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Female Genital Mutilation: 'अफ्रीकी देश गांबिया में महिलाओं का खतना अब प्रतिबंधित नहीं'; संसद में हुआ मतदान
Tue, 19 Mar 2024 06:36 PM IST
ज्योति भास्कर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Tue, 19 Mar 2024 06:36 PM IST
सार
पश्चिमी अफ्रीकी देश गांबिया की संसद में महिलाओं के प्राइवेट पार्ट से जुड़ा बड़ा फैसला हुआ है। महिलाओं के जननांगों को विकृत करने की प्रक्रिया- खतना पर प्रतिबंध को हटा लिया गया है।
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गांबिया की संसद में महिलाओं के गुप्तांगों से जुड़ा अहम फैसला (तस्वीर में स्थानीय महिलाएं)
- फोटो : ani
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विस्तार
पश्चिमी अफ्रीकी देश गांबिया की संसद ने महिलाओं के जननांगों से जुड़ी रुढ़िवादी परंपरा पर प्रतिबंध हटाने का फैसला लिया है। गौरतलब है कि महिलाओं के प्राइवेट पार्ट से जुड़ी प्रक्रिया- खतना को मेडिकल साइंस की भाषा में महिला जननांग विकृति (Female Genital Mutilation) कहा जाता है। इस प्रक्रिया में महिलाओं के जननांग को आंशिक या पूर्ण रूप से हटाया जाता है। महिला अधिकार कार्यकर्ता इसे 'चोट पहुंचाना' बताते हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक गैर चिकित्सीय कारणों से जननांगों को विकृत किया जाता है।
2015 में लगाया गया बैन हटा; संसद में विरोध में केवल 4 वोट
सोमवार को गांबिया की संसद में महिलाओं के खतना पर मतदान कराए गए। इस फैसले के बाद गाम्बिया को लाखों महिलाओं और लड़कियों को खतना प्रथा के खिलाफ मिली कानूनी सुरक्षा खत्म हो जाएगी। गांबिया ऐसा फैसला लेने वाला पहला देश बन सकता है। पश्चिमी अफ्रीका के नेताओं ने विवादित विधेयक के पक्ष में 42 वोट डाले। विरोध में चार वोट पड़े। संसद के फैसले के बाद साल 2015 में महिलाओं के खतना पर लगाया गया कानूनी प्रतिबंध हट जाएगा। साल 2015 में लगाए गए बैन के साथ-साथ तीन साल की जेल का प्रावधान भी किया गया था।
विधेयक के समर्थन और विरोध में दिए गए तर्कों पर एक नजर
संसद में विधेयक पेश करने वाले नेता अल्मामेह गिब्बा ने तर्क दिया कि प्रतिबंध के कारण मुस्लिम बहुल देश में नागरिकों के अधिकारों का हनन होता है। उन्होंने कहा कि 'अपनी संस्कृति और धर्म का पालन करने' के अधिकारों का उल्लंघन करने वाले प्रतिबंध को हटाने के लिए बिल पर वोटिंग कराई गई। धार्मिक निष्ठा को बनाए रखने और सांस्कृतिक मानदंडों और मूल्यों की रक्षा करने के मकसद से इस विधेयक को कानून की शक्ल दी जा रही है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और महिला अधिकार से जुड़े संगठनों के मुताबिक यह प्रस्तावित कानून वर्षों में हुई प्रगति पर पानी फेरने जैसा है। देश में मानवाधिकार के मोर्चे पर इससे बड़ा नुकसान होने का जोखिम है।
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महिलाओं का खतना और मिस्र जैसे देश के हालात
जून, 2021 में आई बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक इस्लामिक परंपराओं को मामने वाले रुढ़िवादी खतना को अनिवार्य बताते हैं। मिस्र में साल 2008 में महिलाओं का खतना प्रतिबंधित हुआ, लेकिन 13 साल बीतने के बाद भी वैश्विक स्तर पर खतना के सबसे अधिक मामले इसी देश में हैं। इस खबर के मुताबिक रुढ़िवादी मुसलमान महिलाओं को खतना के बिना 'अशुद्ध' मानते हैं। महिलाओं को खतना यानी जननांगों को विकृत किए बगैर 'शादी के लिए तैयार नहीं' माना जाता।
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2015 में लगाया गया बैन हटा; संसद में विरोध में केवल 4 वोट
सोमवार को गांबिया की संसद में महिलाओं के खतना पर मतदान कराए गए। इस फैसले के बाद गाम्बिया को लाखों महिलाओं और लड़कियों को खतना प्रथा के खिलाफ मिली कानूनी सुरक्षा खत्म हो जाएगी। गांबिया ऐसा फैसला लेने वाला पहला देश बन सकता है। पश्चिमी अफ्रीका के नेताओं ने विवादित विधेयक के पक्ष में 42 वोट डाले। विरोध में चार वोट पड़े। संसद के फैसले के बाद साल 2015 में महिलाओं के खतना पर लगाया गया कानूनी प्रतिबंध हट जाएगा। साल 2015 में लगाए गए बैन के साथ-साथ तीन साल की जेल का प्रावधान भी किया गया था।
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विधेयक के समर्थन और विरोध में दिए गए तर्कों पर एक नजर
संसद में विधेयक पेश करने वाले नेता अल्मामेह गिब्बा ने तर्क दिया कि प्रतिबंध के कारण मुस्लिम बहुल देश में नागरिकों के अधिकारों का हनन होता है। उन्होंने कहा कि 'अपनी संस्कृति और धर्म का पालन करने' के अधिकारों का उल्लंघन करने वाले प्रतिबंध को हटाने के लिए बिल पर वोटिंग कराई गई। धार्मिक निष्ठा को बनाए रखने और सांस्कृतिक मानदंडों और मूल्यों की रक्षा करने के मकसद से इस विधेयक को कानून की शक्ल दी जा रही है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और महिला अधिकार से जुड़े संगठनों के मुताबिक यह प्रस्तावित कानून वर्षों में हुई प्रगति पर पानी फेरने जैसा है। देश में मानवाधिकार के मोर्चे पर इससे बड़ा नुकसान होने का जोखिम है।
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महिलाओं का खतना और मिस्र जैसे देश के हालात
जून, 2021 में आई बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक इस्लामिक परंपराओं को मामने वाले रुढ़िवादी खतना को अनिवार्य बताते हैं। मिस्र में साल 2008 में महिलाओं का खतना प्रतिबंधित हुआ, लेकिन 13 साल बीतने के बाद भी वैश्विक स्तर पर खतना के सबसे अधिक मामले इसी देश में हैं। इस खबर के मुताबिक रुढ़िवादी मुसलमान महिलाओं को खतना के बिना 'अशुद्ध' मानते हैं। महिलाओं को खतना यानी जननांगों को विकृत किए बगैर 'शादी के लिए तैयार नहीं' माना जाता।