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क्या डोनाल्ड ट्रंप को रूस की खुफिया एजेंसी केजीबी ने तैयार किया था?

Sun, 31 Jan 2021 04:25 PM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: संजीव कुमार झा Updated Sun, 31 Jan 2021 04:25 PM IST
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Russia Cultivated Donald Trump As An Asset For 40 Years, Reveals Ex-spy For KGB
डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : PTI

केजीबी (सोवियत संघ की खुफिया एजेंसी) ने डोनाल्ड ट्रंप को तैयार करने में 40 साल लगाए। ये दावा केजीबी के एक पूर्व एजेंट यूरी श्वेत्स ने किया है। श्वेत्स ने ब्रिटिश अखबार ‘द गार्जियन’ से बातचीत में ये बात कही है। श्वेत्स को 1980 के दशक में केजीबी ने वॉशिंगटन में नियुक्त किया था। श्वेत्स ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की तुलना ‘द कैम्ब्रिज फाइव’ से की है। ‘द कैम्ब्रिज फाइव’ ब्रिटेन का एक जासूसी नेटवर्क था, जो सोवियत संघ को दूसरे विश्व युद्ध और उसके बाद शीत युद्ध के आरंभिक वर्षों में खुफिया जानकारियां देता था।

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श्वेत्स अब 67 साल का है। अमेरिकी पत्रकार क्रेग अंगर ने हाल में अमेरिकन कॉम्प्रोमैट नाम की एक किताब लिखी है। इस किताब में दी गई सूचनाओं का प्रमुख स्रोत श्वेत्स ही है। अंगर इसके पहले हाउस ऑफ ट्रंप और हाउस ऑफ पुतिन नाम की किताबें भी लिख चुके हैं।
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नई किताब में बैंकर और फाइनेंशर रहे जेफरी एपस्टीन के साथ डोनाल्ड ट्रंप के रिश्तों पर भी रोशनी डाली गई है। जेफरी एपस्टीन पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे। इन आरोपों में उसे सजा सुनाई गई थी। श्वेत्स ने द गार्जियन से कहा- यह एक उदाहरण है कि कैसे लोगों को उस समय केजीबी ने अपने संपर्क में लिया जब वे छात्र थे। ये लोग बाद में महत्त्वपूर्ण पदों पर पहुंचे। यही ट्रंप के साथ हुआ।
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श्वेत्स को रूसी समाचार एजेंसी तास के संवाददाता के रूप में वॉशिंगटन भेजा गया था। 1993 में वह स्थायी रूप से अमेरिका में बस गया। उसने अमेरिकी नागरिकता ले ली। वह कॉरपोरेट सिक्युरिटी जांचकर्ता के रूप में काम करता है। वह केजीबी के पूर्व जासूस अलेक्सांद्र लितविनेन्को का भागीदार भी था, जिसकी लंदन में 2006 में हत्या कर दी गई।

अंगर के मुताबिक ट्रंप पर सबसे पहले रूसी जासूसों का ध्यान 1977 में गया, जब ट्रंप ने अपनी पहली पत्नी इवाना जेलनिकोवा से शादी की थी। जेलनिकोवा चेक मूल की रहने मॉडल थी। ट्रंप तब जासूसी के केंद्र में आ गए। इस जासूसी की निगरानी चेकोस्लाविकया की खुफिया सर्विस ने केजीबी की मदद की थी।

शादी के तीन साल बाद ट्रंप ने अपनी पहली खास जायदाद खड़ी की। उन्होंने न्यूयॉर्क में द ग्रैंड हयात न्यूयॉर्क होटल खोला। होटल के लिए उन्होंने 200 टेलीविजन सेट सोवियत संघ छोड़कर आए कारोबारी सिमयोन किसलिन से खरीदी। किसलिन ने जॉय- लुड नाम के कारोबारी के साथ मिल कर फिफ्थ एवेन्यू नाम की कंपनी शुरू की थी।

श्वेत्स का दावा है कि जॉल-लुड केजीबी के लिए काम करता था। किसलिन को उसने ऐसे लोगों की पहचान के काम में लगा रखा था, जिन्हें केजीबी अपनी सेवा में ले सके। श्वेत्स के मुताबिक ट्रंप की संभावित स्रोत के रूप में पहचान किसलिन ने ही की। वैसे किसलिन ने इस आरोप का खंडन किया है कि उसका केजीबी से कोई संबंध था।

श्वेत्स का कहना है कि जब ट्रंप ने 1987 में पहली बार अपनी पत्नी इवाना के साथ मास्को और सेंट पीटर्सबर्ग की यात्रा की, तब केजीबी के एजेंटों ने उनकी खूब आवभगत की। इसी दौरान उन्होंने ट्रंप के दिमाग में ये विचार डाला कि उन्हें राजनीति में आना चाहिए। श्वेत्स का कहना है कि इस दौरान केजीबी ने ट्रंप के व्यक्तित्व के बारे में पूरी जानकारी इकट्ठी कर ली।

वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि ट्रंप बौद्धिक और मनोवैज्ञानिक रूप से एक कमजोर व्यक्ति हैं और चापलूस उन्हें खूब रास आते हैं। इन एजेंटों ने ट्रंप की खूब तारीफ की और ये कहा कि आप जैसे व्यक्ति को अमेरिका का राष्ट्रपति होना चाहिए। आगे चल कर केजीबी ने ट्रंप की इन्हीं कमजोरियों का फायदा उठाया।

साल 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में ट्रंप की जीत पर मास्को में खूब खुशी मनाई गई थी। अमेरिका में ट्रंप और रूस के बीच रिश्तों की जांच कराई गई थी। ये जांच विशेष वकील रॉबर्ड मूलर की अध्यक्षता में हुई। लेकिन इसमें आरोप की पुष्टि नहीं हो सकी। श्वेत्स का कहना है कि मूलर रिपोर्ट निराशाजनक थी। उनका कहना है कि मूलर रिपोर्ट से कहीं अधिक जानकारियां क्रेग अंगेर की किताब से सामने आएंगी।

अंगर का कहना है कि वे यह नहीं कहना चाहते कि ट्रंप रूसियों के हाथ की कठपुतली थे। ये साजिश इतनी बड़ी नहीं थी कि रूसी एजेंटों ने 40 साल की तैयारी के बाद ट्रंप को राष्ट्रपति बनवा दिया।

लेकिन इस कहानी से यह जरूर साफ होता है कि रूसी अपने माफिक लोगों की तलाश में रहते थे। ट्रंप जैसा आत्ममुग्ध व्यक्ति स्वाभाविक रूप से उनके निशाने पर आ गया, जिससे उन्होंने 40 साल से संपर्क बना रखा था।

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