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नेपाल में गहरा रहा असंतोष: राजनीतिक स्थिरता दूर की कौड़ी, करीब 12% बेरोजगारी; भारत समेत इन देशों में पलायन...
Tue, 09 Sep 2025 01:55 PM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला नेटवर्क काठमांडू
अमर उजाला नेटवर्क काठमांडू
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Tue, 09 Sep 2025 01:55 PM IST
सार
नेपाल की जनता खास तौर पर युवाओं में असंतोष गहरा रहा है। प्रतिकूल परिस्थितियों में राजनीतिक स्थिरता दूर की कौड़ी है। देश में बेरोजगारी दर 12% के आसपास है। खाड़ी देशों, मलयेशिया और भारत की ओर पलायन कर रहे यहां के युवा चिंता का सबब बनने लगे हैं। यही कारण है कि भारत ने भी सीमा पर चौकसी बढ़ा दी है। मौजूदा भूराजनीतिक हालात पर पढ़िए यह रिपोर्ट
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नेपाल में प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट / एजेंसी
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विस्तार
नेपाल में लोकतांत्रिक व्यवस्था लागू हुए डेढ़ दशक से अधिक समय हो चुका है, लेकिन राजनीतिक स्थिरता दूर की कौड़ी बनी हुई है। बीबीसी नेपाली सेवा और हिमालयन टाइम्स की रिपोर्टों के अनुसार, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार व जातिगत असमानता से फैले असंतोष से आज देश छात्र आंदोलन की चपेट में है। भले ही इसका तात्कालिक कारण सोशल मीडिया पर बैन हो, लेकिन गुस्सा बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के पीछे छिपा हुआ है।
रोजगार सृजन की गति धीमी
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन और विश्व बैंक के आंकड़े बताते हैं कि नेपाल की बेरोजगारी दर 2024 में लगभग 11-12% है। लेकिन अनौपचारिक श्रम और मौसमी कामकाज के चलते वास्तविक स्थिति कहीं अधिक गंभीर है। लोकतंत्र आने के बाद शिक्षा का प्रसार हुआ, मगर रोजगार सृजन की गति धीमी रही। परिणामस्वरूप लाखों युवाओं को खाड़ी देशों, मलेशिया और भारत की ओर पलायन करना पड़ा। यही स्थिति बार-बार युवाओं और छात्रों को आंदोलित करती रही है।
महंगाई, ईंधन संकट और घोटालों के खिलाफ छात्रों में आक्रोश
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रैंकिंग में नेपाल लगातार दक्षिण एशिया के सबसे भ्रष्ट देशों में गिना जाता है। नेता, अफसर, बिचौलिए और मुनाफाखोर मालामाल हैं। जनता का गुस्सा बार-बार इस बात पर फूटा कि लोकतंत्र ने अभिव्यक्ति का मंच तो दिया, पर भ्रष्टाचार के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाया गया। यही वजह है कि हाल में महंगाई, ईंधन संकट और घोटालों के खिलाफ छात्र संगठनों और नागरिक समूहों ने देशव्यापी प्रदर्शन किए।
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जातिगत असमानता गहराई
संसद और सत्ता संरचना में जातिगत असमानता भी गहरे असंतोष की वजह बनी। आंकड़ों के अनुसार पहाड़ी उच्च जातियों (ब्राह्मण-छेत्री) का संसद में लगभग 50% प्रतिनिधित्व है, जबकि कुल आबादी में उनकी हिस्सेदारी 30% है। मधेशी समुदाय की 20% आबादी के बावजूद संसद में प्रतिनिधित्व केवल 15% है। आदिवासी जनजाति का 35% आबादी के बावजूद 20% प्रतिनिधित्व है। दलित समुदाय की आबादी 13% है, लेकिन प्रतिनिधित्व केवल 5%। यह असमानता 2015 के मधेश आंदोलन और उसके बाद हुए क्षेत्रीय संघर्षों की प्रमुख वजह बनी।
ये भी पढ़ें- Nepal: 20 की मौत के बाद झुकी सरकार, ओली के सुर बदले, कहा- बैन के पक्ष में नहीं, 15 दिन में आएगी जांच रिपोर्ट
भारत-नेपाल सीमा पर अलर्ट जारी, सुरक्षा बढ़ाई गई, ड्रोन से निगरानी
नेपाल में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए भारत-नेपाल सीमा पर अलर्ट जारी कर दिया गया। नेपाल से लगने वाले उत्तर प्रदेश के महाराजगंज, पीलीभीत, लखीमपुर, खीरी, बहराइच और बलरामपुर जिलों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सीमा के आसपास के इलाकों पर ड्रोन से निगरानी रखी जा रही है। सीमा चौकियों पर सैनिकों की संख्या बढ़ा दी गई है और आने-जाने वालों की सघन चेकिंग की जा रही है। भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा का जिम्मा सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के पास है।
ये भी पढ़ें- Nepal Social Media Ban Removed: विरोध-हिंसा के बाद नेपाल सरकार का यू-टर्न, सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंध हटाए
1751 किमी लंबी सीमा जुड़ती है नेपाल से
एसएसबी ने सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी है और भारतीय क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अशांति फैलने से रोकने के लिए स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है। भारत और नेपाल के बीच 1,751 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है जो उत्तराखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और सिक्किम सहित राज्यों में फैली है। दोनों देशों के बीच खुला सीमा है और दोनों देशों के नागरिकों की बेरोकटोक आवाजाही की अनुमति है। बलरामपुर में सीमा से लगने वाले थानों में अतिरिक्त जवानों को तैनात किया गया है। ड्रोन से निगरानी की जा रही है।
ये भी पढ़ें- Nepal: नेपाल से लगते 1751 किमी लंबे बॉर्डर पर अतिरिक्त फोर्स नहीं लगाएगी SSB, गृह मंत्रालय के आदेश का इंतजार
अशांति फैलाने वाले लोगों की पहचान के लिए अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल
उत्तर प्रदेश के बहराइच में भारत और नेपाल को जोड़ने वाले राजमार्गों, गांवों की पगडंडियों और वन मार्गों पर गश्त और जांच बढ़ा दी गई है। एसएसबी की 42वीं बटालियन के कमांडेंट गंगा सिंह उदावत ने कहा कि जिले से सटे नेपाल के नेपालगंज के पास छिटपुट विरोध प्रदर्शनों की सूचना मिलने के बावजूद, सतर्कता बढ़ा दी गई है। चेहरा पहचानने वाली प्रणालियों और स्वचालित नंबर प्लेट रीडर जैसे निगरानी उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। एसएसबी के साथ स्थानीय पुलिस भी सीमाई इलाकों में गश्त कर रही है।
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रोजगार सृजन की गति धीमी
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन और विश्व बैंक के आंकड़े बताते हैं कि नेपाल की बेरोजगारी दर 2024 में लगभग 11-12% है। लेकिन अनौपचारिक श्रम और मौसमी कामकाज के चलते वास्तविक स्थिति कहीं अधिक गंभीर है। लोकतंत्र आने के बाद शिक्षा का प्रसार हुआ, मगर रोजगार सृजन की गति धीमी रही। परिणामस्वरूप लाखों युवाओं को खाड़ी देशों, मलेशिया और भारत की ओर पलायन करना पड़ा। यही स्थिति बार-बार युवाओं और छात्रों को आंदोलित करती रही है।
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महंगाई, ईंधन संकट और घोटालों के खिलाफ छात्रों में आक्रोश
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रैंकिंग में नेपाल लगातार दक्षिण एशिया के सबसे भ्रष्ट देशों में गिना जाता है। नेता, अफसर, बिचौलिए और मुनाफाखोर मालामाल हैं। जनता का गुस्सा बार-बार इस बात पर फूटा कि लोकतंत्र ने अभिव्यक्ति का मंच तो दिया, पर भ्रष्टाचार के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाया गया। यही वजह है कि हाल में महंगाई, ईंधन संकट और घोटालों के खिलाफ छात्र संगठनों और नागरिक समूहों ने देशव्यापी प्रदर्शन किए।
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जातिगत असमानता गहराई
संसद और सत्ता संरचना में जातिगत असमानता भी गहरे असंतोष की वजह बनी। आंकड़ों के अनुसार पहाड़ी उच्च जातियों (ब्राह्मण-छेत्री) का संसद में लगभग 50% प्रतिनिधित्व है, जबकि कुल आबादी में उनकी हिस्सेदारी 30% है। मधेशी समुदाय की 20% आबादी के बावजूद संसद में प्रतिनिधित्व केवल 15% है। आदिवासी जनजाति का 35% आबादी के बावजूद 20% प्रतिनिधित्व है। दलित समुदाय की आबादी 13% है, लेकिन प्रतिनिधित्व केवल 5%। यह असमानता 2015 के मधेश आंदोलन और उसके बाद हुए क्षेत्रीय संघर्षों की प्रमुख वजह बनी।
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भारत-नेपाल सीमा पर अलर्ट जारी, सुरक्षा बढ़ाई गई, ड्रोन से निगरानी
नेपाल में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए भारत-नेपाल सीमा पर अलर्ट जारी कर दिया गया। नेपाल से लगने वाले उत्तर प्रदेश के महाराजगंज, पीलीभीत, लखीमपुर, खीरी, बहराइच और बलरामपुर जिलों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सीमा के आसपास के इलाकों पर ड्रोन से निगरानी रखी जा रही है। सीमा चौकियों पर सैनिकों की संख्या बढ़ा दी गई है और आने-जाने वालों की सघन चेकिंग की जा रही है। भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा का जिम्मा सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के पास है।
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1751 किमी लंबी सीमा जुड़ती है नेपाल से
एसएसबी ने सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी है और भारतीय क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अशांति फैलने से रोकने के लिए स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है। भारत और नेपाल के बीच 1,751 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है जो उत्तराखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और सिक्किम सहित राज्यों में फैली है। दोनों देशों के बीच खुला सीमा है और दोनों देशों के नागरिकों की बेरोकटोक आवाजाही की अनुमति है। बलरामपुर में सीमा से लगने वाले थानों में अतिरिक्त जवानों को तैनात किया गया है। ड्रोन से निगरानी की जा रही है।
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अशांति फैलाने वाले लोगों की पहचान के लिए अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल
उत्तर प्रदेश के बहराइच में भारत और नेपाल को जोड़ने वाले राजमार्गों, गांवों की पगडंडियों और वन मार्गों पर गश्त और जांच बढ़ा दी गई है। एसएसबी की 42वीं बटालियन के कमांडेंट गंगा सिंह उदावत ने कहा कि जिले से सटे नेपाल के नेपालगंज के पास छिटपुट विरोध प्रदर्शनों की सूचना मिलने के बावजूद, सतर्कता बढ़ा दी गई है। चेहरा पहचानने वाली प्रणालियों और स्वचालित नंबर प्लेट रीडर जैसे निगरानी उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। एसएसबी के साथ स्थानीय पुलिस भी सीमाई इलाकों में गश्त कर रही है।