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सस्ते स्मार्टफोन का दौर हो रहा खत्म: 2030 तक 20 हजार से कम कीमत वाले फोन बाजार से होंगे बाहर, क्या है कारण?

Sat, 26 Sep 2026 05:32 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sat, 26 Sep 2026 05:32 AM IST
सार

2030 तक दुनिया भर में 20,000 रुपये से कम कीमत वाले 23 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन बाजार से बाहर हो सकते हैं। काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, बजट स्मार्टफोन सेगमेंट में करीब 40% गिरावट का अनुमान है। चिपसेट और मेमोरी की बढ़ती लागत, कंपनियों का कम मार्जिन वाले बाजार से पीछे हटना और बदलती उपभोक्ता आदतें इसके प्रमुख कारण हैं।

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era of affordable smartphones coming end phones priced under 20000 disappear from market by 2030 know reason
सस्ते स्मार्टफोन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

स्मार्टफोन बाजार से धीरे-धीरे सस्ते और बजट फोन गायब हो रहे हैं। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक दुनिया भर के रिटेल बाजारों से 20,000 रुपये से कम कीमत वाले 23 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन बाजार से बाहर हो जाएंगे। काउंटरपॉइंट रिसर्च के स्मार्टफोन शिपमेंट फोरकास्ट बाय प्राइस बैंड ट्रैकर के मुताबिक, इस दशक के अंत तक बजट सेगमेंट में लगभग 40% की भारी गिरावट दर्ज की जाएगी। हैरान करने वाली बात यह है कि एक तरफ जहां कुल वैश्विक स्मार्टफोन शिपमेंट में रिकवरी देखी जा रही है और यह फिर से 2025 के स्तर के आसपास (लगभग 1.20 अरब यूनिट्स) पहुंच रही है, वहीं बजट सेगमेंट लगातार सिकुड़ता जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे मुख्य वजह 2026-2027 के दौरान इंडस्ट्री में आए मंदी के झटके हैं।

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इसलिए महंगे हो रहे हैं फोन
चिपसेट और मेमोरी की बढ़ती कीमतें, हार्डवेयर की सख्त होती जरूरतें और फोन निर्माताओं का कम मुनाफे वाले मार्केट से पीछे हटना भी बजट फोन के बाहर होने का बड़ा कारण है। सस्ते फोनों में कंपोनेंट्स की लागत पहले ही कुल लागत का एक बड़ा हिस्सा होती है, जिसके चलते कंपनियों के पास कीमतें बढ़ने पर उन्हें खुद वहन करने की कोई गुंजाइश नहीं बचती।
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23 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन बाजार से हो जाएंगे बाहर
2030 तक 20,000 रुपये से कम कीमत वाले 23 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन दुनिया भर के रिटेल बाजारों से बाहर हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दशक के अंत तक बजट स्मार्टफोन सेगमेंट में लगभग 40% की गिरावट आने का अनुमान है।
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उपभोक्ता बदल रहे आदतें
रिपोर्ट के मुताबिक, बजट फोनों के महंगे होने या बाजार से गायब होने का एक कारण यूजर्स की आदत भी है, जिसे वे अब बदलने लगे हैं। मसलन, वे अब अपने पुराने स्मार्टफोन को लंबे समय तक संभाल कर रख रहे हैं और नया फोन खरीदने में देरी कर रहे हैं। कई खरीदार अब नए बजट सेट की बजाय सर्टिफाइड रिफर्बिश्ड और सेकंड-हैंड फोन की तरफ रुख कर रहे हैं। यूजर्स का एक वर्ग ऐसा भी है जो ईएमआई या इंस्टॉलमेंट प्लान का सहारा लेकर थोड़े महंगे यानी मिड-रेंज और प्रीमियम सेगमेंट की तरफ बढ़ रहा है।


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डिजिटल कनेक्टिविटी पर मंडरा रहा बड़ा जोखिम
काउंटरपॉइंट रिसर्च के प्रिंसिपल एनालिस्ट यांग वांग का कहना है कि स्मार्टफोन बाजार यूनिट के लिहाज से भले ही संभल जाए, लेकिन किफायती सेगमेंट अपनी पुरानी स्थिति में वापस नहीं लौटेगा। विकासशील और कम आय वाले बाजारों में डिवाइस का किफायती होना मोबाइल इंटरनेट तक पहुंचने की सबसे बड़ी बाधा है। 20,000 रुपये से कम कीमत के नए स्मार्टफोन कम होने से फीचर फोन से पर्सनल स्मार्टफोन तक का सफर तय करने वाले नए यूजर्स की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। इससे सरकारों, नेटवर्क ऑपरेटरों और सॉफ्टवेयर डेवलपर्स द्वारा डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के प्रयासों को भी चुनौती मिल सकती है।

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