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कोरोना की टैबलेट: विशेषज्ञ बोले- कोविड की गोली बचाव करेगी, लेकिन यह वैक्सीन का विकल्प नहीं

Wed, 10 Nov 2021 03:54 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 10 Nov 2021 03:54 PM IST
सार

 विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि इन गोलियों के आने की वजह से टीकाकरण अभियान में बाधा पड़ सकती है। इस बारे में सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क ने न्यूयॉर्क के तीन हजार लोगों के बीच एक सर्वे किया। सर्वे के दौरान लगभग 15 फीसदी लोगों ने कहा कि वे वैक्सीन लगवाने के बजाय टैबलेट खाना पसंद करेंगे...

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experts feared that the coronavirus pills could hamper the vaccination campaign
कोरोना वायरस टैबलेट - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

मेर्क एंड कॉ. और फाइजर/बायोएनटेक कंपनियों ने कोविड-19 संक्रमण से बचाव के लिए खाने वाली गोलियां बनाई हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये टैबलेट वैक्सीन का विकल्प नहीं हैं। शुरुआती परीक्षणों में देखा गया है कि इन गोलियों को खाने से कोरोना संक्रमण के गंभीर लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। लेकिन इनसे संक्रमण से पूरा बचाव नहीं होता।

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टीकाकरण में आ सकती है रुकावट

कुछ विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि इन गोलियों के आने की वजह से टीकाकरण अभियान में बाधा पड़ सकती है। इस बारे में सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क ने न्यूयॉर्क के तीन हजार लोगों के बीच एक सर्वे किया। इस अध्ययन की अगुआई करने वाले विशेषज्ञ स्कॉट रैट्जेन ने कहा- ‘इस सर्वे से जाहिर हुआ कि गोलियों की वजह से टीकाकरण को आगे बढ़ाने में रुकावट आ सकती है।’ सर्वे के दौरान लगभग 15 फीसदी लोगों ने कहा कि वे वैक्सीन लगवाने के बजाय टैबलेट खाना पसंद करेंगे।

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फाइजर कंपनी ने बीते शुक्रवार को कहा था कि उसकी गोली- पैक्सलोविड खाने पर संक्रमण ग्रस्त लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की नौबत में 89 फीसदी तक की कमी आती है। इसके पहले पिछले महीने अपने टैबलेट को लॉन्च करते हुए मेर्क कंपनी ने कहा था कि उसकी गोली अस्पताल में भर्ती होने की मजबूरी में 50 फीसदी की कमी लाती है। इन दोनों ही गोलियों को अमेरिका के स्वास्थ्य विनियामकों ने हरी झंडी दे दी है। दिसंबर में खुले बाजार में ये गोलियां उपलब्ध हो जाएंगी।
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ह्यूस्टन स्थित बेलॉर कॉलेज ऑफ मेडिसिन में मॉलिक्यूलर वॉयरोलॉजी और माइक्रो-बायोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. पीटर होटेज ने कहा है कि ऐसी गोलियों का आना कुछ न होने से तो बेहतर है, लेकिन इसे वैक्सीन का विकल्प समझा गया, तो उसमें बहुत बड़ा जोखिम है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ज्यादातर विशेषज्ञ गोलियों का उत्पादन होने से उत्साहित हैं। लेकिन वे यह भी मानते हैं कि गोलियां टीका का विकल्प नहीं हैं।

कोविड-19 वायरस का पुनरुत्पादन रोकेगी

अमेरिकी सरकार के एक अध्ययन के मुताबिक पिछले दिनों जब अमेरिका में कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट के फैलने से महामारी की नई लहर आई थी, तब फाइजर-बायोएनटेक कंपनी की वैक्सीन मौत रोकने में काफी प्रभावी रही। इसकी वजह से 86.8 फीसदी मामलों में अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति नहीं आई।

जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में सार्वजनिक स्वास्थ्य की प्रोफेसर डॉ लियेना वेन ने एक समाचार एजेंसी से कहा- ‘टैबलेट का इस्तेमाल वैक्सीन के साथ-साथ होगा। टैबलेट वैक्सीन की जगह नहीं ले सकती।’ कुछ दूसरे विशेषज्ञों ने भी कहा है कि गोलियों के भरोसे वैक्सीन न लगवाना एक बड़ी गलती साबित होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक इन गोलियों का शरीर के अंदर असर यह होगा कि वे कोविड-19 वायरस का पुनरुत्पादन (यानी अपने नए रूप पैदा करने) से रोक देंगी। लेकिन ये वायरस शरीर में पहुंचने के बाद दूसरे तरीकों से भी नुकसान पहुंचाता है।



विशेषज्ञों के मुताबिक संक्रमण लगने के बाद पहले चरण में कोविड-19 वायरस शरीर के अंदर तीव्र गति से अपनी नई प्रतिकृतियां तैयार करता है। दूसरे चरण में वह इम्यून सिस्टम की कमजोरी का लाभ उठा कर शरीर को कई प्रकार से नुकसान पहुंचाता है। खाने वाली गोलियां कोविड-19 के दूसरे चरण की समस्याओं से राहत नहीं दे सकेंगी।

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