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Kyrgyztan: SCO की बैठक में शामिल हुए जयशंकर, बोले- संगठन में शामिल देशों का और करीब आना जरूरी

Thu, 26 Oct 2023 03:26 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बिश्केक
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बिश्केक Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 26 Oct 2023 03:26 PM IST
सार

जयशंकर ने एससीओ में शामिल देशों को और करीब आने का संदेश देते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया जिस तरह आर्थिक मंदी, टूटी हुई सप्लाई चेन, खाद्य और ऊर्जा असुरक्षा की समस्या से जूझ रही है। ऐसे समय में एससीओ के सहयोगी देशों को साथ आना होगा। 

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EAM S Jaishankar in Bishkek Kyrgyztan for SCO head of Governments meeting news and updates
विदेश मंत्री एस जयशंकर। - फोटो : ANI

विस्तार

विदेश मंत्री एस जयशंकर गुरुवार को किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की सरकार प्रमुखों की बैठक में हिस्सा लिया है। यहां उन्होंने एससीओ में शामिल देशों को और करीब आने का संदेश देते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया जिस तरह आर्थिक मंदी, टूटी हुई सप्लाई चेन, खाद्य और ऊर्जा असुरक्षा की समस्या से जूझ रही है। ऐसे समय में एससीओ के सहयोगी देशों को साथ आना होगा। इस लिहाज से मध्य एशियाई देशों की अहमियत आज और बढ़ जाती है। 
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चीन पर परोक्ष रूप से निशाना
जयशंकर ने कहा, "भारत एससीओ के साथी देशों के साझा तौर पर फायदेमंद और आर्थिक तौर पर व्यवहार्य चीजों पर कार्य करना चाहता है। हम क्षेत्र में ही व्यापार को बेहतर करना चाहते हैं, जिसके लिए हमें अच्छी कनेक्टिविटी और इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है। भारत ने इन चीजों को अपनी विकास यात्रा में अहमियत दी है। साथ ही कनेक्टिविटी बढ़ाने के दौरान दूसरों की क्षेत्रीय अखंडता और स्वायत्ता का भी सम्मान किया गया है।
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गौरतलब है कि चीन ने पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) में अरबों डॉलर का निवेश किया है। भारत ने पाकिस्तान में इस परियोजना का विरोध किया है, क्योंकि यह गलियारा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजर रहा है। इसे लेकर भारत ने कई बार चीन के सामने आपत्ति जताई है।
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चीनी कर्ज को लेकर भी बोला हमला
विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘ग्लोबल साउथ (अविकसित देशों) को अपारदर्शी पहलों से उत्पन्न होने वाले अव्यवहार्य ऋण के बोझ तले नहीं दबाया जाना चाहिए। भारत-मध्य एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईसी) और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (आईएनएसटीसी) समृद्धि प्रवर्तक बन सकते हैं।’’
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