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Pakistan: पाकिस्तान पर मंडरा रहा संकट, मुश्किल में मुद्रा, तो सामाजिक तनाव से बढ़ी परेशानी

Thu, 06 Oct 2022 05:23 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 06 Oct 2022 05:23 PM IST
सार

Pakistan: हाल में पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में तेजी से गिरावट आई है। इसे देखते हुए पाकिस्तान के नए वित्त मंत्री इशहाक डार ने आईएमएफ से अपील की है कि वह अपनी कड़ी शर्तों में छूट दे। इन शर्तों के तहत पाकिस्तान से बिजली और ईंधन पर शुल्क बढ़ाने को कहा गया है...

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fear of deepening monetary crisis in Pakistan has increased significantly
Pakistan: शाहबाज शरीफ - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

पाकिस्तान में मौद्रिक संकट गहराने की आशंका खासी बढ़ गई है। महीनों से देश गहरे आर्थिक संकट में है। इस बीच राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ने और आर्थिक मुसीबतों के कारण लोगों का असंतोष सड़कों पर आने के कारण देश में बड़ी सामाजिक उथल-पुथल का अंदेशा भी गहरा गया है। देश में करेंसी संकट खड़ा होने की ताजा चेतावनी ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स ने दी है। इस एजेंसी के जोखिम निर्धारण मॉडल के मुताबिक देश में हाल में आई भीषण बाढ़ के बाद बने हालात में करेंसी संकट का सूचकांक 50 फीसदी को पार कर गया है।

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उधर दो हफ्तों से इस्लामाबाद में विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों के साथ सरकार का समझौता हो जाने की खबर है। सरकार ने किसान संगठनों की कुछ मांगे मान ली हैं। लेकिन अगर सरकार ने इन मांगों को पूरा किया, तो उससे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की खर्च घटाने की शर्त का उल्लंघन होने की संभावना है। उससे कर्ज पाने की कोशिश में दिक्कत आ सकती है।

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ब्लूमबर्ग के विश्लेषण में कहा गया है कि पाकिस्तान में करेंसी क्राइसिस के अगले साल में जून 59 फीसदी तक पहुंच जाने की संभावना है। जबकि अगस्त 2022 में यह 29 फीसदी था। ब्लूमबर्ग के मुताबिक करेंसी क्राइसिस में मुद्रा (पाकिस्तानी रुपये) की विनिमय दर और विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट दोनों बातें शामिल हैं। ब्लूमबर्ग के अर्थशास्त्रियों ने कहा है- ‘प्राकृतिक आपदा के कारण फसलों की बर्बादी और पैदा हुई अन्य समस्याओं से स्थिरता लाने की दिशा में हुई तमाम प्रगति लौट कर शून्य हो गई है। अंतरराष्ट्रीय भुगतान में संतुलन प्राप्त करने की दिशा में हुई प्रगति समाप्त हो गई है।’

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हाल में पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में तेजी से गिरावट आई है। इसे देखते हुए पाकिस्तान के नए वित्त मंत्री इशहाक डार ने आईएमएफ से अपील की है कि वह अपनी कड़ी शर्तों में छूट दे। इन शर्तों के तहत पाकिस्तान से बिजली और ईंधन पर शुल्क बढ़ाने को कहा गया है। डार ने कहा है कि कम से कम छह महीनों तक के लिए इन शर्तों पर अमल से छूट पाकिस्तान को दी जानी चाहिए। डार ने ये अपील आईएमएफ के अधिकारी नैथन पोर्टर से वीडियो लिंक के जरिए हुई बातचीत के दौरान की। बाद में वित्त मंत्रालय ने एक बयान जारी पोर्टर और डार के बीच हुई बातचीत की जानकारी दी।

किसान इत्तेहाद नाम के संगठन के साथ शहबाज शरीफ सरकार की जो सहमति बनी है, उसमें ट्यूबवेल के लिए बिजली शुल्क की पुरानी दर वापस करने की बात शामिल है। इसके अलावा अन्य कृषि सामग्रियों पर लगाए गए टैक्स को हटाने भी सरकार राजी हुई है। किसान इत्तेहाद के प्रमुख खालिद बट्ट ने गृह मंत्री राना सनाउल्लाह के साथ बातचीत में हुई इस सहमति के बाद फिलहाल किसान आंदोलन वापस लेने का एलान किया। किसानों की कुछ अन्य मांगों पर विचार के लिए सरकार ने मंत्रियों की एक समिति बनाने की घोषणा भी की है।

पर्यवेक्षकों के मुताबिक जिस समय पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ इस्लामाबाद के लिए अपने असली आजादी मार्च की तैयारियों में जुटी हुई है, किसान आंदोलन वापस होने से शहबाज शरीफ सरकार ने राहत की सांस ली है। लेकिन उनकी मांगों से सरकार पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। आईएमएफ से वार्ताओं में इस मुद्दे को संभालने की एक नई चुनौती उसके सामने आ खड़ी हुई है।

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