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COP28: 'आगामी जलवायु शिखर सम्मेलन में बयानबाजी नहीं, ठोस कार्रवाई पर जोर दिया जाए', निर्मला सीतारमण की दो टूक
Tue, 28 Nov 2023 01:14 AM IST
जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दुबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दुबई
Published by: जलज मिश्रा
Updated Tue, 28 Nov 2023 01:14 AM IST
सार
सीतारमण ने आगे कहा कि विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए स्वयं की फंडिंग बड़ी चुनौती है। मुझे लगता है कि इस पर काफी बात हो सकती है। लेकिन असल चीज है तकनीक का हस्तांतरण और फंडिंग। इन दोनों मुद्दों पर अब बातें नहीं कार्रवाई होनी चाहिए।
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बैठक में शामिल हुईं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण।
- फोटो : Twitter
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विस्तार
जलवायु शिखर सम्मेलन में भारत अपनी शक्ति दिखाएगा। हम वैश्विक मंच में दिखाएंगे कि हमने अपने स्वंय के धन से क्या-क्या हासिल किया है। यह कहना है भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का। वित्त मंत्री ने शिखर सम्मेलन में जलवायु फंडिंग और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर ठोस कार्रवाई का आह्वान किया। बता दें, वार्षिक संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता तीन नवंबर से 12 दिसबंर तक संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित किया जाएगा। यह सम्मेलन का 28वां आयोजन है।
संघ की आलोचना की
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सोमवार को इंडिया ग्लोबल फोरम मिडिल ईस्ट एंड अफ्रीका-2023 के उद्घाटन समारोह में वर्चुअली शामिल हुईं। यहां उन्होंने कहा कि सीओपी-28 को दिशा दिखानी चाहिए। सम्मेलन में जलवायु फंडिंग और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है। हम दुनिया को दिखाएंगे कि हमने खुद के धन से ही क्या-क्या हासिल कर लिया है। उन्होंने संघ की आलोचना करते हुए कहा कि पेरिस प्रतिबद्धता को लेकर हम गंभीर हैं। हमने सौ अरब रुपये का इंतजार नहीं किया। हमने अपनी योजनाओं को खुद फंड किया। बातें तो खूब हुईं लेकिन वह सौ अरब रुपये अब तक नहीं मिल पाए। हमें अभी तक नहीं बताया गया कि प्रौद्योगिकी को स्थानांतरित कैसे किया जाए। कैसे तकनीक का इस्तेमाल किया जाए। बातों की जगह सीओपी-28 को दिशा दिखाने की आवश्यकता है।
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स्वंय की फंडिंग विकासशील देशों के लिए चुनौती
सीतारमण ने आगे कहा कि विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए स्वयं की फंडिंग बड़ी चुनौती है। मुझे लगता है कि इस पर काफी बात हो सकती है। लेकिन असल चीज है तकनीक का हस्तांतरण और फंडिंग। इन दोनों मुद्दों पर अब बातें नहीं कार्रवाई होनी चाहिए।
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर नहीं होगा प्रभावित
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्वंय की फंडिंग विकासशील देशों के लिए चुनौतियां लेकर आती हैं। बावजूद इसके, मैं सुनिश्चित करती हूं यह चुनौतियां भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर को प्रभावित नहीं करेगा। यह एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण है। यह दीर्घकालिक परियोजना है। परियोजन सिर्फ किसी एक तनाव पर निर्भर नहीं हो सकता। बता दें, नई दिल्ली जी20 शिखर सम्मेलन के पहले दिन भारत ने चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के खिलाफ भारत-मध्यपूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे की स्थापना के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किया था। नए आर्थिक गलियारे में भारत, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरत, सऊदी अरब, इटली और यूरोपीय संघ शामिल हैं। इससे एशिया, पश्चिम एशिया, मध्यपूर्व और यूरोप के बीच रिश्ते और मजबूत होंगे।
सम्मेलन में पीएम मोदी भी होंगे शामिल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन में भाग लेने 30 नवंबर व एक दिसंबर को दुबई की दो दिवसीय यात्रा पर रहेंगे। उन्हें संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति और अबू धाबी के शासक शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने निमंत्रण दिया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, शिखर सम्मेलन जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन के 28वें सम्मेलन (कॉप-28) का उच्च-स्तरीय प्रारूप है। कॉप-28 संयुक्त अरब अमीरात की अध्यक्षता में 28 नवंबर से 12 दिसंबर तक दुबई में हो रहा है।
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संघ की आलोचना की
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सोमवार को इंडिया ग्लोबल फोरम मिडिल ईस्ट एंड अफ्रीका-2023 के उद्घाटन समारोह में वर्चुअली शामिल हुईं। यहां उन्होंने कहा कि सीओपी-28 को दिशा दिखानी चाहिए। सम्मेलन में जलवायु फंडिंग और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है। हम दुनिया को दिखाएंगे कि हमने खुद के धन से ही क्या-क्या हासिल कर लिया है। उन्होंने संघ की आलोचना करते हुए कहा कि पेरिस प्रतिबद्धता को लेकर हम गंभीर हैं। हमने सौ अरब रुपये का इंतजार नहीं किया। हमने अपनी योजनाओं को खुद फंड किया। बातें तो खूब हुईं लेकिन वह सौ अरब रुपये अब तक नहीं मिल पाए। हमें अभी तक नहीं बताया गया कि प्रौद्योगिकी को स्थानांतरित कैसे किया जाए। कैसे तकनीक का इस्तेमाल किया जाए। बातों की जगह सीओपी-28 को दिशा दिखाने की आवश्यकता है।
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स्वंय की फंडिंग विकासशील देशों के लिए चुनौती
सीतारमण ने आगे कहा कि विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए स्वयं की फंडिंग बड़ी चुनौती है। मुझे लगता है कि इस पर काफी बात हो सकती है। लेकिन असल चीज है तकनीक का हस्तांतरण और फंडिंग। इन दोनों मुद्दों पर अब बातें नहीं कार्रवाई होनी चाहिए।
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर नहीं होगा प्रभावित
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्वंय की फंडिंग विकासशील देशों के लिए चुनौतियां लेकर आती हैं। बावजूद इसके, मैं सुनिश्चित करती हूं यह चुनौतियां भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर को प्रभावित नहीं करेगा। यह एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण है। यह दीर्घकालिक परियोजना है। परियोजन सिर्फ किसी एक तनाव पर निर्भर नहीं हो सकता। बता दें, नई दिल्ली जी20 शिखर सम्मेलन के पहले दिन भारत ने चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के खिलाफ भारत-मध्यपूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे की स्थापना के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किया था। नए आर्थिक गलियारे में भारत, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरत, सऊदी अरब, इटली और यूरोपीय संघ शामिल हैं। इससे एशिया, पश्चिम एशिया, मध्यपूर्व और यूरोप के बीच रिश्ते और मजबूत होंगे।
सम्मेलन में पीएम मोदी भी होंगे शामिल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन में भाग लेने 30 नवंबर व एक दिसंबर को दुबई की दो दिवसीय यात्रा पर रहेंगे। उन्हें संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति और अबू धाबी के शासक शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने निमंत्रण दिया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, शिखर सम्मेलन जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन के 28वें सम्मेलन (कॉप-28) का उच्च-स्तरीय प्रारूप है। कॉप-28 संयुक्त अरब अमीरात की अध्यक्षता में 28 नवंबर से 12 दिसंबर तक दुबई में हो रहा है।