फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   europe jet fuel crisis iea chief Fatih Birol warning strait of hormuz oil shortage

होर्मुज संकट: यूरोप के पास बचा है महज छह हफ्तों का हवाई ईंधन, किसने दी डरावनी चेतावनी?

Thu, 16 Apr 2026 10:21 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, पेरिस
पीटीआई, पेरिस Published by: राकेश कुमार Updated Thu, 16 Apr 2026 10:21 PM IST
सार

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी प्रमुख फातिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध के कारण होर्मुज में तेल की आपूर्ति रुकने से यूरोप के पास केवल छह हफ्ते का हवाई ईंधन बचा है। इससे वैश्विक स्तर पर उड़ानों के रद्द होने, बेतहाशा महंगाई और मंदी का खतरा पैदा हो गया है। युद्ध से बुनियादी ढांचे को पहुंचे नुकसान के कारण तेल आपूर्ति बहाल होने में दो साल तक का समय लग सकता है।
 

विज्ञापन
europe jet fuel crisis iea chief Fatih Birol warning strait of hormuz oil shortage
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख फातिह बिरोल - फोटो : ANI

विस्तार

दुनिया इस वक्त इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा संकट के मुहाने पर खड़ी है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के प्रमुख फातिह बिरोल ने एक बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने दावा किया है कि यूरोप के पास अब सिर्फ छह हफ्ते का हवाई ईंधन बचा है। अगर ईरान युद्ध के चलते तेल की आपूर्ति बाधित रही तो बहुत जल्द दुनिया भर में विमानों के पहिए थम सकते हैं।
विज्ञापन


होर्मुज बना 'गले की फांस'
बिरोल ने कहा कि दुनिया गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है, लेकिन वहां अभी आपूर्ति पूरी तरह ठप है। बिरोल ने कहा, 'अगर मई के अंत तक यह रास्ता नहीं खुला, तो कमजोर अर्थव्यवस्था वाले देश मंदी और बेतहाशा महंगाई की गर्त में समा जाएंगे।'
विज्ञापन


आम आदमी की जेब पर सीधा वार
आईईए प्रमुख ने साफ किया कि इसका असर सिर्फ हवाई यात्रा तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में पेट्रोल, गैस और बिजली की कीमतें आसमान छुएंगी। उन्होंने कहा कि इस संकट की सबसे बड़ी मार उन गरीब और विकासशील देशों पर पड़ेगी जिनकी आवाज वैश्विक मंचों पर अक्सर दब जाती है। एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देश इस महंगाई की सबसे पहली भेंट चढ़ेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह भी पढ़ेंइस्राइल-लेबनान में 10 दिन का सीजफायर: ट्रंप का दावा- शांति की दिशा में बड़ा कदम; 34 साल बाद आमने-सामने बातचीत


ईरान के 'टोल बूथ' पर बिरोल ने जताया ऐतराज 
बिरोल ने ईरान की ओर से कुछ जहाजों से 'रास्ता शुल्क' वसूलने की नीति पर भी कड़ा ऐतराज जताया। उनका मानना है कि अगर इसे स्वीकार कर लिया गया, तो यह दुनिया के अन्य जलमार्गों जैसे मलक्का जलडमरूमध्य के लिए भी एक खतरनाक मिसाल बन जाएगा। उन्होंने कहा कि तेल की आवाजाही बिना किसी शर्त के एक स्थान से दूसरे स्थान तक होनी चाहिए।

रिपोर्ट के मुताबिक, फारस की खाड़ी में 110 से अधिक तेल टैंकर और 15 एलएनजी जहाज फंसे हुए हैं। लेकिन राहत की उम्मीद नहीं है। युद्ध की वजह से ऊर्जा क्षेत्र की 80 से अधिक संपत्तियां क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जिनमें से एक तिहाई बुरी तरह तबाह हैं। बिरोल के अनुसार, अगर आज शांति समझौता हो भी जाए, तो तेल उत्पादन को पुराने स्तर पर लौटने में कम से कम दो साल का वक्त लगेगा। उन्होंने कहा कि यह देखना दुखद है कि ऊर्जा हमेशा से संघर्षों के केंद्र में रही है। यह संकट न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाएगा, बल्कि आने वाले वर्षों में दुनिया के एनर्जी मैप को भी बदलकर रख देगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed