Elon Musk offer to buy Twitter: ट्विटर खरीदने के मुद्दे पर फिर पलटे एलन मस्क, लेकिन और चारा ही क्या था?
Elon Musk offer to buy Twitter: मस्क ने ट्विटर को 44 बिलियन डॉलर में खरीदने के लिए बाध्यकारी करार किया था। विधि विशेषज्ञों का कहना है कि यह करार करने के बाद उनके इसे न खरीदने के फैसले के डेलावेयर अदालत में टिकने की गुंजाइश नहीं थी...
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ट्विटर को खरीदने का प्रस्ताव देने के बाद उससे मुकरने के बाद अरबपति कारोबारी एलन मस्क के सामने गंभीर कानूनी चुनौती थी। अमेरिका के डेलावेयर में चल रहे मुकदमे में उनका पक्ष आरंभ से ही कमजोर माना जा रहा था। केस हारने पर मस्क के लिए ज्यादा बड़ी समस्या खड़ी होती। विशेषज्ञों के मुताबिक इसीलिए मस्क अब फिर से 44 बिलियन डॉलर में माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर को खरीदने के लिए आगे आए हैं।
मस्क ने ट्विटर को 44 बिलियन डॉलर में खरीदने के लिए बाध्यकारी करार किया था। विधि विशेषज्ञों का कहना है कि यह करार करने के बाद उनके इसे न खरीदने के फैसले के डेलावेयर अदालत में टिकने की गुंजाइश नहीं थी। ट्विटर का मुख्यालय डेलावेयर में ही है, जहां उसके मैनेजमेंट ने मुकरने के बाद मस्क पर मुकदमा दायर किया था।
मस्क के ट्विटर को खरीदने का फिर से इरादा जताने के बाद ट्विटर मैनेजमेंट ने कहा है कि वह इस सौदे को 54.20 डॉलर प्रति शेयर की दर से पूरा करना चाहता है। अमेरिका स्थित बॉस्टन लॉ कॉलेज में प्रोफेसर ब्रायन क्विनन के मुताबिक कोर्ट में हुई आरंभिक सुनवाई के दौरान ऐसा कोई ठोस दस्तावेज सामने नहीं आया, जिसे इस बात का सबूत माना जाए कि ट्विटर ने कोई ऐसी जानकारी छिपाई, जिससे उसके कारोबार के मूल्य में कोई ठोस अंतर नजर आता। मस्क ने यही तर्क देकर खरीद करार से पीछे हटने की घोषणा की थी।
क्विनन ने अखबार द गार्जियन से कहा कि मस्क ने जो पेशकश की थी, उसे ट्विटर मैनेजमेंट ने स्वीकार कर लिया था। अब भी वह उसी पेशकश के आधार पर सौदा पूरा करना चाहता है। मैनेजमेंट की राय है कि हाल के महीनों में मस्क ने जैसा व्यवहार किया, उससे ट्विटर और मस्क के बीच आपसी विश्वास टूट गया है। मस्क ने ट्विटर को खरीदने की पेशकश करने के बाद यह संकेत देना शुरू किया था कि उनका इस माइक्रोब्लॉगिंग साइट से कोई लगाव नहीं है।
अमेरिकी एनालिसिस फर्म फॉरेस्टर में रिसर्च डायरेक्टर माइक प्राउल्क्स ने कहा है- ‘अगर मस्क ट्विटर को खरीद लेते हैं, उनका सबसे पहला मिशन इस कंपनी के कर्मचारियों का भरोसा जीतना होना चाहिए। ऐसा करना आसान नहीं होगा, क्योंकि उन्हें शुरुआत विश्वास के गहरे संकट के बीच से करनी होगी। अगर कर्मचारी मनोयोग से काम ना करें, तो ट्विटर का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।’
टीकाकारों ने कहा है कि ट्विटर को लेकर मस्क की क्या योजनाएं हैं, उनकी अब फिर से पड़ताल शुरू होगी। ऐसी आशंका है कि खुद को ‘अभिव्यक्ति की पूर्ण आजादी का योद्धा’ मानने वाले मस्क ट्विटर के भीतर संदेशों की जांच-परख के सिस्टम को खत्म कर देंगे। ट्विटर को खरीदने पर दोबारा राजी होने के बाद मस्क ने इस मामले में अपना स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि वे ‘ऐसे सेंसरशिप के खिलाफ हैं, जो कानून के खिलाफ’ हो।
लेकिन सोशल मीडिया को लेकर विभिन्न देशों में कानून सख्त किए जा रहे हैं। ब्रिटेन में ऐसा बिल पेश हो चुका है, जबकि यूरोपियन यूनियन में भी ऐसी तैयारी है। इसके बीच मस्क ट्विटर को कैसे चलाएंगे, यह सवाल इस समय सबके दिमाग में है।