ब्रिटेन चुनाव: किसी को नहीं मिला बहुमत, थेरेसा ने महारानी से की सरकार बनाने की मांग
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्रिटेन में आम चुनाव के लिए वोटिंग खत्म हो चुकी है। किसी भी पार्टी को बहुमत न मिलने से हंग पार्लियामेंट पक्का हो चुका है। इसके अलावा थेरेसा मे की कंजर्वेटिव पार्टी ब्रिटेन की सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है। न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने उनकी कंजर्वेटिव पार्टी को बहुमत नहीं मिलने के बाद ब्रिटेन की महारानी से सरकार बनाने की अनुमति मांगी है।
गौरतलब है कि बहुमत हासिल करने के लिए किसी भी पार्टी को 326 सीटों की जरूरत थी। ब्रिटेन की कंजर्वेटिव पार्टी को 314 सीटें मिली हैं जबकि लेबर पार्टी को 261 सीटें मिली हैं।
अगर वोटों की बात की जाए तो-
कंजर्वेटिव पार्टी- 314
लेबर पार्टी- 261
लिबरल डेमोक्रेट- 12
स्कॉटिश नेशनल पार्टी- 35
डेमोक्रेटिक यूनिएनिस्ट पार्टी-10
अन्य-12
गुरुवार को जारी एग्जिट पोल एग्जिट पोल में ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे की कंजर्वेटिव पार्टी को 326 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था जबकि जेर्मी कोबिन की लेबर पार्टी को 266 सीटें मिलने का अनुमान लगाया जा रहा था।
एग्जिट पोल्स के अनुमान के बाद ही लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन टेरीजा मे से इस्तीफा मांग की थी, जिससे टेरेसा ने इंकार कर दिया था। जबकि टेरीजा मे ने ये चुनाव समय से पहले करवाए थे ताकि वो संसद में अपनी स्थिति मजबूत कर सकें।
थेरेसा ने कहा कि वो इस्तीफा नहीं देंगी और सरकार बनाने के लिए काम करेंगी, वहीं लेबर पार्टी का कहना है कि वो अल्पसंख्यक सरकार बनाने की कोशिश करेंगे।PM @Theresa_May has no intention of resigning & will work to form a government, @bbclaurak reports https://t.co/zbdtgVPoB9 #bbcelection
— BBC Breaking News (@BBCBreaking) June 9, 2017
UK Labour Party says it will seek to form a minority government: Reuters #GE2017
— ANI (@ANI_news) June 9, 2017
बता दें कि 2015 के आम चुनाव में कंजर्वेटिव पार्टी को 331 पर जीत मिली थी जबकि लेबर पार्टी को 232 सीटों पर। गौरतलब है कि ब्रिटेन में करीब 4.58 करोड़ मतदाता हैं। ब्रिटेन में संसद का कार्यकाल पांच साल का होता है। हालांकि ब्रिटेन में आम चुनाव तीन साल पहले कराए गए हैं। इससे पहले 2015 में वहां चुनाव हुए थे।