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महंगे हुए ऊर्जा संसाधन: गैस संकट ने बढ़ा दी है पुतिन की हैसियत, दाग रहे हैं यूरोप पर जुबानी गोले

Mon, 25 Oct 2021 07:10 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 25 Oct 2021 07:10 PM IST
सार

जब से गैस महंगी हुई है, कई यूरोपीय देशों में रूस के प्रति गुस्से का माहौल है। पोलैंड ने ईयू के कॉम्पीटिशन कमीशन से मांग की है कि वह रूसी कंपनी गैजप्रोम के खिलाफ जांच शुरू करे। पोलैंड का आरोप है कि गैजप्रोम ने बाजार पर अपने वर्चस्व का दुरुपयोग करते हुए जानबूझ कर गैस की कीमत बढ़ाई है...

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Due to the inflation of natural gas in Europe, Russian President Vladimir Putin got a new opportunity to influence on European countries
व्लादिमीर पुतिन - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

यूरोप में प्राकृतिक गैस की महंगाई की वजह से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यूरोपीय देशों पर अपना प्रभाव जमाने का नया अवसर मिल गया है। फिलहाल इस मामले में रूस पर दबाव डाल सकने में यरोपीय देश नाकाम रहे हैं। जबकि पुतिन ने बीते सप्ताह के अंत में एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए यूरोपियन यूनियन (ईयू) का मखौल उड़ाया। ईयू को उन्होंने एक ऐसा ‘अभागा समूह’ बताया, जिस ‘पूंछ’ फंसी हुई है। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर ईयू के विनियामक नॉर्ड स्ट्रीम-2 पाइपलाइन को मंजूरी दे दें, तो वे यूरोप को अधिक गैस भेजने के लिए तैयार हैं।

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रूसी कंपनी के खिलाफ गुस्सा

जब से गैस महंगी हुई है, कई यूरोपीय देशों में रूस के प्रति गुस्से का माहौल है। पोलैंड ने ईयू के कॉम्पीटिशन कमीशन से मांग की है कि वह रूसी कंपनी गैजप्रोम के खिलाफ जांच शुरू करे। पोलैंड का आरोप है कि गैजप्रोम ने बाजार पर अपने वर्चस्व का दुरुपयोग करते हुए जानबूझ कर गैस की कीमत बढ़ाई है। पोलैंड के प्रधानमंत्री मंत्री मातेउस्ज मोराविकी ने मांग की है कि गैजप्रोम को सबक सिखाया जाना चाहिए।

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पोलैंड की मांग का समर्थन इटली और नीदरलैंड्स ने भी किया है। लेकिन जानकारों का कहना है कि कॉम्पिटिशन कमीशन के लिए गैजप्रोम के खिलाफ कोई कदम उठाना बहुत मुश्किल है। उसने 2015 में इस आरोप की जांच कराई थी कि ये रूसी कंपनी अनुचित कीमत वसूल रही है। लेकिन 2018 में जांच रिपोर्ट में गैजप्रोम को बरी कर दिया गया। गैजप्रोम ने फिर दावा किया है कि वह अनुबंध की शर्तों के मुताबिक गैस की सप्लाई कर रही है। इस दावे को गलत साबित करने के लिए साक्ष्य जुटाना कमीशन के लिए मुश्किल साबित हो सकता है।

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गैस के संकट के गहरे भू-राजनीतिक परिणाम

यूरोपीय आयोग आयोग ने कहा है कि गैस की महंगाई अस्थायी है। यह संभाले जा सकने की सीमा के अंदर है। लेकिन वेबसाइट पॉलिटिको.ईयू की एक खबर के मुताबिक यूरोपियन काउंसिल की एक बैठक में बीते हफ्ते यूरोपीय आयोग के विदेश नीति प्रमुख जोसेप बॉरेल ने स्वीकार किया कि कच्चे तेल और गैस के संकट के गहरे भू-राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने ध्यान दिलाया कि मौजूदा संकट को देखते हुए अमेरिका और कतर ने अधिक तेल और गैस निकालना शुरू किया है। लेकिन कुछ एशियाई देश महंगी कीमत पर उन्हें खरीद रहे हैं, जिससे यूरोप में संकट बना हुआ है।


इस बीच इस संकट का नतीजा यह हुआ है कि यूरोपीय एकता में दरार पड़ने लगी है। हंगरी ने हाल में रूस के साथ गैस खरीदने का 15 साल का एक करार कर लिया है। रूस ने उसे सप्लाई शुरू कर दी है, इसलिए हंगरी मौजूदा संकट से प्रभावित नहीं हुआ है। उधर चेक रिपब्लिक के प्रधानमंत्री आंद्रेज बैबिस ने कहा है कि उनके देश ने हंगरी जैसा ही करार ‘राजनीतिक कारणों’ से नहीं किया। लेकिन वह गलती थी। बैबिस ने यूरोपीय आयोग से कहा है कि वह रूस पर अपनी गैस निर्भरता घटाने की नीति पर फिर से विचार करे।


रूस ने माल्दोवा के लिए गैस की सप्लाई घटा कर एक तिहाई कर दी है। रूस का कहना है कि माल्दोवा ने पहले दी गई गैस की कीमत नहीं चुकाई है। रूस के फैसले की वजह से माल्दोवा में 30 दिन के आपातकाल की घोषणा की गई है। उधर रोमानिया ने रूस से अधिक गैस खरीदने की पहल की है। लेकिन उसका कहना है कि गैजप्रोम ने उसके इस अनुरोध पर अभी कोई जवाब नहीं दिया है। जानकारों का कहना है कि इस संकट के बीच पुतिन रूस की बनी नई हैसियत को जताने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

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