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कनाडा, ब्रिटेन के बाद अब यूएन पहुंचा किसान आंदोलन, महासचिव के प्रवक्ता ने कहा- शांतिपूर्ण प्रदर्शन को ना रोका जाए
Sat, 05 Dec 2020 10:16 AM IST
Tanuja Yadav
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: Tanuja Yadav
Updated Sat, 05 Dec 2020 10:16 AM IST
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किसान आंदोलन
- फोटो : प्रभात पांडेय
कृषि कानून के विरोध में हो रहे किसान आंदोलन की चर्चा कनाडा, ब्रिटेन के बाद अब संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में भी होने लगी है। भारत की ओर से इसे घरेलू मुद्दा बताकर विदेशी नेताओं को इसमें हस्तक्षेप नहीं करने की नसीहत दी गई है। इसके बावजूद पहले कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने अपनी बात दोहराई। इसके अलावा ब्रिटेन के कुछ सांसदों ने अपनी सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है, तो वहीं अब संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के प्रवक्ता ने कहा है कि किसानों को शांति से प्रदर्शन करने का आधिकार है और उन्हें ऐसा करने दिया जाए।
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संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टेफने डुजारिक ने शुक्रवार को कहा, ''जहां तक भारत का सवाल है, मैं आपसे वह कहूंगा जो मैंने दूसरे लोगों को इस तरह के मुद्दे उठाने पर कहा है कि लोगों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है और अथॉरिटीज उन्हें ऐसा करने दें।'' डुजारिक भारत में किसानों के प्रदर्शन को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में प्रतिक्रिया दे रहे थे।
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देश और दुनिया के सिख और पंजाबी किसान इस आंदोलन से जुड़ रहे हैं। इससे पहले कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो किसान आंदोलन को लेकर अपना बयान दे चुके हैं तो वहीं अब ब्रिटेन के कुछ सांसदों ने ब्रिटेन सरकार को भारत सरकार से बात करने के लिए कहा है।
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सांसदों ने विदेश सचिव का लिखा पत्र
ब्रिटेन के भारतीय मूल और पंजाब से संबंध रखने वाले 36 सांसदों ने किसान कानूनों पर केंद्र सरकार के साथ इस मुद्दे को उठाने की बात कही है। सांसदों ने विदेश सचिव डॉमिनिक रैब को लिखा कि वो किसान आंदोलन को लेकर मोदी सरकार से चर्चा करेंगे।
इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले नेताओं में लेबर, कंजरवेटिव और स्कॉटिश नेशनल पार्टी के पूर्व श्रम नेता जेरेमी कॉर्बिन, वीरेंद्र शर्मा, सीमा मल्होत्रा, वैलेरी वाज, नादिया व्हिटोम, पीटर बॉटमली, जॉन मैककॉलन, मार्टिन डॉकर्टी-ह्यूजेस और एलिसन थेवलिस शामिल हैं।
ब्रिटिश सांसदों की मांग
पत्र में लिखा गया कि यह ब्रिटेन के सिखों और पंजाब से जुड़े लोगों के लिए चिंता का विषय है। कई ब्रिटिश सिखों और पंजाबियों ने अपने सांसदों के सामने इस मुद्दे को उठाया है। ऐसा बताया गया कि कई सांसदों ने हाल ही में भारतीय उच्चायोग को भारत के तीन कृषि कानूनों के प्रभाव के बारे में लिखा था।
पत्र में जानकारी दी गई कि ये कानून किसानों को शोषण से बचाने और उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने में विफल हैं। इसके अलावा कई ब्रिटिश सांसदों ट्विटर पर किसान आंदोलन को लेकर कई तरह की टिप्पणियां भी की थीं। ब्रिटिश सिखों की ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री की अध्यक्ष प्रीत कौर ने किसान आंदोलन पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की।
उन्होंने कहा कि यह उन नागरिकों के साथ व्यवहार करने का कोई तरीका नहीं है, जो विवादास्पद किसान विधेयक पर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे हैं। ये दिल्ली से चौंकाने वाला दृश्य है। उन्होंने कहा कि पानी की बौछार और आंसू गैस के गोले उन्हें चुप कराने के लिए किया जा रहा है।