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इतनी आसानी से हार नहीं मानने वाले हैं ट्रंप, लगातार बढ़ा रहे हैं बाइडन की मुसीबत
Mon, 23 Nov 2020 05:49 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Mon, 23 Nov 2020 05:49 PM IST
सार
बीते हफ्ते इकॉनमिस्ट/ यू-गोव के एक सर्वे में सामने आया कि रिपब्लिकन पार्टी के 84 फीसदी समर्थक नहीं मानते कि बाइडन वैध ढंग से जीते हैं। इसका मतलब है कि लाखों लोगों की निगाह में देश की चुनाव प्रणाली संदिग्ध हो गई है...
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Donald Trump
- फोटो : PTI (File Photo)
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विस्तार
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव का नतीजा साफ हुए दो हफ्ते से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है, लेकिन राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप हार मानने के लिए अब तक तैयार नहीं हैं। जाहिर है, निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन को सत्ता सौंपने की प्रक्रिया को उन्होंने पूरी तरह रोक रखा है। जबकि अब तक की मतगणना प्रक्रिया और उसे दी गई कानूनी चुनौतियों पर अदालतों का जो रुख सामने आया है, उससे चुनाव परिणाम पलटने की गुंजाइश लगातार घटती गई है। लेकिन ट्रंप की टीम एक के बाद दूसरे पेंच फंसाने की कोशिशों में है।
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जॉर्जिया राज्य में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडन की जीत हुई है। ट्रंप टीम ने वहां दोबारा गिनती की मांग की। तब फिर से वोटों को गिना गया। इसमें बाइडेन की जीत की पुष्टि हुई है। तो अब ट्रंप ने फिर तीसरी बार वोटों को गिनने की औपचारिक अर्जी दाखिल कर दी है। इसका मतलब हुआ कि लगभग 50 लाख वोटों को फिर से गिनना होगा। राज्य में 49,98,482 वोट पड़े हैं। इनमें जो बाइडन 12,670 वोटों से जीते हैं।
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इस राज्य के कानून के मुताबिक अगर कोई उम्मीदवार कुल मतदान के 0.5 फीसदी के अधिक के अंतर से विजयी होता है, तो उसे जीत का प्रमाणपत्र दे दिया जाता है। लेकिन ट्रंप की टीम की अड़चनों की वजह से यहां मामला फिलहाल उलझा हुआ है। ट्रंप की टीम ऐसे ही पेच मिशिगन और पेंसिल्वेनिया राज्यों में भी फंसाने की तैयारी में है।
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अधिकांश विशेषज्ञों की यही राय है कि ट्रंप को दूसरा कार्यकाल मिलने की संभावना ना के बराबर है। इसके बावजूद जिस तरह वे लगातार अपनी जीत के दावे कर रहे हैं, उससे देश के राजनीतिक माहौल को भारी नुकसान पहुंच रहा है। देश में राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है।
बीते हफ्ते इकॉनमिस्ट/ यू-गोव के एक सर्वे में सामने आया कि रिपब्लिकन पार्टी के 84 फीसदी समर्थक नहीं मानते कि बाइडन वैध ढंग से जीते हैं। इसका मतलब है कि लाखों लोगों की निगाह में देश की चुनाव प्रणाली संदिग्ध हो गई है। साथ ही ये लोग यही मानते रहेंगे कि जो बाइडन अवैध ढंग से राष्ट्रपति बने हैं। इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत माना जा रहा है।
वाटरगेट कांड का खुलासा करने वाले पत्रकार बॉब वुडवार्ड के सहयोगी रहे कार्ल बर्नस्टीन ने वेबसाइट द हिल.कॉम से कहा- "हम एक पागल राजा को अपने शासनकाल के आखिरी दिनों में देख रहे हैं, जो पूरे सिस्टम को ढाह देने के लिए धरती खोद डालने पर आमादा है। हमारे इतिहास में वह ऐसा पहला राष्ट्रपति है, जो चुनाव प्रणाली को लांछित करने की हद तक जाकर अमेरिका और इसकी जनता के हितों को क्षति पहुंचा रहा है।"
अमेरिकी राष्ट्रपतियों का इतिहास लिखने वाले लेखक लिंडन बैन्स ने इसी वेबसाइट से कहा- "जो एक बात सबके सामने है, वह यह कि ट्रंप जो कर रहे हैं उसकी कोई और मिसाल नहीं है। विवाद रहित चुनाव नतीजों पर एतराज कर वे अमेरिकी लोकतंत्र को अवरुद्ध कर रहे हैं।”
रिपब्लिकन पार्टी में ट्रंप के खिलाफ अब तक इक्का-दुक्का आवाजें ही उठी हैं। ऐसी आवाज उठाने वालों में एक सीनेटर मिट रोमनी हैं, जो 2012 के राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार थे। उन्होंने कहा है कि ट्रंप अब तक व्यापक रूप से चुनावी धांधली होने के अपने दावे के पक्ष में कोई तथ्य पेश नहीं कर पाए हैं। ट्रंप के रुख के बारे में उन्होंने कहा- किसी अमेरिकी राष्ट्रपति के इससे अधिक अलोकतांत्रिक किसी व्यवहार की कल्पना करना कठिन है।
जिन राज्यों से बाइडेन जीते हैं और जहां रिपब्लिकन पार्टी सत्ता में है, वहां ट्रंप रिपब्लिकन अधिकारियों पर चुनाव नतीजों को प्रमाणित ना करने का दबाव डाल रहे हैं। जानकारों का कहना है कि अगर उन अधिकारियों ने ऐसा किया, तो डेमोक्रेटिक पार्टी निश्चित रूप से कोर्ट जाएगी। लेकिन ट्रंप की रणनीति संभवतया यही है। वे चुनाव परिणामों को प्रमाणित होने को अधिक से अधिक समय तक रोकना चाहते हैँ। इस बीच उनके ट्विट्स और उनकी टीम की तरफ से लगातार किए जा रहे चुनावी धांधली के दावों से उनके लाखों समर्थकों में आक्रोश पैदा हो रहा है। इसी को लेकर देश में अब चिंता बढ़ती जा रही है।