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Emin Zhaparova: क्या भारत के प्रयासों से रुकेगा रूस-यूक्रेन युद्ध, दिल्ली दौरे पर क्यों आईं यूक्रेनी मंत्री?
Tue, 11 Apr 2023 07:20 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Tue, 11 Apr 2023 07:20 PM IST
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यूक्रेन की उप विदेश मंत्री एमिन झापरोवा की भारत यात्रा
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विस्तार
यूक्रेन की उप विदेश मंत्री एमिन झापरोवा चार दिन की भारत यात्रा पर आई हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद यह पहली बार है जब कोई यूक्रेनी नेता भारत के दौरे पर है। इससे पहले, उन्होंने एक बयान में भारत की तारीफ में कसीदे पढ़े। उन्होंने कहा कि यूक्रेन का समर्थन करना ही सच्चे विश्वगुरु के लिए एकलौता सही विकल्प है।कौन हैं एमिन झापरोवा? उनके भारत दौरे का कार्यक्रम क्या है? भारत दौरे का एजेंडा क्या है और क्यों अहम है? भारत का रूस-यूक्रेन युद्ध में क्या रुख रहा है?
यूक्रेन की उप विदेश मंत्री एमिन झापरोवा
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कौन हैं एमिन झापरोवा?
एमिन झापरोवा वर्तमान में यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की की सरकार में पहली उप विदेश मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। 39 वर्षीय झापरोवा राजनीति में प्रवेश करने से पहले एक पत्रकार थीं। 2011 और 2015 के बीच, उन्होंने जमान समाचार कार्यक्रम के उप प्रधान संपादक और क्रीमियन चैनल एटीआर पर कई अन्य प्रोग्राम को होस्ट किया है। उन्होंने रेडियो फ्री यूरोप/रेडियो लिबर्टी के लिए एक स्वतंत्र पत्रकार के रूप में भी काम किया।
2015 में, उन्हें क्रीमिया पर सूचना नीति मंत्री के सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया था। 10 जून 2020 से वह यूक्रेन की पहली उप विदेश मंत्री के रूप में सेवा दे रही हैं। वह यूनेस्को के लिए यूक्रेन के राष्ट्रीय आयोग की अध्यक्ष भी हैं।
एमिन झापरोवा वर्तमान में यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की की सरकार में पहली उप विदेश मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। 39 वर्षीय झापरोवा राजनीति में प्रवेश करने से पहले एक पत्रकार थीं। 2011 और 2015 के बीच, उन्होंने जमान समाचार कार्यक्रम के उप प्रधान संपादक और क्रीमियन चैनल एटीआर पर कई अन्य प्रोग्राम को होस्ट किया है। उन्होंने रेडियो फ्री यूरोप/रेडियो लिबर्टी के लिए एक स्वतंत्र पत्रकार के रूप में भी काम किया।
2015 में, उन्हें क्रीमिया पर सूचना नीति मंत्री के सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया था। 10 जून 2020 से वह यूक्रेन की पहली उप विदेश मंत्री के रूप में सेवा दे रही हैं। वह यूनेस्को के लिए यूक्रेन के राष्ट्रीय आयोग की अध्यक्ष भी हैं।
उनके भारत दौरे का कार्यक्रम क्या है?
एमिन झापरोवा 9 से 12 अप्रैल, 2023 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। यात्रा के दौरान झापरोवा का विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) संजय वर्मा, विदेश और संस्कृति राज्यमंत्री मीनाक्षी लेखी और उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार विक्रम मिस्री से मिलने का कार्यक्रम था।
एमिन झापरोवा 9 से 12 अप्रैल, 2023 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। यात्रा के दौरान झापरोवा का विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) संजय वर्मा, विदेश और संस्कृति राज्यमंत्री मीनाक्षी लेखी और उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार विक्रम मिस्री से मिलने का कार्यक्रम था।
भारत दौरे का एजेंडा क्या है और क्यों अहम है?
यूक्रेन की उप विदेश मंत्री एमिन झापरोवा की पिछले साल फरवरी में शुरू हुए रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यह पहली आधिकारिक यात्रा है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह आपसी समझ और हितों को आगे बढ़ाने का अवसर है। भारत यूक्रेन के साथ मधुर और मैत्रीपूर्ण संबंध और बहुमुखी सहयोग साझा करता है। राजनयिक संबंध स्थापित करने के पिछले 30 वर्षों में, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग ने व्यापार, शिक्षा, संस्कृति और रक्षा के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
यूक्रेन की उप विदेश मंत्री एमिन झापरोवा की पिछले साल फरवरी में शुरू हुए रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यह पहली आधिकारिक यात्रा है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह आपसी समझ और हितों को आगे बढ़ाने का अवसर है। भारत यूक्रेन के साथ मधुर और मैत्रीपूर्ण संबंध और बहुमुखी सहयोग साझा करता है। राजनयिक संबंध स्थापित करने के पिछले 30 वर्षों में, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग ने व्यापार, शिक्षा, संस्कृति और रक्षा के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
यूक्रेन की उप विदेश मंत्री एमिन झापरोवा
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दौरे में अब तक क्या-क्या हुआ?
तय कार्य्रक्रम के मुताबिक, दौरे के पहले दिन उन्होंने नई दिल्ली में विदेश सचिव (पश्चिम) संजय वर्मा के साथ बैठक की। संजय वर्मा को यूक्रेन के जमीनी हालात की जानकारी देने के बाद संवाददाताओं से संक्षिप्त बातचीत में झपारोवा ने कहा, उन्होंने भारतीय पक्ष को बताया है कि उनका देश रूस के अकारण हमले का सामना करने के लिए किस तरह से संघर्ष कर रहा है। उन्होंने राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के शांति फॉर्मूले और अनाज के लिए शुरू की गई पहल में भारत को भी शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि बातचीत में भारत का होना महत्वपूर्ण है।
अपने दौरे के तीसरे दिन उन्होंने विदेश और संस्कृति राज्यमंत्री मीनाक्षी लेखी से मुलाकात की। उन्होंने एक बयान में कहा कि मंत्री लेखी के साथ एक उपयोगी बैठक हुई। अकारण आक्रामकता से लड़ने के लिए यूक्रेन के प्रयासों पर मंत्री को जानकारी दी। विशेष संस्कृति में विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने पर चर्चा की।
तय कार्य्रक्रम के मुताबिक, दौरे के पहले दिन उन्होंने नई दिल्ली में विदेश सचिव (पश्चिम) संजय वर्मा के साथ बैठक की। संजय वर्मा को यूक्रेन के जमीनी हालात की जानकारी देने के बाद संवाददाताओं से संक्षिप्त बातचीत में झपारोवा ने कहा, उन्होंने भारतीय पक्ष को बताया है कि उनका देश रूस के अकारण हमले का सामना करने के लिए किस तरह से संघर्ष कर रहा है। उन्होंने राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के शांति फॉर्मूले और अनाज के लिए शुरू की गई पहल में भारत को भी शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि बातचीत में भारत का होना महत्वपूर्ण है।
अपने दौरे के तीसरे दिन उन्होंने विदेश और संस्कृति राज्यमंत्री मीनाक्षी लेखी से मुलाकात की। उन्होंने एक बयान में कहा कि मंत्री लेखी के साथ एक उपयोगी बैठक हुई। अकारण आक्रामकता से लड़ने के लिए यूक्रेन के प्रयासों पर मंत्री को जानकारी दी। विशेष संस्कृति में विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने पर चर्चा की।
यूक्रेन की उप विदेश मंत्री एमिन झापरोवा
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भारत पर झपारोवा ने क्या कहा?
यूक्रेन-रूस संघर्ष को सुलझाने में भारत की भूमिका के सवाल पर झपारोवा ने कहा, जी20 के अध्यक्ष देश के रूप में, वैश्विक दक्षिण के नेता के रूप में, हम वैश्विक मुद्दों, चुनौतियों, आर्थिक चुनौतियों, ऊर्जा चुनौतियों और परमाणु चुनौतियों के समाधान में भारत की बड़ी भूमिका चाहते हैं। रूस के साथ भारत के ऊर्जा संबंधों का उल्लेख करते हुए झपारोवा ने कहा, यूक्रेन अन्य देशों के साथ अपने आर्थिक संबंधों पर भारत को निर्देश देने की स्थिति में नहीं है। हमें लगता है कि भारत को ऊर्जा के साथ ही सैन्य और राजनीतिक संबंधों में विविधता लाने में व्यावहारिक होना चाहिए।
पीएम मोदी का स्वागत करने के लिए उत्सुक
झपारोवा ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी को यूक्रेन आने का न्योता पहले से ही दिया गया है। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने भी भारतीय प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया है। उन्होंने कहा कि हम भारत के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना चाहते हैं। झपारोवा ने कहा, हम अपने देश में पीएम मोदी का स्वागत करने लेकर उत्सुक हैं। बता दें कि रूस-यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद से ही प्रधानमंत्री मोदी वैश्विक मंचों पर कह चुके हैं कि यह दौर जंग का नहीं है। इस जंग का असर पूरी दुनिया पर देखने को मिला है। खासकर वैश्विक आपूर्ति चेन बाधित हाेने से वैश्विक कारोबार प्रभावित हुआ है।
यूक्रेन-रूस संघर्ष को सुलझाने में भारत की भूमिका के सवाल पर झपारोवा ने कहा, जी20 के अध्यक्ष देश के रूप में, वैश्विक दक्षिण के नेता के रूप में, हम वैश्विक मुद्दों, चुनौतियों, आर्थिक चुनौतियों, ऊर्जा चुनौतियों और परमाणु चुनौतियों के समाधान में भारत की बड़ी भूमिका चाहते हैं। रूस के साथ भारत के ऊर्जा संबंधों का उल्लेख करते हुए झपारोवा ने कहा, यूक्रेन अन्य देशों के साथ अपने आर्थिक संबंधों पर भारत को निर्देश देने की स्थिति में नहीं है। हमें लगता है कि भारत को ऊर्जा के साथ ही सैन्य और राजनीतिक संबंधों में विविधता लाने में व्यावहारिक होना चाहिए।
पीएम मोदी का स्वागत करने के लिए उत्सुक
झपारोवा ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी को यूक्रेन आने का न्योता पहले से ही दिया गया है। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने भी भारतीय प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया है। उन्होंने कहा कि हम भारत के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना चाहते हैं। झपारोवा ने कहा, हम अपने देश में पीएम मोदी का स्वागत करने लेकर उत्सुक हैं। बता दें कि रूस-यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद से ही प्रधानमंत्री मोदी वैश्विक मंचों पर कह चुके हैं कि यह दौर जंग का नहीं है। इस जंग का असर पूरी दुनिया पर देखने को मिला है। खासकर वैश्विक आपूर्ति चेन बाधित हाेने से वैश्विक कारोबार प्रभावित हुआ है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
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भारत का रूस-यूक्रेन युद्ध में क्या रुख रहा है?
युद्ध शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ-साथ यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की से कई बार बात की है, और भारत ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि कूटनीति और बातचीत ही संघर्ष को हल करने का एकमात्र तरीका है।
युद्ध शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ-साथ यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की से कई बार बात की है, और भारत ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि कूटनीति और बातचीत ही संघर्ष को हल करने का एकमात्र तरीका है।