EU: यूरोपीय संघ ने की रेडियो फ्री यूरोप के लिए आपात फंडिंग की घोषणा; ट्रंप की रोक के बाद मिला जीवनदान
ट्रंप सरकार की तरफ से फंडिंग रोके जाने के बाद बंद होने की कगार पर पहुंचे रेडियो फ्री यूरोप को ईयू ने 5.5 मिलियन यूरो की आपात सहायता दी। मामले में ईयू का कहना है कि पड़ोसी देशों में स्वतंत्र पत्रकारिता को बचाना जरूरी है।
विस्तार
यूरोपीय संघ (ईयू) ने मंगलवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए स्वतंत्र और लोकतांत्रिक पत्रकारिता को समर्थन देने के लिए रेडियो फ्री यूरोप/रेडियो लिबर्टी को आपातकालीन फंड देने की घोषणा की। मामले में जानकारी देते हुए ईयू की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास ने बताया कि यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों ने रेडियो फ्री यूरोप को 5.5 मिलियन यूरो (करीब 6.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर) की सहायता देने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि यह पैसा स्वतंत्र पत्रकारिता की सुरक्षा के लिए आपातकालीन सहायता के रूप में दिया जाएगा। काजा कैलास ने कहा कि हम पूरी दुनिया में इसकी फंडिंग का अंतर नहीं भर सकते, लेकिन जो देश ईयू के पड़ोसी हैं और जो बाहरी स्रोतों से मिलने वाली खबरों पर निर्भर हैं, वहां इसकी मदद जरूरी है। बता दें कि अमेरिका की ट्रंप सरकार ने इस मीडिया संगठन की फंडिंग रोक दी थी, यह आरोप लगाते हुए कि यह लिबरल एजेंडा को बढ़ावा दे रहा है। इसके बाद संस्था को बंद होने का खतरा था।
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अमेरिका में कोर्ट ने भी दी राहत
रेडियो फ्री यूरोप/रेडियो लिबर्टी का मुख्यालय वॉशिंगटन में है और पत्रकारिता से जुड़ा कार्यालय चेक गणराज्य में स्थित है। बीते महीने एक अमेरिकी अदालत ने ट्रंप प्रशासन को आदेश दिया था कि वह कांग्रेस द्वारा स्वीकृत 12 मिलियन डॉलर की राशि संस्था को लौटाए। जहां संस्था ने कहा था कि अगर यह पैसा नहीं मिला, तो जून 2025 तक उसे बंद करना पड़ सकता है। रेडियो फ्री यूरोप पिछले 75 सालों से काम कर रहा है और 27 भाषाओं में 23 देशों में प्रसारण करता है।
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'सोवियत दौर में बना था लोकतंत्र की आवाज'
मामले में ईयू के विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास ने आगे कहा कि जब वह सोवियत संघ के तहत एस्टोनिया में बड़ी हो रही थीं, तब इस रेडियो से उन्हें बाहरी दुनिया की सच्चाई पता चलती थी। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की एक किरण रहा है, जिसकी भूमिका बेहद अहम रही है। साथ ही अब ईयू ये भी उम्मीद कर रहा है कि उसके 27 सदस्य देश भी रेडियो फ्री यूरोप को आगे और मदद देंगे ताकि स्वतंत्र पत्रकारिता को जिंदा रखा जा सके।
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