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तैयारी: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बना सकते हैं एलन मस्क, कहा- गंभीरता से कर रहे विचार
Mon, 28 Mar 2022 06:31 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, वाशिंगटन।
एजेंसी, वाशिंगटन।
Published by: देव कश्यप
Updated Mon, 28 Mar 2022 06:31 AM IST
सार
ट्विटर पर 2018 से मस्क के संपर्क में रहने वाले प्रणय पटोले ने उनसे पूछा था कि क्या वे एक नया ऑनलाइन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बनाने पर विचार करेंगे? इस प्लेटफॉर्म को ओपन सोर्स एल्गोरिदम से बनाकर, बोलने की स्वतंत्रता दी जाए और इस स्वतंत्रता को प्राथमिकता मिले। जहां तक हो सके इस प्लेटफॉर्म को प्रोपेगेंडा फैलाने का माध्यम बनने से भी बचाएं। आज ऐसे प्लेटफॉर्म की जरूरत है। इस पर मस्क ने सहमति जताते हुए इसे बारे में गंभीरता से विचार करने की जानकारी दी।
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एलन मस्क।
- फोटो : Facebook/ElonMusk
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विस्तार
दुनिया के सबसे अमीर उद्यमियों में शामिल एलन मस्क ने बताया कि वे नया सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बनाने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। भारतीय आईटी कंपनी में सेवा दे रहे प्रणय पटोले के सवाल पर उन्होंने यह जवाब सोशल मीडिया पर दिया।
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ट्विटर पर 2018 से मस्क के संपर्क में रहने वाले पटोले ने उनसे पूछा था कि ‘क्या वे एक नया ऑनलाइन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बनाने पर विचार करेंगे? इस प्लेटफॉर्म को ओपन सोर्स एल्गोरिदम से बनाकर, बोलने की स्वतंत्रता दी जाए और इस स्वतंत्रता को प्राथमिकता मिले। जहां तक हो सके इस प्लेटफॉर्म को प्रोपेगेंडा फैलाने का माध्यम बनने से भी बचाएं। आज ऐसे प्लेटफॉर्म की जरूरत है।’
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मस्क ने सहमति जताते हुए इसे बारे में गंभीरता से विचार करने की जानकारी दी। अगर वे नया प्लेटफॉर्म बनाते हैं तो खुद को अभिव्यक्ति व बोलने की स्वतंत्रता का मठाधीश बताने वाली मौजूदा कंपनियों को चुनौती मिल सकती है। ट्विटर, मेटा कंपनी के फेसबुक व इंस्टाग्राम, अल्फाबेट कंपनी के गूगल व यूट्यूब आदि इनमें प्रमुख हैं।
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70 फीसदी बोले, ट्विटर बोलने की आजादी के उसूलों के खिलाफ काम करता है
ट्विटर पर मस्क ने 25 मार्च को एक चुनाव में पूछा कि क्या ट्विटर लोकतंत्र के लिए जरूरी बोलने की आजादी के उसूलों का पूरी तरह पालन करता है? करीब 21 लाख लोगों ने इस पर वोट दिया। 70 प्रतिशत से ज्यादा ने कहा कि ट्विटर ऐसा नहीं करता।
परिणाम के लिए चेताया था
मस्क ने चेताया था कि चुनाव के महत्वपूर्ण परिणाम होंगे, इसलिए सावधानी से वोट करें। परिणाम आने पर कहा कि ट्विटर एक जन-पंचायत (टाउन-स्क्वायर) स्थल जैसा है। अगर बोलने की आजादी के उसूलों का पालन नहीं हो रहा है, तो यह लोकतंत्र के लिए घातक है।