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कांगो में इबोला का कहर तेज: 900 के पार पहुंचे संदिग्ध मामले, दुनिया के लिए क्यों चिंता बन रहा है ये वायरस?

Mon, 25 May 2026 02:35 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, किंशासा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, किंशासा Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Mon, 25 May 2026 02:35 AM IST
सार

Ebola Outbreak Intensifies: कांगो में ईबोला वायरस का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है और संदिग्ध मामलों की संख्या 900 के पार पहुंच गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे कांगो के लिए बड़ा खतरा बताया है। भारत सरकार ने कांगो, युगांडा और आसपास के देशों की यात्रा को लेकर एडवाइजरी जारी की है। फिलहाल भारत में ईबोला का कोई सक्रिय मामला नहीं है, लेकिन सरकार ने सतर्क रहने की सलाह दी है।

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Ebola Outbreak Intensifies Congo Suspected Cases Surpass 900 Why Virus Becoming Global Concern
इबोला का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI

विस्तार

अफ्रीकी देश कांगो में इबोला वायरस का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। देश के पूर्वी हिस्से में फैले संक्रमण ने अब गंभीर रूप ले लिया है। कांगो सरकार के मुताबिक संदिग्ध इबोला मामलों की संख्या 900 के पार पहुंच गई है। लगातार बढ़ते संक्रमण और मौतों ने स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस प्रकोप को कांगो के लिए बहुत बड़ा खतरा बताया है। हालांकि वैश्विक स्तर पर संक्रमण फैलने का जोखिम अभी कम माना गया है। इस बीच भारत सरकार ने भी अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर सतर्क रहने की सलाह दी है।

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कांगो में इबोला का प्रकोप कितना गंभीर हो गया है?
कांगो के संचार मंत्रालय ने बताया कि देश में अब तक 904 संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जबकि 119 संदिग्ध मौतें दर्ज की गई हैं। इससे पहले 700 से ज्यादा मामलों और 170 से अधिक मौतों की जानकारी दी गई थी। संक्रमण का सबसे ज्यादा असर इतुरी प्रांत में देखा जा रहा है। स्वास्थ्य एजेंसियों का कहना है कि मौजूदा प्रकोप के लिए बंडिबुग्यो स्ट्रेन जिम्मेदार माना जा रहा है। यह इबोला का खतरनाक प्रकार है और फिलहाल इसके लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन या खास दवा उपलब्ध नहीं है। इसी वजह से हालात को बेहद गंभीर माना जा रहा है।
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दुनिया के लिए क्यों चिंता बन रहा है इबोला?

  • कांगो में तेजी से बढ़ते इबोला मामलों ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते संक्रमण नहीं रोका गया तो यह दूसरे देशों तक फैल सकता है।
  • बंडिबुग्यो स्ट्रेन के खिलाफ अभी कोई प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
  • कई देशों ने अफ्रीकी देशों की यात्रा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है।
  • इबोला ने फिर दिखाया कि संक्रामक बीमारियां तेजी से वैश्विक खतरा बन सकती हैं।


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भारतीयों के लिए क्या एडवाइजरी जारी की गई है?
भारत सरकार ने कांगो, युगांडा और आसपास के देशों की यात्रा को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दी है। एडवाइजरी में कहा गया है कि दक्षिण सूडान जैसे पड़ोसी देशों में भी संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में भारतीय नागरिकों को इन देशों की यात्रा टालने की सलाह दी गई है। जो भारतीय फिलहाल इन देशों में रह रहे हैं, उन्हें स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा गया है। सरकार ने लोगों से अतिरिक्त सावधानी बरतने और भीड़भाड़ वाले इलाकों से बचने की अपील की है।

भारत में अब तक इबोला का कितना असर देखा गया?
भारत में अब तक इबोला का सिर्फ एक मामला सामने आया है। साल 2014 में पश्चिम अफ्रीका में फैले इबोला संक्रमण के दौरान लाइबेरिया से लौटे 26 वर्षीय भारतीय नागरिक में यह वायरस पाया गया था। एयरपोर्ट स्क्रीनिंग के दौरान उसकी पहचान हुई थी। बाद में उसे आइसोलेट कर सफलतापूर्वक इलाज किया गया और संक्रमण को फैलने से रोक लिया गया। इसके बाद भारत में इबोला का कोई दूसरा मामला सामने नहीं आया। फिलहाल भारत में इबोला संक्रमण का कोई सक्रिय मामला दर्ज नहीं है।

आखिर क्या है इबोला वायरस?
इबोला एक बेहद खतरनाक और कई बार जानलेवा वायरस है। यह संक्रमित जानवरों से इंसानों में फैलता है और फिर संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से तेजी से दूसरे लोगों तक पहुंच सकता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, उल्टी, कमजोरी, शरीर में दर्द और आंतरिक रक्तस्राव शामिल हैं। गंभीर मामलों में मरीज की मौत भी हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने संक्रमण रोकने के लिए साफ-सफाई, संक्रमित लोगों से दूरी और मेडिकल सुरक्षा उपायों को जरूरी बताया है। इस वायरस का नाम कांगो में बहने वाली इबोला नदी के नाम पर रखा गया था, जहां पहली बार इस बीमारी की पहचान हुई थी।

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