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मां रहे शराब से दूर तो बच्चा बने अकलमंद
Updated Fri, 16 Nov 2012 08:20 PM IST
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गर्भवती महिला अगर शराब की शौकीन हैं तो ये होने वाले बच्चे की अकल के लिए
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खतरे से खाली नहीं है। एक शोध में पता चला है कि सप्ताह में दो ग्लास शराब
का सेवन बच्चे के ‘आईक्यू’ पर सीधा असर डालता है।
ऑक्सफोर्ड और ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 4,000 बच्चों के ‘आईक्यू’ पर शोध कर ये रिपोर्ट तैयार की है। शोध में बच्चों की मांओं के शराब पीने की आदत का विशेष अध्ययन किया गया।
शोधकर्ताओं ने पाया कि सप्ताह में एक से छह 'यूनिट' शराब भी बच्चों के ‘आईक्यू’ पर असर डाल सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक गर्भ के दौरान शराब से तौबा करना ही उचित है।
जोखिम
शोधकर्ता मानते हैं कि इसका असर हालांकि कम दिखा लेकिन बेहतर तो यही है कि शराब से परहेज किया जाए। शोध के प्रमुख डॉक्टर रोन ग्रे का कहना है, “हालांकि शराब पीना या ना पीना हर गर्भवती महिला का व्यक्तिगत मामला है, हम तो सिर्फ प्रमाण उपलब्ध करा रहे हैं। वैसे मैं तो शराब छोड़ने की सलाह देता हूं। आखिर जोखिम लेने का कोई मतलब तो है नहीं।”
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इसके पहले हुए अध्ययन में थोड़ा संदेह था कि आखिर शराब की कितनी मात्रा गर्भवती होने के दौरान खतरनाक साबित हो सकता है। लेकिन अब इस शोध ने इस पर से काफी हद तक पर्दा हटा दिया है। ब्रिटेन के स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता का कहना है कि 2007 से ही वो गर्भवती और गर्भधारण की इच्छा रखने वाली महिलाओं को ये सलाह देते रहे हैं कि वो शराब को ना छुएं।
हालांकि, मैनचेस्टर के सेंट मेरी अस्पताल के प्रसूति और भ्रूण विशेषज्ञ डॉक्टर क्लेर टावर कहते हैं कि गर्भावस्था में कभी कभार शराब पीना हानिकारक नहीं है। उनका कहना है कि हालांकि, मोटे तौर पर शोध में जो बातें सामने आई हैं उसके हिसाब से शराब से परहेज ही ठीक रास्ता है। डॉक्टर ये भी कहती हैं कि पिछले पांच सालों में जो दूसरे शोध हुए हैं उनमें आईक्यू पर असर डालने जैसी बातें सामने नहीं हैं।
वैसे, इस क्षेत्र में यह एक बिल्कुल नए किस्म का शोध है क्योंकि, इससे पहले हुए शोध में भी गर्भ के दौरान शराब पीने को खतरनाक बताया गया था। लेकिन अबतक डॉक्टर इस बात पर सहमत नहीं थे कि आखिर शराब की कितनी मात्रा और किस तरह से खतरनाक साबित हो सकती है।
ऑक्सफोर्ड और ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 4,000 बच्चों के ‘आईक्यू’ पर शोध कर ये रिपोर्ट तैयार की है। शोध में बच्चों की मांओं के शराब पीने की आदत का विशेष अध्ययन किया गया।
शोधकर्ताओं ने पाया कि सप्ताह में एक से छह 'यूनिट' शराब भी बच्चों के ‘आईक्यू’ पर असर डाल सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक गर्भ के दौरान शराब से तौबा करना ही उचित है।
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जोखिम
शोधकर्ता मानते हैं कि इसका असर हालांकि कम दिखा लेकिन बेहतर तो यही है कि शराब से परहेज किया जाए। शोध के प्रमुख डॉक्टर रोन ग्रे का कहना है, “हालांकि शराब पीना या ना पीना हर गर्भवती महिला का व्यक्तिगत मामला है, हम तो सिर्फ प्रमाण उपलब्ध करा रहे हैं। वैसे मैं तो शराब छोड़ने की सलाह देता हूं। आखिर जोखिम लेने का कोई मतलब तो है नहीं।”
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इसके पहले हुए अध्ययन में थोड़ा संदेह था कि आखिर शराब की कितनी मात्रा गर्भवती होने के दौरान खतरनाक साबित हो सकता है। लेकिन अब इस शोध ने इस पर से काफी हद तक पर्दा हटा दिया है। ब्रिटेन के स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता का कहना है कि 2007 से ही वो गर्भवती और गर्भधारण की इच्छा रखने वाली महिलाओं को ये सलाह देते रहे हैं कि वो शराब को ना छुएं।
हालांकि, मैनचेस्टर के सेंट मेरी अस्पताल के प्रसूति और भ्रूण विशेषज्ञ डॉक्टर क्लेर टावर कहते हैं कि गर्भावस्था में कभी कभार शराब पीना हानिकारक नहीं है। उनका कहना है कि हालांकि, मोटे तौर पर शोध में जो बातें सामने आई हैं उसके हिसाब से शराब से परहेज ही ठीक रास्ता है। डॉक्टर ये भी कहती हैं कि पिछले पांच सालों में जो दूसरे शोध हुए हैं उनमें आईक्यू पर असर डालने जैसी बातें सामने नहीं हैं।
वैसे, इस क्षेत्र में यह एक बिल्कुल नए किस्म का शोध है क्योंकि, इससे पहले हुए शोध में भी गर्भ के दौरान शराब पीने को खतरनाक बताया गया था। लेकिन अबतक डॉक्टर इस बात पर सहमत नहीं थे कि आखिर शराब की कितनी मात्रा और किस तरह से खतरनाक साबित हो सकती है।