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यूरोप : आइसलैंड में बनी महिला बहुमत वाली पहली यूरोपीय संसद, ऐसा करने वाला बना पहला देश
Tue, 28 Sep 2021 01:41 AM IST
Kuldeep Singh
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, रिक्जेविक
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, रिक्जेविक
Published by: Kuldeep Singh
Updated Tue, 28 Sep 2021 01:41 AM IST
सार
आइसलैंड ने दुनिया के सामने अनोखा उदाहरण पेश किया है। देश की 63 सदस्यीय संसद में 33 सीटों पर महिला उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। चुनाव के इन नतीजों को उत्तरी अटलांटिक के द्वीपीय राष्ट्र में लैंगिक समानता के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है।
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आइसलैंड की प्रधानमंत्री कैटरीन जैकब्सडॉटिरो
- फोटो : social media
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विस्तार
यूरोप की पहली महिला बहुल संसद आइसलैंड में बनी है। देश की कुल 63 सदस्यीय संसद (अल्थिंग) में 33 सीटों पर महिला उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। शनिवार को हुई चुनाव में इन नतीजों को उत्तरी अटलांटिक के द्वीपीय राष्ट्र में लैंगिक समानता के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है।
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देश की 63 सदस्यीय संसद में 33 सीटों पर महिला उम्मीदवारों ने जीत हासिल की
प्रधानमंत्री कैटरीन जेकब्सदातिर के नेतृत्व वाली निवर्तमान गठबंधन सरकार के तीनों दलों ने 37 सीटें जीती हैं। गठबंधन को पिछले चुनाव की तुलना में दो सीटें ज्यादा मिली हैं और सत्ता में बने रहने की संभावना नजर आ रही है। राजनीति की प्रोफेसर सिल्जा बारा ओमर्सदातिर ने कहा कि पिछले एक दशक से वामपंथी दलों द्वारा लागू लैंगिक कोटा आइसलैंड की राजनीति में नया मानदंड बनाने में कामयाब रहा है।
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उन्होंने कहा, उम्मीदवारों का चयन करते समय लैंगिक समानता की उपेक्षा करना अब बहुत ही मुश्किल होगा। यहां हुए जनमत सर्वेक्षण में वामपंथी दलों की जीत का संकेत दिया गया था, जिसमें 10 पार्टियों के बीच सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा थी। लेकिन, मध्य दक्षिणपंथी इंडिपेंडेंस पार्टी को सबसे ज्यादा मत मिले और उसने 16 सीटें जीतीं। इनमें सात महिलाएं हैं।
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जापान में पहली बार पीएम पद की दौड़ में दो महिलाएं
जापान में आगामी प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में चार उम्मीदवार शामिल हैं जिनमें से दो महिलाएं हैं। साने ताकाइची और सेको नोडा पिछले 13 साल में देश की पहली महिलाएं हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री पद के चुनाव में सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) के नेतृत्व के लिए अपनी दावेदारी पेश की है।
लैंगिक भेदभाव के आरोप लगने वाले इस देश में यह एक बड़ा कदम है। विजेता का अगला पीएम बनना तय है, क्योंकि एलडीपी और इसके गठबंधन साझेदारों के पास संसदीय बहुमत है। भले ही ये दोनों महिला नेता एलडीपी सदस्य हैं, लेकिन वे कई तरीकों से राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं।
निवर्तमान पीएम योशिहिदे सुगा का उत्तराधिकारी बनने के लिए इन महिलाओं के सामने टीकाकरण मंत्री तारो कोनो और पूर्व विदेश मंत्री फुमिओ किशिदा की चुनौती है। हालांकि दोनों महिलाओं के पीएम बनने की संभावना काफी कम है।