फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Federal trial starts over Trump administration's crackdown on pro-Palestinian campus activists

US: फलस्तीन समर्थक प्रदर्शन पर ट्रप प्रशासन की कार्रवाई को कोर्ट में चुनौती, अभिव्यक्ति की आजादी छीनने का आरोप

Tue, 08 Jul 2025 03:52 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 08 Jul 2025 03:52 AM IST
सार

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से फलस्तीन समर्थक छात्रों और शिक्षकों पर कार्रवाई का मामला अब कोर्ट में पहुंच गई है। कई विश्वविद्यालय संगठनों ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया है। मामले में याचिकाकर्ता चाहते हैं कि कोर्ट इसे असांविधानिक घोषित करे। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने साफ तौर पर इन आरोपों से इनकार किया है।

विज्ञापन
Federal trial starts over Trump administration's crackdown on pro-Palestinian campus activists
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की उस कार्रवाई को अब कोर्ट में चुनौती दी जा रही है, जो वह फलस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन करने वाले छात्रों और शिक्षकों पर कर रही है। ट्रंप प्रशासन इन छात्रों को गिरफ्तार कर देश से निकालने (डिपोर्ट) की कोशिश कर रही है। कई विश्वविद्यालयों के संगठन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर चुके हैं। उनका कहना है कि यह कदम अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ है और इससे कॉलेज परिसरों में डर का माहौल बन गया है। यह मुकदमा अमेरिका की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज विलियम यंग की अदालत में चल रहा है। याचिकाकर्ता चाहते हैं कि अदालत इस नीति को संविधान के पहले संशोधन और प्रशासनिक प्रक्रिया कानून का उल्लंघन मानकर रद्द करे।

विज्ञापन


मामले में क्या कहना वकीलों का?
वहीं इस मामले में नाइट फर्स्ट अमेंडमेंट इंस्टिट्यूट की वकील राम्या कृष्णन ने अदालत में कहा कि मैकार्थी युग के बाद यह पहली बार है जब अप्रवासियों को उनकी वैध राजनीतिक राय के लिए इतना दमन झेलना पड़ रहा है। यह नीति डर का माहौल बनाती है और संविधान के खिलाफ है। वहीं, सरकार की वकील विक्टोरिया सैंटोरा ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि कोई ऐसी सरकारी नीति नहीं है जो किसी की अभिव्यक्ति के आधार पर वीजा रद्द करती हो। सरकार सिर्फ इमिग्रेशन कानूनों को लागू कर रही है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें:- BRICS: ट्रंप के अमेरिका विरोधी आरोपों पर ब्रिक्स नेताओं का पलटवार, लूला बोले - दुनिया को सम्राट की जरूरत नहीं
विज्ञापन
विज्ञापन


किन-किन को बनाया जा रहा है निशाना

वहीं बात अगर इस नीति के तहत निशाना बनाए जाने वाले छात्रों और शिक्षकों की करें तो इसमें 104 दिन इमिग्रेशन डिटेंशन में रहे कोलंबिया यूनिवर्सिटी के छात्र महमूद खलील और  एक लेख लिखने के बाद छह हफ्तों तक हिरासत में रहे टफ्ट्स यूनिवर्सिटी की छात्रा रुमेया ओजतुर्क का नाम शामिल है। इन दोनों को ट्रंप प्रशासन की तरफ से हमास समर्थक बताया गया। 

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन विश्वविद्यालयों को कुछ छात्रों के नाम देकर उन्हें निशाना बनाने को कहा। साथ ही सोशल मीडिया निगरानी अभियान भी चलाया। हालांकि याचिकाकर्ताओं ने इस बार पर भी जोर दिया कि मामले में ट्रंप ने खुद कहा था कि खलील की गिरफ्तारी आगामी गिरफ्तारियों की शुरुआत है।


ये भी पढ़ें:- US: लाओस-म्यांमार पर 40, मलयेशिया-कजाखस्तान पर 25 और अफ्रीका पर 30% टैरिफ; ट्रंप ने इन देशों को भी लिखे पत्र

दोनों छात्रों की गिरफ्तारी के बाद क्या हुआ?
खलील और ओजतुर्क की गिरफ्तारी के बाद मामले में बढ़ते गर्माहट को देखते हुए कनाडा मूल की नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर मेगन हाइस्का ने कहा कि खलील और ओजतुर्क की गिरफ्तारी के बाद उन्होंने प्रदर्शनों से दूरी बना ली, लेख लिखने से परहेज किया और कनाडा लौटने की योजना रद्द कर दी। उन्होंने कहा कि इस घटना से अब यह स्पष्ट हो गया कि सार्वजनिक राजनीतिक विरोध से मेरी इमिग्रेशन स्थिति खतरे में पड़ सकती है।

वहीं जर्मनी की मूल निवासी, ब्राउन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर नादजे अल-अली ने कहा कि उन्होंने इराक और लेबनान की यात्रा रद्द कर दी और हमास पर लेख लिखने से भी पीछे हट गईं। उन्होंने कहा कि मुझे डर था कि इससे मेरी पहचान उजागर हो जाएगी और मुझे फलस्तीन समर्थक समझा जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed