट्रीय चुनाव, विदेशी पर्यवेक्षकों की निगरानी
Sat, 16 Nov 2019 09:50 PM IST
संजीव कुमार झा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Sat, 16 Nov 2019 09:50 PM IST
सार
- बढ़ते इस्लामिक चरमपंथ से सुरक्षा है इस बार देश का मुख्य चुनावी मुद्दा
- 2.2 करोड़ की आबादी वाले देश में 1.6 करोड़ लोग चुनेंगे नया राष्ट्रपति
- 50 प्रतिशत से एक वोट भी ज्यादा पाने वाला होगा देश का 7वां राष्ट्रपति
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mahinda rajpaksa
- फोटो : PTI
विस्तार
स्टर धमाकों के करीब सात महीने बाद श्रीलंका में शनिवार को नए राष्ट्रपति के चुनाव के लिए मतदान हुआ। इस दौरान हिंसा और गोलीबारी की घटनाएं भी हुईं। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद उत्तर पश्चिम श्रीलंका में अल्पसंख्यक मुस्लिम मतदाताओं को ले जा रही सौ से ज्यादा बसों के काफिले पर कुछ बंदूकधारियों ने गोलीबारी की। पुलिस ने बताया कि फायरिंग में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। राजधानी कोलंबो से करीब 240 किलोमीटर दूर तांत्रिमाले में हमलावरों ने सड़क पर टायर जलाए और बसों के काफिले पर हमले के लिए सड़क अवरुद्ध किया।
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यह चुनाव ईस्टर पर आत्मघाती हमलों के बाद सुरक्षा चुनौतियों और बढ़ते राजनीतिक ध्रुवीकरण से जूझ रहे श्रीलंका का भविष्य तय करेगा। इस चुनाव में सत्तारूढ़ यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) के उम्मीदवार और आवासीय मंत्री सजीत प्रेमदासा (52) और पूर्व रक्षा सचिव व विपक्ष के नेता गौतबाया राजपक्षे (70) के बीच कड़ा मुकाबला है। इन दोनों के अलावा नेशनल पीपुल्स पावर (एनपीपी) गठबंधन से अनुरा कुमारा दिसानायके भी एक मजबूत प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। 2015 में राष्ट्रपति चुने गए मैत्रिपाल सिरिसेना इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे हैं।
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35 प्रत्याशी आजमा रहे किस्मत
स्थानीय समयानुसार सुबह 7 बजे मतदान शुरू हुआ, जो शाम 5 बजे तक चला। 1.59 करोड़ मतदाताओं के लिए देशभर में 12,845 मतदान केंद्र बनाए गए थे। इस बार रिकॉर्ड 35 उम्मीदवार चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार आधी रात के बाद चुनाव के पहले परिणाम आने की उम्मीद है।
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60 हजार सुरक्षाकर्मी थे तैनात
चुनावों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस प्रवक्ता रुआन गुनासेकरा ने बताया कि 60 हजार सुरक्षा बलों को तैनात किया गया था। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए चुनाव की घोषणा के बाद से अब तक 84 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
विदेशी पर्यवेक्षकों की निगरानी
श्रीलंका में राष्ट्रपति चुनाव स्थानीय और विदेशी चुनाव पर्यवेक्षकों की निगरानी में कराया गया। निष्पक्ष चुनाव के लिए यूरोपीय संघ और कॉमनवेल्थ के पर्यवेक्षक कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में तैनात थे।