ऊर्जा संकट से जूझ रही दुनिया: अंतरराष्ट्रीय बाजार में और बढ़ेगी गैस और कोयले की कीमत
पिछले हफ्ते यूरोप में प्राकृतिक गैस और बिजली की कीमतों में भारी उछाल आया। मौसम विभाग ने भविष्यवाणी की है कि इस साल ब्रिटेन में सामान्य अधिक ठंड पड़ेगी। इसका असर भी गैस और बिजली की कीमतों पर पड़ा है। उधर ऊर्जा संकट के और गहराने की आशंका के कारण एशिया और यूरोप के देश गैस और पेट्रोलियम की अधिक खरीदारी में जुट गए हैं...
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अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्राकृतिक गैस और कोयले की महंगाई और बढ़ने का अंदेशा है। जानकारों के मुताबिक इसकी वजह चीन की कंपनियों का इन ऊर्जा उत्पादों की खरीदारी में बड़े पैमाने पर जुट जाना है। पिछले दिनों चीन ने सरकार ने अपने देश की कंपनियों से कहा था कि वे किसी भी कीमत पर गैस और कोयले की खरीदारी करें, ताकि अगली सर्दियों में देश में बिजली की सप्लाई सामान्य रखी जा सके।
अब खबर है कि चीन की सरकारी कंपनी चाइना नेशनल ऑफशोर ऑयल कॉरपोरेशन ने कतर की कंपनी कतर पेट्रोलियम के साथ एक दीर्घकालिक समझौता किया है। उसके तहत अगले जनवरी से कतर की कंपनी ज्यादा मात्रा में एलएनजी की सप्लाई चीन को करेगी। ये करार 15 साल के लिए किया गया है। इसके तहत कतर पेट्रोलियम हर साल 35 लाख टन अधिक एलएनजी (लिक्विफाइड नैचुरल गैस) की सप्लाई चीन को करेगी। नया करार जनवरी से लागू होगा, लेकिन दरअसल, कतर ने चीन को एलएनजी की सप्लाई अभी से शुरू भी कर दी है। उसने दो करोड़ 40 लाख टन एलएनजी चीन को भेज दिया है।
इस समय चीन के साथ-साथ यूरोप भी ऊर्जा संकट झेल रहा है। विश्लेषकों के मुताबिक इसकी वजह यह रही कि पिछले साल वहां कड़ी सर्दी पड़ी। इससे उनके भंडार में मौजूद गैस और कोयले का अधिक उपभोग हुआ। अब दोनों जगहों पर कोरोना महामारी के बाद आर्थिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। उससे गैस और कोयले की मांग बढ़ गई है। इसका असर इन पदार्थों के अंतरराष्ट्रीय भाव पर पड़ा है।
पिछले हफ्ते यूरोप में प्राकृतिक गैस और बिजली की कीमतों में भारी उछाल आया। मौसम विभाग ने भविष्यवाणी की है कि इस साल ब्रिटेन में सामान्य अधिक ठंड पड़ेगी। इसका असर भी गैस और बिजली की कीमतों पर पड़ा है। उधर ऊर्जा संकट के और गहराने की आशंका के कारण एशिया और यूरोप के देश गैस और पेट्रोलियम की अधिक खरीदारी में जुट गए हैं। इससे एशिया में एलएनजी के दाम बढ़े हैं।
ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक गैस की नई खरीदारी में एशियाई देश फिलहाल आगे दिख रहे हैं। एलएनजी के एक ब्रोकर ने इस अखबार से कहा- ‘एशियाई देशों के पास अधिक क्रय शक्ति है। फिर यूरोप के पास पाइपलाइन की सप्लाई है। लेकिन चीन और जापान के पास ये विकल्प नहीं हैं।’ इस बीच आस्ट्रेलिया की एडवाइजरी फर्म एनर्जीक्वेस्ट ने एक रिपोर्ट में कहा है कि कोरोना महामारी के बाद गैस की एशिया और यूरोप में बढ़ी मांग के कारण ज्यादा एलएनजी खरीदने की एक होड़ लग गई है। इसकी वजह से खास कर अमेरिका और कतर ने गैस की कीमतें रिकॉर्ड सीमा तक बढ़ा दी हैं।
रूस की वेबसाइट रशिया टुडे पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक एशिया में इस समय एलएनजी की कीमत जनवरी के बाद रिकॉर्ड स्तर पर हैं। पिछले हफ्ते एलएनजी का खरीद मूल्य 34.47 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमएमबीटीयू) तक पहुंच गया, जबकि जनवरी में भी ये कीमत 32.50 डॉलर ही थी।
गैस बाजार के विशेषज्ञ वॉरेन पीटरसन और वेनयू याओ ने वेबसाइट थिंक.आईएनजी.कॉम पर अपने एक विश्लेषण में लिखा है कि चीन ने जिस तरह कतर से अधिक गैस सप्लाई का समझौता किया है, उसका संकेत है कि अभी वह और ऐसे करार करेगा। उसकी वजह से यूरोपीय गैस बाजार पर दबाव बढ़ेगा। जानकारों के मुताबिक सारे ट्रेंड इस ओर इशारा कर रहे हैं कि अभी काफी समय तक गैस और बिजली उत्पादन के स्रोतों की महंगाई जारी रहेगी।