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समलैंगिक अधिकारों का मुद्दा: यूरोपियन यूनियन का पोलैंड और हंगरी से तनाव बढ़ा, रुक सकती है विशेष मदद

Thu, 23 Sep 2021 04:26 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 23 Sep 2021 04:26 PM IST
सार

यूरोपीय आयोग पर यूरोपीय संसद की तरफ से पोलैंड और हंगरी पर कार्रवाई करने के लिए दबाव बढ़ने के संकेत हैं। ईयू के सदस्य कई दूसरे देश भी मांग कर रहे हैं कि समलैंगिक और ट्रांसजेंडर समुदायों से भेदभाव की नीति अपना रहे इन देशों को दी जाने वाली सहायता रोकी जाए...

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European union tensions with Poland and Hungary over Gay rights issue
समलैंगिक - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

समलैंगिकों के अधिकार के हनन के मुद्दे पर पोलैंड और हंगरी का यूरोपियन यूनियन (ईयू) से तनाव और बढ़ गया है। ईयू के मुख्यालय ब्रसेल्स में यह आम शिकायत है कि ये दोनों देश मानवाधिकारों की रक्षा के मामले में ईयू के प्रतिमानों का पालन नहीं कर रहे हैं। अब अंदेशा जताया जा रहा है कि इस मसले पर ईयू इन दोनों देशों के लिए अरबों यूरो की विशेष सहायता रोक सकता है।

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यूरोपीय आयोग पर यूरोपीय संसद की तरफ से पोलैंड और हंगरी पर कार्रवाई करने के लिए दबाव बढ़ने के संकेत हैं। ईयू के सदस्य कई दूसरे देश भी मांग कर रहे हैं कि समलैंगिक और ट्रांसजेंडर समुदायों से भेदभाव की नीति अपना रहे इन देशों को दी जाने वाली सहायता रोकी जाए। ईयू अपने कम विकसित सदस्य देशों को एक खास कोष से क्षेत्रीय सहायता देता है, जिसे कोहेशन फंड कहा जाता है। ये कोष ईयू के सदस्य देशों के बीच आर्थिक गैर-बराबरी को खत्म करने के लिए बनाया गया था।
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पर्यवेक्षकों का कहना है कि हंगरी और पोलैंड के लिए इस फंड से सहायता पर अलग रोक लगाई गई, तो वह एक विस्फोटक फैसला साबित होगा। इस आशंका से वाकिफ ईयू के एक राजनयिक ने ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स से कहा- ‘ऐसा फैसला पूरी तरह से गेम चेंजर होगा। यह ऐसा कदम होगा, जिसे वापस लौटाना मुमकिन नहीं होगा।’ ईयू ने कोहेशन फंड के लिए 2021 से 2027 तक के लिए 1.2 ट्रिलियन यूरो का बजट रखा है। पोलैंड को ईयू से 121 अरब और हंगरी को 38 अरब यूरो की सहायता मिलनी है।

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ईयू के स्थापना घोषणापत्र में मूल अधिकारों की रक्षा के लिए काम करने का प्रावधान है। हाल में इस प्रावधान को ईयू के बजट से जोड़ दिया गया। यानी अब बजट को खर्च करते वक्त इस बात का ख्याल रखा जाएगा कि उस खर्च से ईयू का मूल उद्देश्य पूरा हो। लेकिन कई पर्यवेक्षकों का कहना है कि अगर इस प्रावधान को सख्ती से लागू किया गया, तो उससे ईयू के बिखराव की शुरुआत हो सकती है।

पोलैंड और हंगरी में हाल में ऐसे कानून बनाए गए हैं, जिनके तहत समलैंगिक और ट्रांसजेंडर समुदायों के लिए दिक्कतें खड़ी हुई हैं। ईयू की राय है कि ये कानून इन समुदायों के खिलाफ हैं। इस रूप में ये ईयू की आधारभूत आस्थाओं का उल्लंघन करते हैं। फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक यूरोपियन आयोग ने अभी तक नए प्रतिमानों को कोहेशन फंड से धन वितरण की प्रक्रिया से अलग रखा है। लेकिन आयोग की उपाध्यक्ष वेरा जोरोवा ने इस अखबार से कहा- ‘अब आयोग को नई शक्ति मिल रही है। वह इसे गंभीरता से ले रहा है। इसे कैसे लागू किया जाएगा, यह तय करने के लिए हम काम कर रहे हैं।’

जोरोवा ने कहा कि ईयू के चार्टर (घोषणापत्र) में यूरोप के नागरिकों और इसके सदस्य देशों के बुनियादी अधिकारों की व्याख्या की है। कोहेशन फंड से मिली रकम को कोई देश कैसे खर्च करेगा, यह वही तय करता है। लेकिन अब उसे यह बताना होगा कि क्या उसने ऐसा ईयू चार्टर के मुताबिक किया है।

पोलैंड के वित्त मंत्री ताडेउस्ज कोसिन्स्की ने चेतावनी दी है कि अगर ईयू ने पोलैंड की सहायता रोकी, तो पोलैंड में ईयू विरोधी भावनाएं भड़क उठेंगी। उन्होंने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा- ‘जब राजनीति को आर्थिकी से मिलाया जाता है, तो उसका परिणाम कभी अच्छा नहीं होता।’ उधर हंगरी सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि हंगरी को इस बारे में ईयू ने अभी तक नहीं बताया है कि उसकी सहायता रोकी जाएगी।

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