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Tariff: भारत पर टैरिफ लगाने और चीन को बचाने पर ट्रंप को विशेषज्ञों की चेतावनी, कहा- संबंधों पर पड़ेगा प्रभाव
Fri, 22 Aug 2025 09:09 AM IST
बशु जैन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: बशु जैन
Updated Fri, 22 Aug 2025 09:09 AM IST
सार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। जबकि रूस से ही तेल खरीद रहे चीन पर कोई टैरिफ नहीं लगाया। इसकी विशेषज्ञों ने आलोचना की है।
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, पीएम नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।
- फोटो : ANI
विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने पर विशेषज्ञों ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि रूस से तेल खरीदने पर भारत पर टैरिफ लगाने और चीन को बचाने से अमेरिका को ही नुकसान हो सकता है। भारत पर टैरिफ लगाने से दोनों देशों के संबंधों पर प्रभाव पड़ेगा।
भू-राजनीतिक और आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के खिलाफ इस हमले का भारत-अमेरिका संबंधों पर दूरगामी और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। ट्रंप की सहयोगी निक्की हेली ने एक लेख में कहा कि चीन को पछाड़ने के अमेरिकी विदेश नीति के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अमेरिका और भारत के बीच संबंधों को पटरी पर लाने से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ और नहीं है। भारत से मूल्यवान स्वतंत्र और लोकतांत्रिक साझेदार की तरह व्यवहार किया जाना चाहिए, न कि चीन जैसे प्रतिद्वंद्वी की तरह। एशिया में चीनी प्रभुत्व के प्रतिकार के रूप में काम करने वाले एकमात्र देश के साथ 25 वर्षों की गति को रोकना एक रणनीतिक आपदा होगी।
उन्होंने कहा कि भारत, अमेरिका को अपनी महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को चीन से दूर ले जाने में मदद करने के लिए आवश्यक है और यह स्वतंत्र विश्व की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण परिसंपत्ति है। जबकि ट्रंप प्रशासन विनिर्माण को अमेरिका में वापस लाने के लिए काम कर रहा है। भारत उन उत्पादों के लिए चीन जैसे पैमाने पर विनिर्माण करने की क्षमता के मामले में अकेला है, जिनका उत्पादन यहां शीघ्रता से या कुशलता से नहीं किया जा सकता है, जैसे कि कपड़ा, सस्ते फोन और सौर पैनल। हेली ने कहा कि चीन के विपरीत लोकतांत्रिक भारत का उदय स्वतंत्र विश्व के लिए खतरा नहीं है और इसलिए भारत की शक्ति बढ़ने के साथ ही चीन की महत्वाकांक्षाएं कम होनी होंगी।
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भू-राजनीतिक विशेषज्ञ फरीद जकारिया ने अमेरिका भारत संबंधों को खराब करने के लिए ट्रंप की आलोचना की। जकारिया ने कहा कि ट्रंप की ओर से भारत पर लगाए गए दंडात्मक टैरिफ अमेरिका की सबसे बड़ी विदेश नीति गलती थी। अगर ट्रंप अपना रुख बदल भी देते हैं, तो भी नुकसान हो चुका है। भारत का मानना है कि अमेरिका ने अपना असली रंग दिखा दिया है। वह अविश्वसनीय है और जिसे वह अपना दोस्त कहता है, उसके साथ क्रूरता करने को तैयार है। भारत को लगेगा कि उसे अपनी बाजी सुरक्षित रखनी होगी। रूस के साथ नजदीकी बनाए रखें और चीन के साथ सुलह करें।
अमेरिकी अर्थशास्त्री जेफरी सैक्स ने भी भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के ट्रंप के कदम की आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ब्रिक्स के महान एकीकरणकर्ता हैं। उन्होंने टैरिफ को अमेरिकी विदेश नीति में सबसे मूर्खतापूर्ण रणनीतिक कदम कहा। वरिष्ठ अमेरिकी कांग्रेस सदस्य ग्रेगरी मीक्स ने भी भारत पर टैरिफ लगाने के लिए ट्रंप की आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि टैरिफ से वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच मजबूत साझेदारी बनाने के लिए दो दशकों से अधिक समय से किए जा रहे सावधानीपूर्वक कार्य को खतरा है। हमारे बीच गहरे रणनीतिक, आर्थिक और लोगों के बीच संबंध हैं। चिंताओं का समाधान हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप पारस्परिक सम्मान के साथ किया जाना चाहिए।
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भू-राजनीतिक और आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के खिलाफ इस हमले का भारत-अमेरिका संबंधों पर दूरगामी और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। ट्रंप की सहयोगी निक्की हेली ने एक लेख में कहा कि चीन को पछाड़ने के अमेरिकी विदेश नीति के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अमेरिका और भारत के बीच संबंधों को पटरी पर लाने से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ और नहीं है। भारत से मूल्यवान स्वतंत्र और लोकतांत्रिक साझेदार की तरह व्यवहार किया जाना चाहिए, न कि चीन जैसे प्रतिद्वंद्वी की तरह। एशिया में चीनी प्रभुत्व के प्रतिकार के रूप में काम करने वाले एकमात्र देश के साथ 25 वर्षों की गति को रोकना एक रणनीतिक आपदा होगी।
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उन्होंने कहा कि भारत, अमेरिका को अपनी महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को चीन से दूर ले जाने में मदद करने के लिए आवश्यक है और यह स्वतंत्र विश्व की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण परिसंपत्ति है। जबकि ट्रंप प्रशासन विनिर्माण को अमेरिका में वापस लाने के लिए काम कर रहा है। भारत उन उत्पादों के लिए चीन जैसे पैमाने पर विनिर्माण करने की क्षमता के मामले में अकेला है, जिनका उत्पादन यहां शीघ्रता से या कुशलता से नहीं किया जा सकता है, जैसे कि कपड़ा, सस्ते फोन और सौर पैनल। हेली ने कहा कि चीन के विपरीत लोकतांत्रिक भारत का उदय स्वतंत्र विश्व के लिए खतरा नहीं है और इसलिए भारत की शक्ति बढ़ने के साथ ही चीन की महत्वाकांक्षाएं कम होनी होंगी।
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भू-राजनीतिक विशेषज्ञ फरीद जकारिया ने अमेरिका भारत संबंधों को खराब करने के लिए ट्रंप की आलोचना की। जकारिया ने कहा कि ट्रंप की ओर से भारत पर लगाए गए दंडात्मक टैरिफ अमेरिका की सबसे बड़ी विदेश नीति गलती थी। अगर ट्रंप अपना रुख बदल भी देते हैं, तो भी नुकसान हो चुका है। भारत का मानना है कि अमेरिका ने अपना असली रंग दिखा दिया है। वह अविश्वसनीय है और जिसे वह अपना दोस्त कहता है, उसके साथ क्रूरता करने को तैयार है। भारत को लगेगा कि उसे अपनी बाजी सुरक्षित रखनी होगी। रूस के साथ नजदीकी बनाए रखें और चीन के साथ सुलह करें।
अमेरिकी अर्थशास्त्री जेफरी सैक्स ने भी भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के ट्रंप के कदम की आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ब्रिक्स के महान एकीकरणकर्ता हैं। उन्होंने टैरिफ को अमेरिकी विदेश नीति में सबसे मूर्खतापूर्ण रणनीतिक कदम कहा। वरिष्ठ अमेरिकी कांग्रेस सदस्य ग्रेगरी मीक्स ने भी भारत पर टैरिफ लगाने के लिए ट्रंप की आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि टैरिफ से वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच मजबूत साझेदारी बनाने के लिए दो दशकों से अधिक समय से किए जा रहे सावधानीपूर्वक कार्य को खतरा है। हमारे बीच गहरे रणनीतिक, आर्थिक और लोगों के बीच संबंध हैं। चिंताओं का समाधान हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप पारस्परिक सम्मान के साथ किया जाना चाहिए।
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