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US: बोइंग के खिलाफ आपराधिक मामले पर आज कोर्ट में सुनवाई, अपील के लिए पीड़ित परिवारों को मिल सकता है आखिरी मौका

Wed, 03 Sep 2025 12:21 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, डल्लास।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, डल्लास। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 03 Sep 2025 12:21 PM IST
सार

US: टेक्सास की संघीय अदालत में बोइंग के खिलाफ दर्ज आपराधिक धोखाधड़ी मामले को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई होगी, जिसमें बोइंग 737 मैक्स के हादसों में मारे गए 346 लोगों के परिवारों को भी अपील का आखिरी मौका मिल सकता है।

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Families of Boeing crash victims to make potential final plea for criminal prosecution
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

टेक्सास की एक संघीय अदालत में आज उस याचिका पर सुनवाई होगी, जिसमें सरकार ने बोइंग के खिलाफ दर्ज आपराधिक धोखाधड़ी के मामले को रद्द करने की मांग की है। इसके साथ ही यह सुनवाई बोइंग 737 मैक्स के विमान हादसों में मारे गए लोगों के परिवारों को भी आखिरी मौका दे सकती है कि वे कंपनी पर आराधिक मुकदमा चलाने की मांग करें। 
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चीफ जस्टिस रीड ओ'कॉनर याचिका पर सुनवाई करेंगे। यह मामला दो विमान हादसों से जुड़ा है, जिसमें 346 लोगों की जान गई थी। इनमें एक विमान हादसा इंडोनेशिया और दूसरा इथियोपिया में हुआ था। इसके बदले में बोइंग ने कहा है कि वह 1.1 अरब डॉलर अतिरिक्त खर्च करेगा, जिसमें जुर्माना, मृतकों के परिजनों को मुआवजा और कंपनी की अंदरूनी सुरक्षा और गुणवत्ता सुधारना शामिल है।
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अभियोजकों का कहना है कि बोइंग ने उड़ान नियंत्रण प्रणाली (फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम) को लेकर सरकारी नियामकों को गुमराह किया और इन विमान हादसों में इस प्रणाली की भूमिका पाई गई थी। ये दोनों हादसे 2018 और 2019 में पांच महीनों से भी कम अंतराल में हुए थे। 

चार साल का वक्त बीत जाने के बाद यह सुनवाई हो रही है। 2021 में पहली बार अमेरिकी न्याय विभाग ने बोइंग पर आरोप लगाए थे और कंपनी के साथ 2.5 अरब डॉलर का समझौता किया था। उस समझौते में बोइंग को आपराधिक मुकदमे से बचाया गया था, बशर्ते वह अपने नैतिक और कानूनी अनुपालन कार्यक्रमों को मजबूत करे। हालांकि, पिछले साल अभियोजकों ने कहा कि बोइंग ने इस समझौते का उल्लंघन किया, जिसके बाद दोबारा मामला शुरू हुआ। 


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बोइंग ने कोर्ट में मुकदमे का सामना करने की बजाय खुद को दोषी मान लिया था। लेकिन दिसंबर 2024 में जज ओ'कॉनर ने इस समझौते को मंजूरी देने से इनकार कर दिया। ओ'कॉनर, जिन्हें राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने जज बनाया था, को यह चिंता थी कि सरकार और बोइंग की 'विविधता नीति' उस स्वतंत्र निगरानी अधिकारी की नियुक्ति को प्रभावित कर सकती हैं, जो कंपनी में किए जाने वाले सुधारों की देखरेख करेगा। 

जिन पीड़ित परिवारों के वकील चाहते थे कि मामला खुली अदालत में चले और बोइंग को सख्त सजा मिले, उन्होंने जज के फैसले का समर्थन किया। लेकिन जो देरी हुई, उसका फायदा बोइंग को मिल गया। जज ओ'कॉनर ने जब उस समझौते को मानने से मना कर दिया, तो कंपनी को मौका मिला कि वह सरकार के आरोपों को चुनौती दे सके। इसके बाद अभियोजकों को बोइंग के साथ नया समझौता करने में छह महीने लग गए। इसी दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोबारा सत्ता में आए और उन्होंने उन विविधता पहलों को बंद करने का आदेश दिया, जिनको लेकर ओ'कॉनर को आपत्ति थी।



 
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