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तपने लगी धरती: भीषण गर्मी ने तोड़ा कृषि चक्र, 100 करोड़ लोगों पर संकट; संयुक्त राष्ट्र ने चेताया

Thu, 23 Apr 2026 04:45 AM IST
Nirmal Kant एजेंसी, रोम।
एजेंसी, रोम। Published by: Nirmal Kant Updated Thu, 23 Apr 2026 04:45 AM IST
सार

भीषण गर्मी ने दुनिया की कृषि व्यवस्था को गंभीर संकट की ओर धकेल दिया है, जिससे खाद्य उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने लगी है और बड़ी आबादी की आजीविका पर खतरा बढ़ गया है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में इसे खेती, मछली पालन और वानिकी के लिए बड़ा जोखिम बताया गया है। पढ़िए रिपोर्ट-

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earth heating extreme heat disrupts agriculture 1 billion people at risk un warns
भीषण गर्मी - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

भीषण गर्मी वैश्विक कृषि प्रणालियों को तबाही की कगार पर धकेल रही हैं। इससे वैश्विक खाद्य तंत्र बिगड़ने लगा है। इसके चलते दुनियाभर में 100 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका और उनके स्वास्थ्य पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।
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संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अत्यधिक गर्मी अब केवल मौसम ही नहीं, बल्कि खेती, मछली पालन और वानिकी के लिए एक अस्तित्वगत खतरा बन गई है। एफएओ के जलवायु परिवर्तन कार्यालय के प्रमुख कावेह जाहेदी ने कहा, भीषण गर्मी यह तय कर रही है कि किसान और मछुआरे क्या उगा सकते हैं और कब काम कर सकते हैं। एजेंसी
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समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र भी खतरे में
गर्मी का असर केवल जमीन तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में दुनिया के 91 फीसदी महासागरों ने कम से कम एक समुद्री लू का सामना किया। इससे पानी में ऑक्सीजन का स्तर कम हो रहा है, जिससे मछलियों का अस्तित्व खतरे में है और समुद्री खाद्य प्रणालियां चरमरा रही हैं।
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प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों की आवश्यकता
कृषि से संबंधित रिपोर्ट में बताया गया कि किसानों को मौसम का सटीक डेटा समय पर मिलना चाहिए ताकि वे बुवाई और कटाई के समय में बदलाव कर सकें। अगर तापमान 1.5 डिग्री के बजाय 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ता है, तो भीषण गर्मी की तीव्रता और आवृत्ति चार गुना तक बढ़ सकती है।

चार प्रमुख फसलों पर पड़ता है असर
वैश्विक औसत तापमान में प्रत्येक एक डिग्री की वृद्धि से चार प्रमुख फसलों मक्का, चावल, सोयाबीन और गेहूं की पैदावार में लगभग 6% की कमी आती है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 अब तक के तीन सबसे गर्म वर्षों में से एक रहा है। जब तापमान 30 डिग्री की सीमा को पार कर जाता है, तो प्रमुख फसलों की पैदावार में तेजी से गिरावट आने लगती है।

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