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ड्रैगन को चुभन: अमेरिका-जापान के गठजोड़ से भड़का चीन, 52 साल बाद ताइवान को लेकर बाइडन-सुगा ने की वार्ता
Sat, 17 Apr 2021 06:31 PM IST
सुरेंद्र जोशी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Sat, 17 Apr 2021 06:31 PM IST
सार
- चीन ने कहा- यह विभाजन का विडंबनापूर्ण प्रयास
- 1969 में जापान ने ताइवान पर निक्सन से की थी चर्चा
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US Taiwan flag
- फोटो : social media
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विस्तार
ताइवान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और जापानी प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा के बीच हुई वार्ता से चीन भड़क गया है। चीन ने अमेरिकी-जापान गठजोड़ के प्रदर्शन पर पलटवार करते हुए इसे 'विभाजन का विडंबनापूर्ण प्रयास' करार दिया। इससे पहले 1969 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन व जापान के इसाकू सातो ने चर्चा की थी।
चीन ने कहा कि शुक्रवार को पीएम सुगा और राष्ट्रपति बाइडन के संवाददाता सम्मेलन में लोकतंत्र व मानवाधिकारों को लेकर साझा मूल्यों पर संयुक्त बयान और हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन की गतिविधियों को लेकर चिंता जाहिर करना, 'द्विपक्षीय संबंधों के सामान्य विकास के दायरे से काफी अलग' था।
वाशिंगटन में चीनी दूतावास के एक प्रवक्ता ने शनिवार को एक बयान में कहा कि इससे ज्यादा विडंबना नहीं हो सकती कि अन्य देशों के खिलाफ विभाजन को बढ़ावा देने और गुट बनाने को ‘स्वतंत्र व मुक्त’ के झंडे तले रखा गया है।
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ताइवान में शांति व स्थिरता पर दिया जोर
बता दें, जापानी और अमेरिकी नेताओं द्वारा दिए गए बयान में ताइवान जलडमरूमध्य में 'शांति और स्थिरता के महत्व का भी उल्लेख था। रिचर्ड निक्सन व इसाकू सातो के बीच 1969 में हुई चर्चा के बाद यह पहला मौका है जब किसी जापानी प्रधानमंत्री ने ताइवान को लेकर अमेरिका से चर्चा की हो।
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चीन ने कहा कि शुक्रवार को पीएम सुगा और राष्ट्रपति बाइडन के संवाददाता सम्मेलन में लोकतंत्र व मानवाधिकारों को लेकर साझा मूल्यों पर संयुक्त बयान और हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन की गतिविधियों को लेकर चिंता जाहिर करना, 'द्विपक्षीय संबंधों के सामान्य विकास के दायरे से काफी अलग' था।
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वाशिंगटन में चीनी दूतावास के एक प्रवक्ता ने शनिवार को एक बयान में कहा कि इससे ज्यादा विडंबना नहीं हो सकती कि अन्य देशों के खिलाफ विभाजन को बढ़ावा देने और गुट बनाने को ‘स्वतंत्र व मुक्त’ के झंडे तले रखा गया है।
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ताइवान में शांति व स्थिरता पर दिया जोर
बता दें, जापानी और अमेरिकी नेताओं द्वारा दिए गए बयान में ताइवान जलडमरूमध्य में 'शांति और स्थिरता के महत्व का भी उल्लेख था। रिचर्ड निक्सन व इसाकू सातो के बीच 1969 में हुई चर्चा के बाद यह पहला मौका है जब किसी जापानी प्रधानमंत्री ने ताइवान को लेकर अमेरिका से चर्चा की हो।