पर्यावरण रक्षा समझौता: खेती के तरीकों पर विवाद, अमेरिका और ईयू में चौड़ी हो गई दरार
अमेरिकी कृषि मंत्रालय ने एक आर्थिक मॉडल जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि अगर यूरोपीय मॉडल का पालन किया गया, तो दुनिया में खाद्य पैदावार में 11 फीसदी की गिरावट आएगी, जबकि इनकी कीमतों में 89 फीसदी की बढ़ोतरी होगी...
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अनाज कैसे पैदा किया जाए, इस सवाल पर अमेरिका और यूरोपियन (ईयू) के बीच टकराव की स्थिति बनती दिख रही है। दोनों पक्षों में इस प्रश्न पर बातचीत चल रही है कि जलवायु को बिना नुकसान पहुंचाए खेती कैसे की जाए। दोनों पक्ष खाद्य पदार्थों को उपजाने के नए तरीकों पर सहमति बनाने की कोशिश में हैं। लेकिन अमेरिका के कृषि मंत्री टॉम विलसैक ने वेबसाइट पॉलिटिको.ईयू को दिए एक इंटरव्यू में कहा- ‘यह बहुत साफ है कि दोनों पक्ष अलग-अलग रास्तों पर हैं। मुझे लगता है कि इस मामले में अमेरिका और कई दूसरे देश एक रास्ते पर चलेंगे, जबकि ईयू एक अलग रास्ते पर जाएगा।’
ईयू ने प्रस्ताव रखा है कि 2030 तक खेती में कीटनाशकों के इस्तेमाल घटा कर आधा कर दिया जाए। ईयू ने कहा है कि वह तब तक अपने एक चौथाई इलाके में ऑर्गेनिक खेती सुनिश्चित करने की तैयारी कर रहा है। लेकिन अमेरिका का कहना है कि अगर उसने अपने देश में ऐसा लक्ष्य तय किया, तो उससे फसलों की उपज घटेगी। उस कारण खाद्य पदार्थ महंगे हो जाएंगे और खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।
वेबसाइट पॉलिटिको के मुताबिक अमेरिकी कृषि मंत्रालय ने एक आर्थिक मॉडल जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि अगर यूरोपीय मॉडल का पालन किया गया, तो दुनिया में खाद्य पैदावार में 11 फीसदी की गिरावट आएगी, जबकि इनकी कीमतों में 89 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। विलसैक ने कहा- ‘दुनिया में सबको भोजन उपलब्ध कराना है। ऐसा पर्यावरण सम्मत तरीके से करना है। इनमें से किसी एक के लिए हम दूसरे उद्देश्य की बलि नहीं चढ़ा सकते।’
अमेरिका ने पर्यावरण सम्मत ढंग से खेती को बढ़ावा देने के लिए एक नया अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाया है। विलसैक ने बताया कि इस समूह से अधिक से अधिक देशों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा- ‘नए समूह का मकसद यह है कि खेती और डेयरी के मामले में ईयू दुनिया पर नए नियम ना थोप पाए।’
उधर फ्रांस ने ईयू से ऐसा कानून बनाने को कहा है कि जिसके तहत कमतर प्रतिमानों के साथ खेती करने वाले देशों से ईयू से जुड़े देश अनाज का आयात रोक दें। फ्रांस अगले साल पहले छह महीनों तक ईयू की अध्यक्षता करेगा। इसलिए उसकी बातों को काफी वजन दिया जा रहा है। फ्रांस का कहना है कि जिन देशों की खेती में केमिकल्स का इस्तेमाल होता है, उनसे आयात पर तुरंत रोक लगाने की जरूरत है। ईयू की नई योजना को फार्म टू फॉर्क (खेत से भोजन की मेज तक) कहा गया है।
बताया जाता है कि अमेरिका में कृषि लॉबी इसका जोरदार विरोध कर रही है। उसका कहना है कि ईयू पहले ही मांस के बारे में अलग प्रतिमान लागू कर चुका है, जिसकी वजह से अमेरिका से ईयू के लिए मीट का निर्यात मुश्किल हो गया है। जानकारों का कहना है कि अमेरिका सरकार ने अपनी फार्म लॉबी के दबाव में अपनी नीति तय की है।
विलसैक ने कहा कि ईयू के नियम व्यापार की भावना के अनुरूप नहीं हैं। लेकिन ईयू के ग्रीन डील (पर्यावरण रक्षा समझौता) के प्रमुख फ्रान्स टिमरमैन्स ने कहा है कि अब सिर्फ उत्पादकता बढ़ाना लक्ष्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा- ‘हमने ऐसा सिस्टम बना रखा है, जिसके तहत किसानों पर लगातार ज्यादा उत्पादन करने का दबाव डाला गया है। लेकिन इस सिस्टम ने धरती की क्षमता को उसकी सीमा तक पहुंचा दिया है। इसलिए हमें सफलता को देखने का तरीका बदलना होगा।’