ब्रिटेन: भारतीय मूल की अदिति ने मेडिकल इतिहास में दर्ज कराया नाम, इस उपलब्धि के लिए हुई सराहना
अदिति एक दुर्लभ आनुवंशिक स्थिति से पीड़ित है, इसके इलाज के लिए उसकी मां दिव्या की अस्थि मज्जा से स्टेम सेल का प्रत्यारोपण किया गया था। दिव्या ने अपनी बेटी को अपनी किडनी भी दान की थी।
विस्तार
ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) के इतिहास में आठ साल की भारतीय मूल की लड़की अदिति शंकर ने शुक्रवार को नाम दर्ज करा लिया। उसे ऐसा पहला व्यक्ति घोषित किया गया, जिसका प्रत्यारोपण आजीवन दवाओं की आवश्यकता के बिना किया गया, क्योंकि डॉक्टरों ने उसकी प्रतिरक्षा प्रणाली को फिर से पुनर्जीवित कर दिया है।
अदिति एक दुर्लभ आनुवंशिक स्थिति से पीड़ित है, इसके इलाज के लिए उसकी मां दिव्या की अस्थि मज्जा से स्टेम सेल का प्रत्यारोपण किया गया था। दिव्या ने अपनी बेटी को अपनी किडनी भी दान की थी। उसका इलाज लंदन में ग्रेट ऑरमंड स्ट्रीट हॉस्पिटल (जीओएसएच) में किया गया। अदिति की मिली नई किडनी को उसके शरीर को अस्वीकार करने से रोकने के लिए इम्यूनोसप्रेसेन्ट दवाओं की निरंतर आवश्यकता नहीं पड़ेगी। अदिति के इलाज में शामिल प्रोफेसर स्टीफन मार्क्स ने कहा, यह पहली बार है जब मैंने 25 वर्षों में किसी ऐसे व्यक्ति का इलाज किया है, जिसे किडनी प्रत्यारोपण के बाद इम्यूनोसप्रेशन की आवश्यकता नहीं है। मार्क्स यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन ग्रेट ऑरमंड स्ट्रीट इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ में पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी एंड ट्रांसप्लांटेशन के प्रोफेसर हैं। उन्होंने कहा, हमें उम्मीद है कि अदिति पर किया गया हमारा शोध उसके जैसे बच्चों को अधिक सफल किडनी प्रत्यारोपण के अवसर प्रदान करेगा और सर्जरी के बाद मरीज की दवाओं पर निर्भरता को कम करेगा।