China: उतर नहीं रही है चीनी गुब्बारे से पैदा हुई गरमी, चीन के सोशल मीडिया पर छाई अमेरिकी कार्रवाई
गुब्बारे के कारण अमेरिका और चीन के रिश्तों में तनाव काफी बढ़ गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री इसी वजह से अपनी प्रस्तावित चीन यात्रा स्थगित कर चुके हैं। चीन ने इस पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया में कहा- ‘जी-20 की बाली शिखर बैठक के दौरान दोनों देशों के रिश्तों को स्थिर बनाने की दिशा में जो प्रगति हुई थी, अमेरिका ने उसकी अनदेखी कर दी है।’
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अपने हवाई क्षेत्र में आए चीनी गुब्बारे को मार गिराने की अमेरिका की कार्रवाई को लेकर चीन के सोशल मीडिया पर अभी तक गरमागरम प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। वैसे कुछ गरमी कूटनीतिक मंचों पर भी देखने को मिली है।
चीनी सोशल मीडिया पर जाहिर हुई प्रतिक्रियाओं में कहा गया है कि गुब्बारे को लेकर अमेरिका के राजनेताओं ने जरूरत से ज्यादा तीखी प्रतिक्रिया दिखाई। इनमें मोटे तौर पर चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से दी गई प्रतिक्रिया से इत्तेफाक जताया गया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा था कि वह गुब्बरा मौसम संबंधी अध्ययन करने के लिए छोड़ा गया था, जो भटक कर अमेरिकी वायु क्षेत्र में चला गया। उसने दावा किया कि गुब्बारे का जासूसी से कोई संबंध नहीं था। जबकि अमेरिका में आम राय यही बनी कि चीन ने गुब्बारा जासूसी करने के मकसद से जानबूझ कर भेजा।
गुब्बारे के कारण अमेरिका और चीन के रिश्तों में तनाव काफी बढ़ गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री इसी वजह से अपनी प्रस्तावित चीन यात्रा स्थगित कर चुके हैं। चीन ने इस पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया में कहा- ‘जी-20 की बाली शिखर बैठक के दौरान दोनों देशों के रिश्तों को स्थिर बनाने की दिशा में जो प्रगति हुई थी, अमेरिका ने उसकी अनदेखी कर दी है।’ नवंबर में इंडोनेशिया के बाली में हुई शिखर बैठक के दौरान पहली अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच सीधी बातचीत हुई थी। उसके बाद दोनों देशों का तनाव काफी घटा था। लेकिन अब सूरत पलट गई है।
इस मामले में जारी चीनी विदेश मंत्रालय के बयान को सोशल मीडिया पर सोमवार को सात करोड़ 40 लाख बार देखा गया। उसके साथ ही चीनी सोशल मीडिया यूजर्स ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई। चीन के सरकार समर्थक अखबार ग्लोबल टाइम्स के पूर्व संपादक हू शी जिन माइक्रोब्लॉगिंग साइट वियेबो पर लिखा- ‘चीन के प्रति नफरत से अंधे हो गए अमेरिकी राजनेताओं का सामना चीन को करना पड़ रहा है। उन नेताओं ने अपनी आपसी होड़ को अंतरराष्ट्रीय मंच तक फैला दिया है।’
वैसे कुछ चीनी यूजर्स ने इस पर असंतोष जताया कि चीनी अधिकारियों ने इस बारे में पर्याप्त सूचना नहीं दी है। एक यूजर ने पूछा- ‘उस गुब्बारे का मालिक कौन है? उसे किस मकसद से छोड़ा गया? अगर इसे शुरुआत में ही बता दिया गया होता, उसे मार गिराने की नौबत नहीं आई होती।’
उधर अमेरिका में लगभग आम राय है कि बाइडन प्रशासन ने गुब्बारे को मिसाइल से गिरा कर सही कदम उठाया है। यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन में पब्लिक पॉलिसी के एसोसिएट प्रोफेसर जॉन सिर्योसियारी ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘चीन ने जो आधिकारिक रूप से कहा, वह गले नहीं उतरा है। गुब्बारा संवेदनशील सूचनाएं इकट्ठी करने में सक्षम था या नहीं यह दीगर बात है, लेकिन वह साफ तौर पर अमेरिकी संकल्प की परीक्षा बन कर आया था।’
ब्रिटेन स्थित रिसर्च फर्म एनोडो इकॉनमिक्स ने अनुमान लगाया है कि संभवतः चीन के विभिन्न विभागों में समन्वय न होने की वजह से गुब्बारा भटक कर अमेरिकी वायु क्षेत्र में चला गया। चीन यह अंदाजा लगाने में नाकाम रहा कि गुब्बारे का अमेरिका के साथ उसके रिश्तों पर कितना खराब असर होगा।