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उल्टा पड़ गया चीन से बात करने का बाइडन का दांव, अलास्का वार्ता शुरू होने से पहले ही पटरी से उतरी!
Fri, 19 Mar 2021 04:13 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, एंकरेज (अलास्का)
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, एंकरेज (अलास्का)
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Fri, 19 Mar 2021 04:13 PM IST
सार
अलास्का के एंकरेज शहर में बातचीत शुरू होने से ठीक पहले मीडिया के सामने ब्लिंकेन का सख्त रुख जारी रहा। अब इस पर कयास लगाए जा रहे हैं कि जो बात सीधी बातचीत में बंद कमरे के भीतर चीनी नेताओं से कही जा सकती थी, उसे बातचीत शुरू होने से पहले ही ब्लिंकेन ने कहने का क्यों फैसला किया...
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अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन
- फोटो : Agency
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विस्तार
चीन के उच्च राजनयिकों को अलास्का बुलाने और अमेरिका से चीन के जारी तनाव पर सीधे बात करने का जो बाइडन प्रशासन का दांव उलटा पड़ गया है। बहुप्रतीक्षित दो दिन की वार्ता शुरुआती पलों से ही पटरी से उतर गई। साफ तौर पर ऐसा अमेरिका के सार्वजनिक रूप से बेहद सख्त और तीखा रुख अपना लेने के कारण हुआ है। वैसे ऐसा होने की आशंका अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन और रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन की जापान यात्रा के दौरान ही पैदा हो गई थी, जब दोनों देशों ने चीन के खिलाफ बेहद तीखा बयान जारी किया था।
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अलास्का के एंकरेज शहर में बातचीत शुरू होने से ठीक पहले मीडिया के सामने ब्लिंकेन का सख्त रुख जारी रहा। अब इस पर कयास लगाए जा रहे हैं कि जो बात सीधी बातचीत में बंद कमरे के भीतर चीनी नेताओं से कही जा सकती थी, उसे बातचीत शुरू होने से पहले ही ब्लिंकेन ने कहने का क्यों फैसला किया। विश्लेषकों के मुताबिक ऐसा संभवतया अमेरिकी जनता को संदेश देने के लिए किया गया, जहां दोनों प्रमुख पार्टियों के बीच चीन के विरोध की होड़ लगी हुई है।
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लेकिन ब्लिंकेन की बातों का चीनी नेताओं ने उससे भी ज्यादा तल्ख तरीके से जवाब दिया। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने जवाब देने की शुरुआत यह कहते हुए की कि जिस लहजे में बात की गई है, वह अपने मेहमानों से व्यवहार करने का कोई तरीका नहीं है। लगे हाथ उन्होंने अमेरिका को अपनी समस्याओं पर ध्यान देने की सलाह भी दे दी और यह भी कह डाला कि अमेरिका दुनिया का नेता नहीं है- वह जो कहता है, सिर्फ अपनी तरफ से कहता है। ब्लिंकेन ने कहा था कि चीन बढ़-चढ़ कर बातें करता है ताकि दुनिया का ध्यान खींच सके। इसके जवाब में वांग ने कहा कि अमेरिका दादा की तरह व्यवहार कर रहा है।
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ब्लिंकेन और अमेरिकी राष्ट्रपति के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवान ने बैठक शुरू होने के पहले लगभग पांच मिनट तक मीडिया को संबोधित किया था। चीनी नेताओं वांग यी और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो के सदस्य यांग जिची ने इसके जवाब में 16 मिनट तक मीडिया के सामने अपनी बातें कहीं। इससे ब्लिंकेन इतने व्यग्र हुए कि जब मीडिया की टीम जाने लगी तो प्रोटोकॉल तोड़ते हुए उसे रोक कर उन्होंने फिर से चीनी नेताओं की बातों का जवाब दिया।
ब्लिंकेन ने अपनी शुरुआती टिप्पणी में कहा था कि चीन नियम आधारित विश्व व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर रहा है। अमेरिका इस व्यवस्था की रक्षा करेगा, जिसके बिना दुनिया अधिक हिंसक जगह बन जाएगी। उन्होंने कहा कि शिनजियांग, हांगकांग और ताइवान में चीन के व्यवहार, अमेरिका पर उसके साइबर हमले, और अमेरिका के सहयोगी देशों के प्रति उसकी आर्थिक जोर-जबरदस्ती चीन का आतंरिक मामला नहीं हैं। ब्लिंकेन ने कहा कि चीन जिसकी लाठी उसकी भैंस की नीति पर चल रहा है।
इन बातों का यांग जिची ने उतने ही तल्ख लहजे में जवाब दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका चीन के अंदरूनी मामलों में दखल ना दे। कहा कि जहां तक साइबर हमलों की बात है, तो उसका चैंपियन अमेरिका ही है। फिर उन्होंने अमेरिका की अंदरूनी स्थिरता और मानव अधिकार के मामले में उसके अपने रिकॉर्ड पर सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा- ‘अमेरिका के लिए महत्त्वपूर्ण है कि वह अपनी छवि सुधारे और दुनिया में लोकतंत्र को आगे बढ़ाने के मिशन को छोड़ दे। अमेरिका में ऐसे बहुत से लोग हैं जिनका अपने देश के लोकतंत्र में मामूली विश्वास ही बचा है।’
इस अप्रत्याशित जवाबी हमले से सकते में आए ब्लिंकेन ने मीडियाकर्मियों को रोक कर तुरंत जवाब दिया। इस दौरान वे बचाव की मुद्रा में नजर आए। कहा कि अमेरिका खुद को परफेक्ट (पूर्णतः दोषमुक्त) नहीं मानता। अमेरिका में कमियां हैं, लेकिन यही अमेरिका की खूबी है कि वह इनको मान कर उन्हें दूर करने की कोशिश करता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विदेश मंत्री बनने के बाद उन्होंने करीब 100 देशों के विदेश मंत्रियों से बात की है, जिन्होंने इस बात पर संतोष जताया है कि ‘अमेरिका वापस आ गया है।’ जबकि उन्होंने चीन सरकार के कदमों को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
असल बातचीत इस तू तू, मैं मैं के बाद शुरू हुई। लेकिन तब तक माहौल इतना बिगड़ चुका था कि अलास्का वार्ता से कुछ ठोस हासिल होने की उम्मीद शायद ही किसी को बची है। बल्कि आशंका यह है कि इसके बाद दोनों देशों का टकराव और बढ़ सकता है। उससे अमेरिका में जो बाइडन के विरोधियों को यह कहने का मौका मिलेगा कि राष्ट्रपति की विदेश नीति संबंधी पहली अहम पहल ही नाकाम हो गई है। इस बीच अमेरिकी मीडिया की चर्चा के मुताबिक अब बातचीत खत्म होने के बाद दोनों देशों के बीच साझा बयान जारी होने की संभावना नहीं है।