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डोनाल्ड ट्रंप विरोधी भावना के कारण पोम्पियो को रद्द करनी पड़ी यूरोप यात्रा
Wed, 13 Jan 2021 07:20 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Wed, 13 Jan 2021 07:20 PM IST
सार
लग्जमबर्ग ने पोम्पियो की मेजबानी करने से मना कर दिया। लग्जमबर्ग एक छोटा सा देश है। उसके इस कदम को ट्रंप प्रशासन और अमेरिका के लिए एक बड़ी बेइज्जती के रूप में देखा गया है...
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अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो
- फोटो : ANI
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विस्तार
अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने अपनी यूरोप यात्रा रद्द कर दी है। यूरोपीय मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक वाशिंगटन में छह जनवरी को कैपिटल हिल (संसद भवन) पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों के हमले के बाद यूरोप में फैली ट्रंप विरोधी भावना के कारण पोम्पियो को ये कदम उठाना पड़ा। कई यूरोपीय नेताओं ने ट्रंप को सीधे तौर पर उस हमले के लिए जिम्मेदार ठहराया था। यूरोपीय मीडिया में भी ये घटना लगातार छायी हुई है और ट्रंप लगातार आलोचनाओं के केंद्र में बने हुए हैं।
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पोम्पियो को ब्रसेल्स और लक्जमबर्ग की यात्रा करनी थी। आधिकारिक तौर पर पोम्पियो के कार्यालय ने बताया है कि जो बाइडेन प्रशासन को सत्ता सौंपने की चल रही प्रक्रिया के कारण अमेरिकी विदेश मंत्री ने अपनी यात्रा रद्द की है। लेकिन सत्ता हस्तांतरण का कार्यक्रम पहले से था। उसके बाद बावजूद पोम्पियो की यात्रा का कार्यक्रम बनाया गया था। यूरोपीय मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक छह जनवरी की घटना के बाद दुनिया भर में, खासकर अमेरिका के सहयोगी देशों में कड़ी प्रतिक्रिया हुई। लक्जमबर्ग के विदेश मंत्री ज्यां एसलबोर्न ने हमले को उकसाने के लिए ट्रंप को ‘अपराधी’ तक बता दिया। उन्होंने एक रेडियो चैनल से कहा कि ट्रंप एक उन्मादी व्यक्ति हैं, जिन पर अदालत में मुकदमा चलाया जाना चाहिए।
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समाचार एजेंसी रॉयटर्स और अमेरिकी टीवी चैनल फॉक्स न्यूज के मुताबिक दरअसल लग्जमबर्ग ने पोम्पियो की मेजबानी करने से मना कर दिया। लग्जमबर्ग एक छोटा सा देश है। उसके इस कदम को ट्रंप प्रशासन और अमेरिका के लिए एक बड़ी बेइज्जती के रूप में देखा गया है।
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पोम्पियो बेल्जियम की यात्रा पर ब्रसेल्स पहुंचने वाले थे। यहां उनकी बेल्जियम की उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री सोफी विल्मस से मुलाकात होने वाली थी। जिस समय कैपिटल हिल पर हमला जारी था, विल्मस ने एक ट्विट में उस नजारे को सदमा पहुंचाने वाला बताया था। उन्होंने कहा था कि कैपिटल हिल से आ रही तस्वीरें लोकतांत्रिक आदर्शों को चोट पहुंचाने वाली हैं। विल्मस ने कहा- इससे निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन के सामने मौजूद गंभीर चुनौती का पता चलता है। उनके सामने एक साझा उद्देश्य के लिए अमेरिकी समाज को एकजुट करने की चुनौती है। हमें विश्वास है कि वे ऐसा कर सकेंगे।
विश्लेषकों का कहना है कि इन टिप्पणियों के मद्देनजर पोम्पियो का बेल्जियम आना भी कठिन हो गया। इन असहज स्थितियों को देखते हुए उन्होंने यात्रा रद्द कर दी। दरअसल, ट्रंप विरोधी भावना सिर्फ बेल्जियम या लग्जमबर्ग में ही नहीं, बल्कि पूरे यूरोप में फैली हुई है। उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के महासचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने कैपिटल हिल की घटना को सदमा पहुंचाने वाला बताया था। साथ ही उन्होंने कहा था कि लोकतांत्रिक ढंग से हुए चुनाव के नतीजों को अवश्य स्वीकार किया जाना चाहिए। ये बात ट्रंप और पोम्पियो के रुख के खिलाफ थी। ब्रसेल्स में पोम्पियो की स्टोलटेनबर्ग के साथ डिनर मीटिंग थी।
एक समाचार एजेंसी के मुताबिक पोम्पियो के पिछले यूरोप दौरे के समय यूरोपियन यूनियन के कई अधिकारियों ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया था। वैसे यूरोपियन यूनियन ने इस खबर का खंडन किया था।
ब्रसेल्स बेल्जियम की राजधानी के साथ-साथ नाटो और यूरोपियन यूनियन का मुख्यालय भी है। पिछले तीन वर्षों के दौरान पोम्पियो जब कभी यहां आए, उनका जोरदार स्वागत हुआ था। लेकिन अब माहौल बदल गया है। विश्लेषकों के मुताबिक इसका अहसास उन्हें पिछली यूरोप यात्रा के समय हो गया था। हालिया प्रतिक्रियाओं ने इस बात की पुष्टि कर दी कि दुनिया के बहुत से देश ट्रंप प्रशासन के प्रतिनिधि की मेजबानी करने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में यात्रा रद्द कर देना ही पोम्पियो को उचित विकल्प लगा।