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US: व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति ट्रंप से मिले जर्मन चांसलर मर्ज, पश्चिम एशिया में संकट के बीच मुलाकात
Tue, 03 Mar 2026 10:36 PM IST
Nirmal Kant
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन डीसी।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन डीसी।
Published by: Nirmal Kant
Updated Tue, 03 Mar 2026 10:36 PM IST
सार
US: पश्चिम एशिया में गहराते संकट के बीच जर्मन चांसलर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्हाइट हाउस में मुलाकात की है और युद्ध के बाद की स्थिति पर चर्चा की है। मर्च ने बातचीत के दौरान कहा कि सभी चाहते हैं कि यह युद्ध जल्द समाप्त हो। पढ़िए रिपोर्ट-
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फ्रेडरिक मर्ज, डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : व्हाइट हाउस/यूट्यूब
विस्तार
पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत की। मर्ज 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' शुरू होने के बाद ट्रंप से मिलने वाले पहले यूरोपीय हैं। इस ऑपरेशन में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके कई प्रमुख सहयोगी मारे गए हैं।
बातचीत के दौरान मर्ज ने कहा, तेहरान में इस खौफनाक शासन को हटाने के मामले में हम एकमत हैं और हम इसके बाद के हालात पर भी बात करेंगे। यानी उनके हटने के बाद अब आगे क्या होगा। ट्रंप ने ईरान में सत्ता परिवर्तन की बात कही है। हालांकि, उन्होंने इसे औपचारिक तौर पर युद्ध का कोई लक्ष्य नहीं बताया है। न ही अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और न ही रक्षा मंत्री पीटहेगसेथ ने इसे युद्ध का उद्देश्य बताया है। मर्ज ने ट्रंप से यह भी कहा, हम सभी चाहते हैं कि जितनी जल्दी हो सके, यह युद्ध समाप्त हो।
जर्मन चांसलर ने कहा, यूक्रेन के मसले पर भी चर्चा करनी है। दुनिया में कई बुरे लोग हैं। हमें मिलकर समस्या से निपटना होगा।
वहीं, राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, हम इस समय जो कर रहे हैं, अगर वह नहीं करते, तो परमाणु युद्ध हो गया होता और वे कई देशों को तबाह कर देते। क्यों आप जानते हैं? वे बीमार लोग हैं। वे मानसिक रूप से बीमार, आक्रोशित और पागल लोग हैं। वे बीमार हैं।
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ट्रंप ने कहा, मैंने अपने किसी भी फैसले पर इतनी तारीफ पहले कभी नहीं सुनी। इसलिए अगर कुछ समय के लिए तेल की कीमतें ऊंची रहती भी हैं, तो जैसे ही यह सब खत्म होगा, मुझे भरोसा है कि कीमतें पहले से भी नीचे आ जाएंगी।
मर्ज की पिछली वॉशिंगटन यात्रा के बाद क्या बदला है?
मर्ज ने पिछले साल जून में पहली बार व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी। हालांकि, चांसलर ने उस बैठक के बाद कहा था कि वह बातचीत से 'बेहद संतुष्ट' हैं। लेकिन कई मायनों में चर्चा के मुद्दे अब भी वही बने हुए हैं। इसका सबसे स्पष्ट अपवाद ईरान के खिलाफ शुरू हुआ युद्ध है, जो शनिवार सुबह भड़क उठा।
इसके अलावा, अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच पिछले साल समझौता होने के बावजूद ट्रंप की टैरिफ नीति एक बार फिर एजेंडा में हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा टैरिफ को गैरकानूनी घोषित किए जाने के बाद ट्रंप ने सभी व्यापारिक साझेदारों पर 15 फीसदी नया टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी। इसके चलते नए टैरिफ को लेकर स्थिति स्पष्ट होने तक समझौते की पुष्टि की प्रक्रिया को यूरोपीय संघ ने रोक दिया है।
यूक्रेन में चार साल से अधिक समय से युद्ध जारी है। यह अब भी एक अहम मुद्दा बना हुआ है। ट्रंप ने अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपति और यूरोपीय सहयोगियों की तुलना में यूक्रेन को कम समर्थन दिया है। रूस के साथ शांति समझौता कराने की कोशिशें भी नाकाम रही हैं। जबकि शुरुआती मसौदों में रूस को बड़े भू-भाग सौंपने की बात सामने आई थी।
ये भी पढ़ें: ईरान: नए सर्वोच्च नेता के चुनाव की प्रक्रिया तेज, जल्द होगा फैसला; संकट के बीच ईरान में नेतृत्व परिषद की बैठक
उनकी पिछली मुलाकात के बाद एक और मुद्दा उभरकर सामने आया है, वह है ग्रीनलैंड का सवाल। ट्रंप अपने पहले कार्यकाल से ही कई बार कह चुके हैं कि वह सुरक्षा कारणों से ग्रीनलैंड पर अमेरिका का नियंत्रण चाहते हैं। इससे अमेरिका-यूरोप संबंध अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे और नाटो के कुछ सदस्य यह सवाल उठाने लगे थे कि अगर अमेरिका ने अर्ध-स्वायत्त डेनिश क्षेत्र को बलपूर्वक लेने की कोशिश की, तो क्या उन्हें अमेरिका के खिलाफ युद्ध में उतरना पड़ेगा।
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बातचीत के दौरान मर्ज ने कहा, तेहरान में इस खौफनाक शासन को हटाने के मामले में हम एकमत हैं और हम इसके बाद के हालात पर भी बात करेंगे। यानी उनके हटने के बाद अब आगे क्या होगा। ट्रंप ने ईरान में सत्ता परिवर्तन की बात कही है। हालांकि, उन्होंने इसे औपचारिक तौर पर युद्ध का कोई लक्ष्य नहीं बताया है। न ही अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और न ही रक्षा मंत्री पीटहेगसेथ ने इसे युद्ध का उद्देश्य बताया है। मर्ज ने ट्रंप से यह भी कहा, हम सभी चाहते हैं कि जितनी जल्दी हो सके, यह युद्ध समाप्त हो।
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जर्मन चांसलर ने कहा, यूक्रेन के मसले पर भी चर्चा करनी है। दुनिया में कई बुरे लोग हैं। हमें मिलकर समस्या से निपटना होगा।
वहीं, राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, हम इस समय जो कर रहे हैं, अगर वह नहीं करते, तो परमाणु युद्ध हो गया होता और वे कई देशों को तबाह कर देते। क्यों आप जानते हैं? वे बीमार लोग हैं। वे मानसिक रूप से बीमार, आक्रोशित और पागल लोग हैं। वे बीमार हैं।
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ट्रंप ने कहा, मैंने अपने किसी भी फैसले पर इतनी तारीफ पहले कभी नहीं सुनी। इसलिए अगर कुछ समय के लिए तेल की कीमतें ऊंची रहती भी हैं, तो जैसे ही यह सब खत्म होगा, मुझे भरोसा है कि कीमतें पहले से भी नीचे आ जाएंगी।
मर्ज की पिछली वॉशिंगटन यात्रा के बाद क्या बदला है?
मर्ज ने पिछले साल जून में पहली बार व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी। हालांकि, चांसलर ने उस बैठक के बाद कहा था कि वह बातचीत से 'बेहद संतुष्ट' हैं। लेकिन कई मायनों में चर्चा के मुद्दे अब भी वही बने हुए हैं। इसका सबसे स्पष्ट अपवाद ईरान के खिलाफ शुरू हुआ युद्ध है, जो शनिवार सुबह भड़क उठा।
इसके अलावा, अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच पिछले साल समझौता होने के बावजूद ट्रंप की टैरिफ नीति एक बार फिर एजेंडा में हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा टैरिफ को गैरकानूनी घोषित किए जाने के बाद ट्रंप ने सभी व्यापारिक साझेदारों पर 15 फीसदी नया टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी। इसके चलते नए टैरिफ को लेकर स्थिति स्पष्ट होने तक समझौते की पुष्टि की प्रक्रिया को यूरोपीय संघ ने रोक दिया है।
यूक्रेन में चार साल से अधिक समय से युद्ध जारी है। यह अब भी एक अहम मुद्दा बना हुआ है। ट्रंप ने अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपति और यूरोपीय सहयोगियों की तुलना में यूक्रेन को कम समर्थन दिया है। रूस के साथ शांति समझौता कराने की कोशिशें भी नाकाम रही हैं। जबकि शुरुआती मसौदों में रूस को बड़े भू-भाग सौंपने की बात सामने आई थी।
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उनकी पिछली मुलाकात के बाद एक और मुद्दा उभरकर सामने आया है, वह है ग्रीनलैंड का सवाल। ट्रंप अपने पहले कार्यकाल से ही कई बार कह चुके हैं कि वह सुरक्षा कारणों से ग्रीनलैंड पर अमेरिका का नियंत्रण चाहते हैं। इससे अमेरिका-यूरोप संबंध अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे और नाटो के कुछ सदस्य यह सवाल उठाने लगे थे कि अगर अमेरिका ने अर्ध-स्वायत्त डेनिश क्षेत्र को बलपूर्वक लेने की कोशिश की, तो क्या उन्हें अमेरिका के खिलाफ युद्ध में उतरना पड़ेगा।
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