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West Asia: पूर्व रूसी राष्ट्रपति का US पर तंज- जंग के बीच ईरान ने किया एटमी हथियार का परीक्षण, नाम है...
Wed, 08 Apr 2026 08:24 PM IST
राकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 08 Apr 2026 08:24 PM IST
सार
रूस के कद्दावर नेता दिमित्री मेदवेदेव ने दावा किया है कि ईरान पहले ही अपनी सबसे बड़ी ताकत का 'परीक्षण' कर चुका है। मेदवेदेव ने होर्मुज जलडमरूमध्य को ईरान का असली परमाणु हथियार बताया है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने की क्षमता रखता है।
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दिमित्री मेदवेदेव, डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : एक्स/दिमित्री मेदवेदेव, डोनाल्ड ट्रंप
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विस्तार
पश्चिम एशिया से 40 दिनों बाद राहत की खबर आई है। दरअसल, अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच सीजफायर का एलान हो गया। तीनों देशों ने दो हफ्ते के लिए शांति की राह को अपनाया है। इस बीच रूस ने अमेरिका पर तंज कसा है। रूसी सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष और देश के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने वैश्विक कूटनीति के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
मेदवेदेव ने कहा है कि ईरान को अपनी ताकत दिखाने के लिए किसी पारंपरिक परमाणु बम की जरूरत नहीं है, क्योंकि उसके पास होर्मुज के रूप में एक ऐसा 'परमाणु हथियार' है जिसका परीक्षण वह पहले ही कर चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर कैसे हुआ, स्पष्ट नहीं है।
क्या है मेदवेदेव के बयान का मतलब?
मेदवेदेव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम का एलान हो चुका है। उन्होंने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि लोग ईरान के यूरेनियम संवर्धन और मिसाइलों पर नजर रख रहे हैं, लेकिन असली खतरा समुद्री रास्ते होर्मुज में छिपा है। मेदवेदेव ने संकेत दिया है कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद कर देता है, तो इसका असर किसी परमाणु विस्फोट से कम नहीं होगा। यह वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा देगा और पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्था को घुटनों पर ला देगा।
यह भी पढ़ें: West Asia: अमेरिका का दावा- जंग में ईरान की 80% वायु रक्षा प्रणाली खत्म, US के इस्तेमाल हुए सिर्फ 10% हथियार
दुनिया की रग है 'होर्मुज'
भौगोलिक दृष्टि से देखें तो होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल और भारी मात्रा में एलएनजी यहीं से होकर गुजरती है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने बार-बार इस रास्ते पर पाबंदी लगाने की धमकी देकर यह साबित कर दिया है कि उसकी भौगोलिक स्थिति ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।
रूस के पूर्व राष्ट्रपति मेदवेदेव का कहना है कि ईरान की यह 'अक्षय क्षमता' उसे किसी भी महाशक्ति से टकराने का साहस देती है। जब वे इसे 'परमाणु हथियार' कहते हैं, तो उनका इशारा उस तबाही की ओर होता है जो तेल की सप्लाई रुकने से पूरी दुनिया में मचेगी। फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच एक अस्थायी युद्धविराम हुआ है। लेकिन जमीन पर स्थिति इसके उलट है। सीजफायर के एलान के बाद भी कई इलाकों में ड्रोन अटैक देखा गया है।
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मेदवेदेव ने कहा है कि ईरान को अपनी ताकत दिखाने के लिए किसी पारंपरिक परमाणु बम की जरूरत नहीं है, क्योंकि उसके पास होर्मुज के रूप में एक ऐसा 'परमाणु हथियार' है जिसका परीक्षण वह पहले ही कर चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर कैसे हुआ, स्पष्ट नहीं है।
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It's not clear how the truce between Washington and Tehran will play out. But one thing is certain - Iran has tested its nuclear weapons. It is called the Strait of Hormuz. Its potential is inexhaustible.
विज्ञापन विज्ञापन— Dmitry Medvedev (@MedvedevRussiaE) April 8, 2026
क्या है मेदवेदेव के बयान का मतलब?
मेदवेदेव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम का एलान हो चुका है। उन्होंने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि लोग ईरान के यूरेनियम संवर्धन और मिसाइलों पर नजर रख रहे हैं, लेकिन असली खतरा समुद्री रास्ते होर्मुज में छिपा है। मेदवेदेव ने संकेत दिया है कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद कर देता है, तो इसका असर किसी परमाणु विस्फोट से कम नहीं होगा। यह वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा देगा और पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्था को घुटनों पर ला देगा।
यह भी पढ़ें: West Asia: अमेरिका का दावा- जंग में ईरान की 80% वायु रक्षा प्रणाली खत्म, US के इस्तेमाल हुए सिर्फ 10% हथियार
दुनिया की रग है 'होर्मुज'
भौगोलिक दृष्टि से देखें तो होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल और भारी मात्रा में एलएनजी यहीं से होकर गुजरती है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने बार-बार इस रास्ते पर पाबंदी लगाने की धमकी देकर यह साबित कर दिया है कि उसकी भौगोलिक स्थिति ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।
रूस के पूर्व राष्ट्रपति मेदवेदेव का कहना है कि ईरान की यह 'अक्षय क्षमता' उसे किसी भी महाशक्ति से टकराने का साहस देती है। जब वे इसे 'परमाणु हथियार' कहते हैं, तो उनका इशारा उस तबाही की ओर होता है जो तेल की सप्लाई रुकने से पूरी दुनिया में मचेगी। फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच एक अस्थायी युद्धविराम हुआ है। लेकिन जमीन पर स्थिति इसके उलट है। सीजफायर के एलान के बाद भी कई इलाकों में ड्रोन अटैक देखा गया है।
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